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आज के अखबार : टीओआई की खबर से जानिये भाजपा की राजनीति, नेताओं का स्तर और राजनीतिक हैसियत

संजय कुमार सिंह

हरियाणा में कल मतदान के बाद आज एक्जिट पोल का दिन है। इसके बारे में कुछ बोलने-बताने की जरूरत नहीं है। लोकसभा चुनाव के बाद इसके जरिये जो सब हुआ और सेबी प्रमुख के लिए सरकार जिस कदर सुरक्षा कवच बनी हुई है, इसपर चर्चा व्यर्थ है। उमर अब्दुल्ला ने ट्वीटर पर लिखा है और आज नवोदय टाइम्स ने पहले पन्ने पर छापा है, …. केवल आठ अक्तूबर के आंकड़े ही मायने रखेंगे। बाकी सब टाइम पास है। इसलिए आज मैं एक्जिट पोल की चर्चा नहीं कर रहा। मेरी इसमें कभी दिलचस्पी भी नहीं रही। आज की दूसरी प्रमुख खबरों में हरियाणा में 61 प्रतिशत मतदान, महाराष्ट्र (चुनाव) के लिए परियोजनाओं की प्रधानमंत्री की घोषणा और कांग्रेस पर निशाना साधना प्रमुख है।

मुझे लगता है कि इन सबसे महत्वपूर्ण केंद्रीय विदेश मंत्री जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा पर उनका बयान है जो आज अलग अखबारों में एक से चार कॉलम में छपा है। इंडियन एक्सप्रेस में यह दो कॉलम में है। अमर उजाला में यह दूसरे पहले पन्ने पर तीन कॉलम में टॉप पर है। टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर यह टॉप बॉक्स की खबर, एससीओ बैठक से पहले पाकिस्तान उबाल पर है शीर्षक से प्रकाशित सूचना और फोटो के साथ सिंगल कॉलम की खबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है लेकिन दि एशियन एज में तीन कॉलम और द हिन्दू में चार कॉलम में है। नवोदय टाइम्स में यह सिंगल कॉलम की खबर है और अमूमन सभी अखबारों में शीर्षक एक ही है, बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिये जा रहा हूं, भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने नहीं

खबर के अनुसार, आज जो खबर है वह आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस द्वारा आयोजित, शासन पर सरदार पटेल व्याख्यान देने के बाद उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा हुआ है। इससे पहले, विदेश मंत्री के इस्लामाबाद जाने की खबर ऐसे पेश की गई है जैसे कोई बड़ी रणनीति, योजना या उपलब्धि हो। इसपर मैंने कल यह भी कहा था कि अगर ऐसा कुछ है भी तो नरेन्द्र मोदी की योजना का हिस्सा है और इसका सिर-पैर समझना मुश्किल है। बताया तो नहीं ही गया है। आप जानते हैं कि कल हरियाणा में मतदान था। नरेन्द्र मोदी की सरकार के लिए आतंकवाद और पाकिस्तान एक मुद्दा रहा है। ऐसे में कल की खबर अगर पांच कॉलम में छापने लायक थी तो आज चार कॉलम से ज्यादा नहीं हो पाई है।

मैं इसी को हेडलाइन मैनेजमेंट कहता हूं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने इस संबंध में ट्वीटर पर लिखा है, हमारी क्रिकेट टीम को भी पाकिस्तान नहीं जाने देने के बाद विदेश मंत्री खुद पाकिस्तान जा रहे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के, भारत से वार्ता के लिए पाकिस्तान को आतंकवाद से दूर होना होगा के बाद हो रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का मुद्दा भी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक रैली में कहा है कि पीओके के निवासियों को भारत का हिस्सा बनना चाहिए, हम उन्हें अपना मानते हैं। राजनाथ सिंह ने पीओके के लोगों से कहा है कि पाकिस्तान आपको विदेशी मानता है। गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर हमारा है और हम इसे लेकर रहेंगे।

ऐसे में विदेश मंत्री की पाकिस्तान यात्रा (और उसके प्रचार) पर साकेत गोखले ने पूछा है, 1. मोदी और जयशंकर “बड़े भाई” रूस और चीन की निगरानी में पाकिस्तान से बात क्यों कर रहे हैं? 2. विदेश मंत्री खुद क्यों जा रहे हैं, जबकि वे वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए शामिल हो सकते थे? क्या यह मोदी पर पुतिन के दबाव के कारण है? 3. द्विपक्षीय यात्राओं का बहिष्कार करने के बाद, जयशंकर सिर्फ़ रूस और चीन द्वारा संचालित शिखर सम्मेलन के लिए पाकिस्तान क्यों जा रहे हैं? अगर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए बातचीत शुरू होती है तो यह अच्छी बात है। लेकिन अगर द्विपक्षीय वार्ता रूस और चीन की “निगरानी” में हो तो यह अस्वीकार्य है। आख़िर ऐसा क्या है जो मोदी को इतना डराता है और वे हमेशा चीन और रूस के सामने झुकने को तैयार रहते हैं? यह किस तरह का डर है?

आज छपी खबर से साफ है कि जयशंकर द्विपक्षीय रिश्तों पर चर्चा करने नहीं जा रहे हैं। यह भाजपा सरकार की हालत है या भारत से जुड़ी प्रमुख समस्याओं में ले एक पर दस साल के शासन के बाद की स्थिति। मीडिया में मतदान से पहले की प्रस्तुति निश्चित रूप से लोगों को भ्रमित करने वाली थी और यह चाल अब लोगों को समझ आने लगी है। अगर नहीं तो बताये जाने की जरूरत है। आज की दूसरी महत्वपूर्ण खबर हरियाणा में मतदान की है। नवोदय टाइम्स ने लिखा है, हरियाणा में 61 फीसद वोट पड़े। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह 60% से ज्यादा है। द टेलीग्राफ ने लिखा है कि शाम 7 बजे तक 61.19 प्रतिशत मतदाता वोट देने आये थे। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे चार कॉलम में छापा है। हरियाणा में मतदान 67%, संपन्न गुड़गांव में सिर्फ 54%। खबर के अनुसार 67% का आंकड़ा रात 12 बजे तक का है और यह 2014 के 76% तथा 2019 के 69% से कम है। यहां यह दिलचस्प है कि अखबार ने रात 12 बजे तक का आंकड़ा छापा है।

द हिन्दू में आज यह खबर लीड है। मुख्य शीर्षक है, हरियाणा विधानसभा चुनाव में 65% मतदान दर्ज किया गया। उपशीर्षक के अनुसार मतदान का प्रतिशत 2019 के 68% से कम है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने जीत और राज्य में अच्छे जनादेश का दावा किया है। आमतौर पर शांत मतदान में छिटपुट झड़पों की खबर है और इसमें कई लोग जख्मी हुए हैं। द हिन्दू की सेकेंड लीड के अनुसार छत्तीसगढ़ की मुठभेड़ में मरने वाले माओवादियों की संख्या अब 31 हो गई है। यह अभी तक की सबसे बड़ी मुठभेड़ है। इसके बावजूद, अखबारों में सिर्फ दो राज्यों के एक्जिट पोल का ‘टाइमपास’ सबसे बड़ी खबर है। 

अब एक खबर दि एशियन एज की। यह यहां सेकेंड लीड है और लीड के बराबर में तीन कॉलम में छपी है। वैसे तो यह महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री के चुनाव प्रचार की खबर है और हिन्दुस्तान टाइम्स में सेकेंड लीड है। पर शीर्षक में वह बात नहीं है जो दि एशियन एज में है। शीर्षक के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा है, कांग्रेस को अर्बन नक्सल चलाते हैं; यह गरीबों को बांटती और लूटती है। कहने की जरूरत नहीं है कि देश को हिन्दू मुसलमान में बांटने का काम भाजपा ने किया है और उसकी नीतियों से देश की आर्थिक हालत ऐसी हो गई है कि अमीर और अमीर होता गया है जबकि गरीब और गरीब हुआ है। इसी कारण सरकार खुद करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन बांट रही है और 2024 के चुनाव से पहले, नवंबर 23 में इसे पांच साल के लिए बढ़ाया गया था तभी यह आलोचना हुई थी कि सरकार को पांच साल में भी कुछ कर पाने की उम्मीद नहीं है इसीलिए मुफ्त राशन की योजना को पांच साल के लिए बढ़ाया गया है।

आप जानते हैं कि देश में अर्बन नक्सल कौन हैं इस बारे में गृहमंत्रालय की जानकारी शून्य है। आजतक डॉट इन की एक खबर के अनुसार, ‘अर्बन नक्सल’ को बेहतर ढंग से समझने के लिए इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत गृह मंत्रालय से जानना चाहा था कि 1. अर्बन नक्सल कौन हैं? 2. कौन से क्षेत्र में वो सक्रिय हैं? 3. अभी तक कितने अर्बन नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और उनमें से कितने दोषी साबित हुए हैं? 4. क्या कभी सरकार ने अर्बन नक्सलियों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की? अगर हां तो कब? गृह मंत्रालय के लेफ्ट विंग उग्रवाद डिविजन ने इन सवालों का ये जवाब दिया- ‘अभी तक जहां तक अधोहस्ताक्षरी सीबीआईओ का संबंध है तो सूचना को शून्य माना जाए।’ गृह मंत्रालय के डिविजन ने आगे कहा, यद्यपि आपकी अर्जी आरटीआई एक्ट, 2005 के सेक्शन 6(3) के तहत अन्य सीपीआईओ को ट्रांसफर कर दी गई है जिससे कि उपर्युक्त जवाब, अगर कोई है, तो सीधे आपको दिया जा सके। इस मामले में जानकारी मिलने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।

यह 31 जनवरी 2020 के पत्र के आधार पर है। सरकार ने उसके बाद अर्बन नक्सल के बारे में कुछ बताया है कि नहीं, मुझे ठीक से पता नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री अभी भी अर्बन नक्सल का उल्लेख कर रहे हैं। यह नया नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 दिसंबर 2019 को झारखंड में एक रैली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के ख़िलाफ हो रहे प्रदर्शनों के लिए कांग्रेस और ‘अर्बन नक्सलियों’ को जिम्मेदार ठहराया। इससे एक महीना पहले 16 नवंबर 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों और ‘अर्बन नक्सलियों’ के खिलाफ ‘प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई’ का आह्वान किया। भाजपा के आरोपों की बात चली है तो जूएनयू कैम्पस में लगे तथाकथित देश विरोधी नारों, उससे संबंधित आरोप और प्रचार को याद करना चाहिये। उसके लिए तबके छात्र नेता और अब कांग्रेस के नेता कन्हैया को अदालत में, पुलिस हिरासत में पेशी के दौरान  पीटा गया था पर मामला कन्हैया के बार-बार चुनौती देने पर भी अदालत में नहीं चला। यह है भाजपा के आरोपों की गंभीरता और सत्यता।

जो भी हो, रोजगार देने का वादा प्रधानमंत्री पूरा नहीं कर पाये हैं, उनके काम, तपस्या या सेवा से बेरोजगारी बढ़ी है, लोगों की नौकरियां गई हैं। इसीलिए वे अपना काम नहीं बता कर कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं। इसीलिए कि 10 साल सत्ता में रहकर स्थिति सुधारना तो दूर, खराब ही किया है और आरोप उसपर लगा रहे हैं जो सत्ता में नहीं है और जिसपर आरोप लगाकर सत्ता पाई थी। ऐसी खबर आज सिर्फ एशियन एज में इतनी प्रमुखता से है। इन और ऐसी खबरों से अलग, आज टाइम्स ऑफ इंडिया में दिल्ली की राजनीति से जुड़ी एक खबर है। शीर्षक है, नाटकीय वार्ता के बाद मुख्यमंत्री और भाजपा विधायकों ने बस मार्शल के मुद्दे पर एलजी से मुलाकात की।

आप जानते हैं कि दिल्ली की डीटीसी बसों में मार्शल के तौर पर काम करने वाले 10 हजार से ज्यादा लोगों को अचानक ही बेरोजगार कर दिया गया था। तब से अब तक हजारों बस मार्शल दिल्ली सरकार से नौकरी की गुहार लगा रहे हैं। सड़कों पर भी उतरे। इस दौरान दर्जन भर से ज्यादा साथी नौकरी की मांग करते हुए दुनिया से चले गए। लेकिन उनकी इस गंभीर समस्या पर दिल्ली के किसी भी मंत्री, विधायक या फिर सांसद ने ध्यान नहीं दिया। इंटरनेट पर उपलब्ध कल की खबरों के अनुसार दिल्ली सचिवालय में बैठक के दौरान मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि मार्शल्स चाहते हैं कि सभी लोग एलजी के पास एक साथ चलें। लेकिन बीजेपी विधायकों ने ऐसा करने से मना कर दिया। भाजपा विधायक बैठक छोड़कर जाने लगे। मार्शल्स ने उन्हें रोका। एक बस मार्शल ने भाजपा विधायक के पैर छूकर निवेदन किया तो विधायक ने बस मार्शल को धक्का दिया और मीटिंग छोड़कर चले गए।  

इस विवाद के बीच, मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा, अभी कैबिनेट नोट लाएंगे। यहीं पर पूरी कैबिनेट है, यहीं पर साइन होगा और एलजी के पास चलेंगे। इससे पहले, दिल्ली विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा था। भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया था। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्शल्स चाहते हैं कि अभी सब एलजी के पास चलें। इसपर मुख्यमंत्री ने उपरोक्त प्रस्ताव रखा पर विधायक तैयार नहीं हुए। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा है, बसों में मार्शल होने से महिलायें सुरक्षित महसूस करती थीं। उन्हें लगता था कि अगर उनके साथ कोई ग़लत व्यवहार करेगा, तो बचाने के लिए बस मार्शल मौजूद है। पर भाजपा वालों ने गंदी राजनीति करी और 10,000 बस मार्शलों को उनकी नौकरी से हटा दिया। आज महिलायें असुरक्षित हैं और 10,000 बस मार्शल सड़क पर हैं। आज दिल्ली सरकार के कैबिनेट ने बस मार्शलों की बहाली का फ़ैसला लिया। अब भाजपा वालों से उम्मीद करते हैं कि वे इस फ़ैसले को पास करवा दें ताकि दिल्ली की महिलाएँ बसों में सुरक्षित रहें।

यही नहीं, मार्शल की नौकरी के मुद्दे पर एलजी से आदेश दिलाने के लिए वे कैबिनेट के नोट व भाजपा विधायकों के साथ उनके पास जाने के लिए तैयार थीं और अपनी गाड़ी छोड़कर भाजपा नेता की गाड़ी में जा बैठीं। आम आदमी पार्टी का कहना है कि भाजपा विधायक एलजी के पास जाने को तैयार नहीं थे। उन्हें मनाने के लिए मंत्री सौरभ भारद्वाज ने विधायक और विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता के पैर पकड़े। भाजपा नेता की गाड़ी से ही मुख्यमंत्री एलजी हाउस पहुंची। सीएम ने कहा, बीजेपी विधायक आखिरकार एलजी ऑफिस तो आए, मगर कुछ बोलने को तैयार नहीं थे। यह बस मार्शलों के साथ दगाबाजी है। अब हम बीजेपी से उम्मीद करते हैं कि वे इस फैसले को एलजी से पास करवा दें। 10,000 मार्शल्स की नौकरी के मामले में यह दिल्ली के भाजपा विधायकों और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि एलजी की कथनी और करनी है। एलजी ने आदेश जारी नहीं किया है यह सब कल ही हुआ जब प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाये।

यह खबर आज सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया में इतनी प्रमुखता से है। इसमें भाजपा का पक्ष यह है कि मार्शल को केजरीवाल के आदेश (या इच्छा) से निकाला गया था। खबरों से लगता है कि वे इसे प्रचारित करना चाहते हैं। नौकरी दिलाने या फिर से बहाल करने में उनकी दिलचस्पी नहीं है और संभव है, चाहते हों कि फिर से बहाली हो तो श्रेय उन्हें मिले जिसे मुख्यमंत्री आतिशी ने चौपट कर दिया। जागरण डॉट कॉम ने लिखा है, आतिशी की गुगली में फंसी भाजपा। इससे आप भाजपा की राजनीति का स्तर और उसके पुराने व अनुभवी नेताओं की योग्यता का भी अनुमान लगा सकते हैं। इससे मेरी इस मान्यता की पुष्टि होती है कि मीडिया के प्रचारक बन जाने से ही भाजपा का सत्ता में बने रहना संभव हो रहा है।

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