छत्तीसगढ़ की विष्णु देव सरकार के मंत्रालय के अधिकारियों ने एक हैरान करने वाला आदेश निकाला है. इस आदेश में जमीन अधिग्रहण के मुआवजे में 500 करोड़ की हेरफेर के आरोपी अफसर को राहत दे दी है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस आदेश में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि आरोपी अफसर को बरी किया है या दोषी ठहराया है? आदेश इसलिए भी हैरान करता है क्योंकि उक्त अफसर तीर्थराज अग्रवाल के खिलाफ आरोप क्या थे? इसका भी जिक्र नहीं है. यह भी जिक्र नहीं है कि 500 करोड़ रुपयों का क्या होगा या माफ कर दिए गए? सिवाय इसके की केस समाप्त किया जाता है.
पूरा मामला क्या है?
साल 2014 में राज्य प्रशासनिक सेवा के 2008 बैच के अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल रायगढ़ में एसडीएम थे, उस समय एनटीपीसी के लारा प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण चल रहा था. आरोप है कि एसडीएम ने कुछ जमीन अधिग्रहित कर एनटीपीसी को टिका दी और बदले में मुआवजे के नाम पर 500 करोड़ रुपये का खेल कर दिया था. यह खेल इतना बड़ा था कि एनटीपीसी समेत तत्कालीन कलेक्टर मुकेश बंसल भी हिल गए थे. उन्होंने नाराज होकर इसकी जांच कराई और 1300 पेज की जांच रिपोर्ट सरकार को भेजी. कलेक्टर ने एसपी राहुल भगत से बात कर पुलिस में मुकदमा भी दर्ज कराया था. कलेक्टर की रिपोर्ट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने एसडीएम को सस्पेंड कर दिया था. करीब पौने दो साल तक सस्पेंड रहने के बाद 2016 में बहाल कर दिया गया था.
कुणाल शुक्ला-
तीर्थराज अग्रवाल 20 महीने सस्पेंड रहा, उसका भी इसे पूरा वेतन मिलेगा, 4 साल पहले समक्ष में सुनवाई होने के बाद अभी 4 साल बाद बाइज़्ज़त बरी किया गया इतना समय क्यों लगा?
IAS के लिए इसी महीना DPC भी है, तत्कालीन कलेक्टर आज सचिव वित्त है और तत्कालीन SP सेक्रेटरी मुख्यमंत्री है और आरोपी बरी, पिछले महीने इसी आफिसर की बीवी ने एक बैंक आफिसर की बेटी को अपने गाड़ी से कुचल कर हत्या कर दिया और चंद मिनटो मे थाने से जमानत भी मिल गया, मामला गरमाया तो विदेश भाग गयी, पैसे से सब खरीदा जा सकता है बाकि सब कोरा ज्ञान है!




