चंद्र भूषण-
ऊंची नौकरियों में बड़ी बर्खास्तगी का कारण…. सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की इतनी बड़ी (वर्तमान और संभावित) छंटनी की जो वजह मैं समझ पा रहा हूं-
- ज्यादातर सॉफ्टवेयर कंपनियां या तो अमेरिकी हैं, या अमेरिका और यूरोप के माहौल पर बहुत ज्यादा निर्भर करती हैं। इस माहौल का कुछ बंटाधार लड़ाइयों से हो रखा है लेकिन ज्यादा असर एक अलग बीमारी का है, जिसपर हम यहां बात करने वाले हैं। चीन ने पिछले दस वर्षों से इन प्रभावों के प्रति फायरवॉलिंग कर रखी है, सो वहां से ऐसी खबरें अभी नहीं आ रही हैं। वहां समस्या पश्चिम के व्यापारिक दबावों से आ रही है, जो अलग मसला है।
- एआई अभी काम और कौशल के स्तर पर लोगों को कम, पूंजी के स्तर पर ज्यादा बाहर कर रही है। इसके डेटा सेंटर बहुत महंगे और अपार बिजली खाने वाले संसाधन हैं और दस के लगभग विराट अमेरिकी कंपनियों को यह इंफ्रास्ट्रक्चर अपने निजी खाते में चाहिए।
- सन 2030 तक 3 लाख करोड़ डॉलर इस काम में इन्वेस्ट होने जरूरी हैं लेकिन इसका आधा ही इंतजाम कंपनियां अपनी जमा पूंजी से कर पा रही हैं। बाकी डेढ़ ट्रिलियन डॉलर उन्हें बैंकों से कर्जा उठाना है, जो उनकी बहुत चुस्त बैलेंस शीट देखने के बाद ही देने को राजी होंगे। ओरेकल की 20 परसेंट छंटनी इसी का नतीजा है। बाकी जगहों से भी शुभ समाचार आ चुके हैं या आने वाले हैं।
- निकाले गए कर्मचारियों को दो साल बाद वापस बुला लेने का झांसा भी उनके लिए टर्मिनेशन जितना ही बुरा है। उन्हें इस हकीकत से नजर नहीं हटानी चाहिए कि उनकी बर्खास्तगी के जरिए जिस संसाधन के लिए पूंजी जुटाई जा रही है, उसका पहला उद्देश्य कम से कम लोगों से ज्यादा से ज्यादा काम करा लेने का ही है।
- अस्सी-नब्बे के दशक से तुलना करें तो माइक्रोसॉफ्ट और ऐपल अपने ऑपरेटिंग सिस्टम एक समस्या का एक समाधान प्रस्तुत करने के लिए बना रहे थे, जिससे उनका सुपर मुनाफा गारंटीड था। बाद में गूगल ने यही काम सर्च और ईमेल में किया। अभी का हाल यह है कि किसी फिल्म का एक सेट तैयार करने के लिए आप पांच या सात एआई की मदद ले सकते हैं।
- सभी एक ही तरीके से ढेरों बिजली खाते हुए अपने अपने-अपने डेटा सेंटर्स में डुबकी मारेंगी और सेट बनाने में आपकी लगभग एक-सी ही मदद कर पाएंगी। निष्कर्ष यह कि प्रोडक्टिविटी में ग्रोथ तो होगी लेकिन इसके लिए बहुत ज्यादा संसाधनों का अपव्यय होगा। पूंजी अतीत में इसका समाधान प्रतिद्वंद्वियों के खात्मे के जरिए करती आई है, जो अभी की स्थिति देखते हुए लंबा खिंच सकता है।
- ज्यादा बेहतर तरीका सरकार की ओर से डेटा सेंटर्स का एक ही सेट बनाने का और उसको सभी एआई कंपनियों को किराए पर देने का होता, जैसा कीन्सियन नजरिए के तहत 30 के दशक में अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में किया गया था। अभी चीनियों ने यही तरीका अपना रखा है, हालांकि इसकी भी कमजोरियां और जटिलताएं बाद में सामने आएंगी।
- कुल मिलाकर अभी की रणनीति दुविधाग्रस्त भविष्य के लिए वर्तमान को दांव पर लगाने की है। इस क्रम में सबसे अच्छे मिडल क्लास रोजगार जा रहे हैं, और टॉप क्लास मार्केट संकुचित हो रहा है, जिसका असर बहुत सारे उद्योग-धंधों पर साल के अंत तक दिखने लगेगा।



