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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की कहानी पॉलिटिकल कनेक्शन और करप्शन के कॉकटेल की ज़िंदा मिसाल है!

ख़ुशदीप सहगल-

छत्तीसगढ़ में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का दोषी कौन सुरेश चंद्राकर या सिस्टम? 10वीं फेल ठेकेदार सुरेश चंद्राकर 15 साल में कैसे बना करप्शन किंग? पॉलिटिकल कनेक्शन्स, करप्शन और कॉन्ट्रेक्ट्स का कॉकटेल है सुरेश चंद्राकर के करोड़ों में खेलने की कहानी.

छत्तीसगढ़ के युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर को नए साल की शुरुआत के साथ जिस बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया उसने पूरे देश को दहला दिया. इस मर्डर का मास्टरमाइंड और कोई नहीं मुकेश का ही करीबी रिश्तेदार सुरेश चंद्राकर था. सरकारी ठेके लेकर छत्तीगढ़ में सड़कों का निर्माण करने वाला सुरेश चंद्राकर कुछ साल पहले तक एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के घर पर रसोइये के साथ और छोटे मोटे काम करता था. फिर वो देखते ही देखते कैसे करोड़ों में खेलने वाला ठेकेदार बन गया, ये सब दिखाता है कि सिस्टम को कैसे करप्शन के दम पर अपनी चेरी बनाया जा सकता है. वो भी एक ऐसे शख्स की ओर से जो छोटी उम्र में ही स्कूली पढ़ाई से तौबा कर बैठा.

42 साल के सुरेश चंद्राकर के बारे में आगे बात करने से पहले बता दें कि इस शख्स ने 2021 में शादी की तो उसकी चकाचौंध पूरा बीजापुर देखता ही रह गया. इस शादी की चर्चे छत्तीसगढ़ में दूर दूर तक हुए. जहां दुल्हन को जगदलपुर से हेलीकॉप्टर के ज़रिए बीजापुर लाया गया वहीं मेहमानों के मनोरंजन के लिए रूसी कलाकारों के ट्रूप को बुलाया गया. सुरेश चंद्राकर ने शादी में पैसा पानी की तरह बहाया.

अब जानते हैं सुरेश चंद्राकर का बचपन कैसा बीता और कैसे वो करोड़ों के वारे न्यारे करने वाला छत्तीसगढ़ का बडा कॉन्ट्रेक्टर बन गया. सुरेश चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके बासागुडा में एक कांस्टेबल के घर जन्म लिया. पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से सुरेश दसवीं पास नहीं कर सका. बाद में सुरेश बासागुड़ा से बीजापुर आ गया.

2005 में छत्तीसगढ़ में जब रमन सिंह की सरकार थी तो नक्सल प्रभावित इलाकों में कार्रवाई के लिए सल्वा जुडूम नाम के संगठन का गठन किया गया. इस संगठन में ऐसे युवकों को शामिल किया गया जो नक्सलियों की सूचना पुलिस-प्रशासन को दे सकें. सुरेश इस संगठन में एसपीओ यानि स्पेशल पुलिस अफसर के तौर पर शामिल हो गया और उसे आठ हज़ार रुपए महीना मिलने लगे. खाना बनाने में सुरेश माहिर था इसलिए वो साथ ही एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के घर पर काम भी करने लगा. साथ ही सुरेश पुलिस और प्रशासन में संपर्क भी बढ़ाने लगा. ये वो दौर था जब नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण के लिए कोई बड़ा ठेकेदार तैयार नहीं होता था. ऐसे में सडकों के निर्माण के लिए पीस ऑर्डर के तहत जिला निर्माण समितियां बनीं. तब स्थानीय छोटे ठेकेदारों ने मिलकर सड़कें बनाना शुरू किया. सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में सल्वा जुडूम संगठन को अवैध बताते हुए भंग कर दिया. इससे सुरेश चंद्राकर पैदल हो गया. सुरेश ने फिर छोटे ठेकेदार के तौर पर निर्माण से जुड़े छोटे मोटे काम हाथ में लेना शुरू कर दिया.

सुरेश चंद्राकर की किस्मत ने 2015 में अचानक पलटा खाया. तब गंगालुर से नेलसनार तक बनने वाली सड़क के निर्माण के लिए नक्सलियों के डर से कोई ए क्लास कॉन्ट्रेक्टर तैयार नहीं हो रहा था. इस सड़क की लागत तब 54 करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया था. तब तक सुरेश बी क्लास कॉन्ट्रेक्टर था यानि 10 करोड़ से ज़्यादा का प्रोजेक्ट हाथ में नहीं ले सकता था. ऐसे में सुरेश ने चार और ठेकेदारों के साथ मिलकर ये प्रोजेक्ट हाथ में ले लिया.

2019 में छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की अगुआई में कांग्रेस की सरकार बनी. पैसे के साथ पॉलिटिकल पॉवर बढ़ाने के लिए भी सुरेश लगातार हाथ पैर मारता रहा. सुरेश ने बस्तर से ही ताल्लुक रखने वाले छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से भी नज़दीकी बढ़ाई. अक्टूबर 2023 में सुरेश को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ का सचिव नियुक्त किया गया. महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा चुनाव में नवापुर सीट के लिए सुरेश चंद्राकर को पर्यवेक्षक बना कर भी भेजा गया. हालांकि कांग्रेस का अब दावा है कि सुरेश चंद्राकर पार्टी का कार्यकर्ता था और दिसंबर 2024 में वो बीजेपी में शामिल हो गया.

सुरेश चंद्राकर ने ठेकेदार के तौर पर पिछले चंद साल में इतना रसूख बढ़ा लिया कि कई बड़ी सड़कों के निर्माण के ठेके उसके हाथ में आ गए. सुरेश प्रभाकर की हैसियत 1000 करोड़ रुपए से ज़्यादा आंकी गई है. सुरेश ने सड़क निर्माण के मकसद से बीजापुर के चट्टानपारा इलाके में आधी एकड़ ज़मीन पर अवैध तरीके से हेडक्वार्टर बना रखा था. इस प्रॉपर्टी में 17 कमरों के साथ बैडमिंटन कोर्ट भी बनवाया गया. इस जगह को सुरेश के कर्मचारी इस्तेमाल करते थे. इसी जगह पर एक सैप्टिक टैंक से पुलिस को मुकेश का क्षत विक्षत शव मिला.

मुकेश चंद्राकर मर्डर के तीन आरोपियों रितेश, दिनेश और महेंद्र रामटेके को छत्तीसगढ़ पुलिस ने 3 जनवरी को गिरफ्तार किया. सुरेश चंद्राकर 6 जनवरी को तेलंगाना के हैदराबाद में छत्तीसगढ़ पुलिस के हत्थे चढ़ा. 8 जनवरी को चारों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. सुरेश चंद्राकर के बैंक खाते सीज करने के साथ चट्टानपारा में उसकी अवैध प्रॉपर्टी पर भी बुलडोज़र चला दिया गया.

मुकेश चंद्राकर के भाई युकेश ने मुकेश की गुमशुदगी की रिपोर्ट 1 जनवरी को दर्ज कराई थी. दरअसल बस्तर जंक्शन नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले मुकेश ने गंगालुर-नेलसनार सड़क निर्माण की खराब क्वालिटी और इसमें हो रही देरी पर रिपोर्ट तैयार की थी. मुकेश ने इसमें भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए बताया था कि निर्माण की लागत 54 करोड़ से बढ़कर 120 करोड़ रुपए तक जा पहुंची. सुरेश प्रभाकर के पास ही दो और सड़कों के निर्माण के भी ठेके थे. 25 दिसंबर को मुकेश चंद्राकर की रिपोर्ट एनडीटीवी पर भी दिखाई गई. इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश जारी किए. इसी बात को लेकर मुकेश से सुरेश चंद्राकर, उसके भाई रितेश और दिनेश बहुत नाराज़ थे.

रितेश की मुकेश से तीखी तकरार भी हुई थी कि रिश्तेदार होकर उसने ऐसी रिपोर्ट बनाई. आखिर 1 जनवरी को मुकेश को अगवा कर लिया गया और चंदनपाड़ा में सुरेश के हेडक्वार्टर में ले जाया गया. वहीं रॉड से पीट पीट कर मुकेश की हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक मुकेश की हत्या रितेश और महेंद्र रामटेके ने मिलकर की. महेंद्र सुरेश का सुपरवाइजर था. लाश को फिर सुरेश, रितेश, दिनेश और महेंद्र ने मिलकर सेप्टिक टेंक में फेंक दिया. 3 जनवरी को दिनेश बीमारी का बहाना कर अस्पताल में भर्ती हुआ. पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने मर्डर का सारा सच उगल दिया.

बहरहाल सुरेश चंद्राकर की ये कहानी अपने आप में पॉलिटिकल कनेक्शन और करप्शन के कॉकटेल की ज़िंदा मिसाल है. साथ ही ये भी दिखाती है कि कोई मुकेश चंद्राकर जैसा दिलेर पत्रकार अपने दम पर भ्रष्टाचार के नेक्सस को दुनिया के सामने लाता है तो उसका क्या हश्र किया जाता है.

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