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आज के अखबार : ‘ट्रेन पलटाने की साजिश’ को आतंकवादी हरकत नहीं कहा जा रहा, रुक भी नहीं रही!

डबल इंजन वाले राज्यों में रेलवे से “शरारत की कोशिश” और अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार के 97 प्रतिशत मामले 13 राज्यों से सामने आए हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में ऐसे सबसे अधिक अपराध दर्ज किए गए। इन सबके बावजूद कश्मीर में भाजपा के दावे और राजनीति समझिये। देखिये, चुनाव के समय इन सबकी रिपोर्टिंग का खेल, खबरेंऔर उनका सत्य।

संजय कुमार सिंह

वैसे तो आज सभी अखबारों की लीड प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा और उनका प्रचार है पर अमर उजाला के दूसरे पहले पन्ने की लीड का शीर्षक है, सेना के जवानों को ले जा रही ट्रेन को उड़ाने के लिए रखे डेटोनेटर। इसके साथ दो खबरें हैं 1) बुरहानपुर : ट्रैक पर बिछाए थे 10 डेटोनेटर, ट्रेन गुजरने से पहले फटे 2) कानपुर : ट्रैक पर फिर मिला गैस सिलेंडर। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में ट्रेनों को पलटाने की बड़ी साजिश नाकाम। अभी तक तो मैं ऐसी खबरों को रेल दुर्घटनाओं से सरकारी बचाव मानता था। मेरा मानना है कि सरकार दुर्घटनाओं को साजिश का रूप देकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है। इसके समर्थन में एक तर्क यह भी है कि दुर्घटना की जांच रेल सुरक्षा आयुक्त करते रहे हैं पर भाजपा ने सीबीआई से करवाई है। अब खबर है कि एनआईए ने जांच शुरू की। जाहिर है, रेल सुरक्षा आयुक्त तो दुर्घटना के कारणों का पता लगाने की जांच करते हैं। एनआईए दुर्घटना कराने या ट्रेन पलटाने की साजिशों  की जांच सभी एंगल से करेगी। 

जब जांच हो रही है तो अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन ऐसे मामले आमतौर पर आतंकवादी हरकत की श्रेणी में आते हैं। पर इसे रहस्य के रूप में पेश किया जा रहा है। आतंकवाद से संबंध अभी जोड़ा भी नहीं गया है। आज यह खबर नवोदय टाइम्स में भी पहले पन्ने पर है । दो कॉलम के इस खबर का शीर्षक है, कानपुर में रेल पटरी पर मिला सिलेंडर, टला बड़ा हादसा। उपशीर्षक है, चालक ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर रोकी मालगाड़ी। मुझे नहीं लगता है कि रेल पटरी पर सिलेंडर रख देना आतंकवादी हरकत होगी या इससे ट्रेन पलट ही जायेगी। इस मामले में तो निशाने पर अगर होगी तो मालगाड़ी, ट्रेन भी नहीं थी। फिर भी यह खबर पहले पन्ने पर है तो शायद इसलिए कि हाल में ऐसा हो चुका है। पुलिस, प्रशासन, सरकार और रेलवे के लिए यह बड़ी चुनौती है। हादसा तो हो ही सकता है। सरकार की जिम्मेदारी है कि उसे रोके और उससे बचा जाये। क्या आपने सरकार या रेलवे की ऐसी किसी योजना के बारे में सुना या रेलवे ने ऐसी कोई घोषणा की?

मेरे ख्याल से खबर यह भी है कि इतने मामलों के बावजूद अभी तक जांच या बचाव के लिए कोई कार्रवाई हुई है या नहीं। इसके बिना ट्रेन पलटाने की साजिश शीर्षक वाली खबरें मुझे सरकार का बचाव लगती हैं। दिलचस्प यह है कि नवोदय टाइम्स की खबर में मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में 10 डेटोनेटर बिछाये गये थे – खबर नहीं है। संभव है, इसका कारण यह रहा हो कि, गनीमत रही कि ट्रेन गुजरने से पहले कुछ डेटोनेटर फट गये। इससे यह मामला नवसिखुओं का लगता है और जाहिर है मकसद खबर छपवाना भी हो सकता है। अमर उजाला ने लिखा है, मध्य प्रदेश की घटना (डेटोनेटर वाली) 18 सितंबर की है। चार दिन बाद छप रही है या छपवाई जा रही है। अमर उजाला की खबर के फ्लैग शीर्षक में जो राज्य हैं वो सब डबल इंजन वाले या भाजपा शासित हैं। पंजाब अपवाद है। ऐसा ही डेटलाइन कानपुर / बुरहानपुर /बठिंडा डेटलाइन के साथ है। बठिंडा पंजाब में है और अमर उजाला ब्यूरो की यह खबर बताती है, कानपुर में ट्रैक पर गैस सिलेंडर रखकर और पंजाब के बठिंडा में रेल लाइन पर मोटा सरिया रखकर ट्रेन को पलटाने की कोशिश की गई। एक अन्य खबर में बताया गया है कि यह रविवार सुबह तीन बजे की खबर है। मुझे आज सोमवार के अखबार में यह खबर पढ़ते हुए लग रहा है कि मामला पिछले रविवार का होगा। यह इसलिए भी कि मैंने अमर उजाला में ही पटरी पर सरिया रखे होने की खबर पहले भी पढ़ी है।

इसकी जांच छोड़कर टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की खबर देखता हूं। यहां शीर्षक है, सेना के जवानों को ले जा रही ट्रेन की पटरी पर रखे ‘डेटोनेटर’ से खतरे की घंटी बजी। यहां ‘डेटोनेटर’ को सिंगल कोट में लिखने का मतलब है। अखबार ने इसे रेलवे ‘डेटोनेटर’ लिखा है और यह भी कि यह खुलासा उस दिन हुआ जब रेल पटरी पर खाली सिलेंडर मिला। टाइम्स न्यूज नेटवर्क की यह खबर इंदौर / कानपुर डेटलाइन से है। खबर में लिखा है कि इस साल अगस्त से अभी तक उत्तर प्रदेश में रेल परिचालनों में तोड़फोड़ करने की छह कथित कोशिशें हो चुकी हैं। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर मामले में पटरी पर एक मीटर की दूरी पर 10 रेलवे ‘डेटोनेटर’ रखने होने को रेलवे ने “शरारत की कोशिश” कहा है। सेना ने रेलवे को प्रमुख कर्मचारियों को हिरासत में लेने की मांग की है। इनमें सिगनलमेन और ट्रैकमेन शामिल हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर के साथ जो मुद्दे हाईलाइट किये हैं उनका शीर्षक है,पांच हफ्ते में सात घटनाएं। इनमें कहा गया है कि संदिग्ध तोड़फड़ की सात घटनाओं में से छह उत्तर प्रदेश की हैं। एक मध्य प्रदेश का हुआ तो अमर उजाला का पंजाब वाला मामला अलग है।

उत्तर प्रदेश की छह घटनाओं में से कम से कम एक में 17 अगस्त को साबरमती एक्सप्रेस एक मीटर लंबी रेल की पटरी से टकराकर पटरी से उतर गई थी। उत्तरप्रदेश के रामपुर में बुधवार को चोरी के दूरसंचार खंभे को पटरी के पास रखने के लिए दो नशेड़ियों को रविवार को गिरफ्तार किया गया है। अमर उजाला की खबरों के अनुसार टाइम्स ऑफ इंडिया के विवरण में सबी खबरें हीं हैं और पंजाब के बठिंडा का मामला इतवार का ही है। यह बठिंडा-दिल्ली के बीच का मामला है और खबर के अनुसार मालगाडी की गति धीमी होने के कारण लोको पायलट ने सरिया देख लिया और ट्रेन को तुरंत रोक दिया। आरपीएफ और जिला पुलिस मामले की जांच कर रही हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि इन विवरणों से मामला आतंकवाद का नहीं लगता है लेकिन आतंकवाद नहीं है तो अपराधियों का पकड़ा जाना और मामले की पोल खुलना आसान होना चाहिये और अगर मैं अखबारों की खबरों से इतना अंदाज लगा सकता हूं तो जांच के जिम्मेदार लोग सत्य का पता क्यों नहीं लगा पा रहे हैं।

इसका एक कारण आतंकवाद पर सरकार के हाल के बयान भी हो सकते हैं।

1. भाजपा, आतंकवाद पर वाइट पेपर लाएगी और घाटी में कौन आतंकवाद लेकर आया, किस-किस ने आतंकवादियों के साथ बिरयानी खाई है, ये सब जनता के सामने रखेगी – अमित शाह। 

2. भाजपा ये भ्रम पैदा करना चाहती है कि उनके समय में आतंकवाद कम हुआ है। जबकि सच ये है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में तेजी तब आई, जब केंद्र में भाजपा रही। कांग्रेस प्रवक्ता गुरदीप सिंह सप्पल (17 सितंबर 2024)

3. तीन परिवारों के राज में जम्मू-कश्मीर 35 साल तक आतंक की आग में जलता रहा … लेकिन मोदी जी आये और उन्होंने आतंकवाद को जमीन के अंदर दफनाने का काम किया – अमित शाह।

कश्मीर में आतंकवाद पर भाजपा का रुख आप देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने 15 सितंबर को कहा था, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद अंतिम सांस ले रहा है। डबल इंजन वाले राज्य में नवसिखुआ आतंकवाद पर नियंत्रण और मीडिया में शोर आप देख रहे हैं। तथ्य यह है कि नौ जून को केंद्र में नई सरकार के शपथग्रहण के बाद से जम्मू-कश्मीर में चार आतंकी हमले हुए हैं। 17 जुलाई की न्यूज 18 की खबर के अनुसार, जम्मू में अचानक बढ़ गया आतंकवाद? क्या है आतंकी समूहों की रणनीति में बदलाव की वजह? इसमें कहा गया है, मरने वालों की संख्या बढ़ी है। दो दिन पहले यानी 15 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में सेना के एक अधिकारी और  तीन जवान शहीद हो गए थे। दैनिक भास्कर की दो महीने पुरानी खबर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में तीन जगह एनकाउंटर, कुपवाड़ा में दो आतंकी ढेर : डोडा में आतंकियों ने अस्थायी कैंप पर हमला, दो जवान घायल। इसके बावजूद सरकार का दावा है और चुनाव से पहले अखबारों में छप चुका है।

इसके बावजूद 20 सितंबर को नवोदय टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार एफएटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, भारत को आईएसआईएस या अलकायदा से बड़ा खतरा है। रिपोर्ट में मणिपुर की हालिया स्थिति का भी  उल्लेख किया गया है। आज द हिन्दू में खबर है, 900 कुकी आतंकियों के प्रवेश पर अलर्ट को लेकर भ्रम। इस खबर के अनुसार, सेना ने सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट में मणिपुर के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह से आग्रह किया कि आतंकियों के प्रवेश से संबंधित विवरण मुहैया कराये जायें पर बाद में इसने पोस्ट को डिलीट कर दिया। सेना के स्पीयर कॉर्प्स की पोस्ट में लिखा था, इन सूचनाओं के गंभीर सुरक्षा प्रभाव हैं और सुरक्षा सलाहकार के कार्यालय से आग्रह किया गया है कि विवरण साझा करें ताकि उपयुक्त आवश्यक कार्रवाई की जा सके। एक रक्षा सूत्र ने कहा कि विवरण अभी भी सेना से साझा नहीं किये गये हैं। दैनिक भास्कर की दो दिन पुरानी खबर के अनुसार, इंफाल में 20 सितंबर को एक प्रेस कांफ्रेंस में सुरक्षा सलाहकार श्री कुलदीप सिंह ने कहा था,  खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि घुसपैठिये  उग्रवादी ड्रोन बम, प्रोजेक्टाइल, मिसाइल और गोरिल्ला युद्ध में ट्रेंड हैं। ये 30-30 लोगों के ग्रुप में हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में छिपे हुए हैं।

ये उग्रवादी 28 सितंबर के आसपास मैतेई गांवों पर हमले कर सकते हैं। हमले की आशंका के बीच चुराचांदपुर, तेंगनौपाल, उखरुल, कामजोंग और फेरजॉल समेत कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आप जानते हैं कि मणिपुर में तीन मई 2023 से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसा चल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिंसा में अब तक 237 लोगों की मौत हो चुकी है। 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 60 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। इसके बावजूद, हिन्दुस्तान टाइम्स की आज की उल्लेखनीय खबर यही है कि भाजपा नेताओं ने कहा है कि नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस पाकिस्तान के प्रॉक्सी हैं। इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर विज्ञापन न हो तो सरकार से संबंधित खबरें रहती हैं। इनमें सकारात्मक और नकारात्मक दोनों होती हैं। उदाहरण के लिए आज एक खबर बताती है कि ढाका में अनिश्चय को लेकर अदाणी का गोड्डा प्लांट भारतीय पावर ग्रिड से द्रुत लिंक चाहता है। उपशीर्षक है, ट्रांसमिशन अथॉरिटी ने पास के सबस्टेशन के जरिये कनेक्शन की कोशिशों को खारिज कर दिया। लखीसराय के जरिये लिंक को मंजूरी मिली है। इसमें अच्छा-खासा समय लग सकता है। 

इंडियन एक्सप्रेस की दूसरी प्रमुख खबर बंगाल में बाढ़ की है। इसके अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है और डीवीसी यानी दामोदर घाटी निगम से राज्य सरकार के अधिकारियों को वापस बुला लिया है। उनका आरोप है कि डीवीसी ने एकतरफा तौर पर झारखंड के अपने रिजरवायर से पानी छोड़ दिया है जिससे बंगाल में बाढ़ की स्थिति बन गई है। आज गुजरात के दाहोद की एक खबर नवोदय टाइम्स में सिंगल कॉलम में है जो इंडियन एक्सप्रेस में तीन कॉलम में है। खबर के अनुसार, उत्पीड़न का प्रतिरोध किया तो प्राचार्य ने बच्ची को मार डाला। एक्सप्रेस की खबर के अनुसार स्कूली बच्ची के यौन उत्पीड़न के इस मामले में प्रिंसिपल को गिरफ्तार किया गया है। आपको याद होगा, कल मैंने लिखा था – लखनऊ में महिला डॉक्टर की पिटाई, बालों से घसीटने की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। आज मेरे किसी अखबार में इस मामले का फॉलोअप पहले पन्ने पर नहीं है। नया मामला गुजरात का है और मैं चाहता हूं कि इस मौके पर आप याद करें कि गुजरात में एक डॉक्टर के साथ बलात्कार और उसकी हत्या पर भाजपा, सरकार और संघ के ‘इको सिस्टम’ ने क्या हंगामा मचाया था। कल मैंने यह भी लिखा था कि उसका प्रभाव बंगाल में डेढ़ महीने बाद भी है।

घोषित मिलावटी घी से पूजा होती है

तिरुपति के लड्डू विवाद के बारे में आपको पता ही है। इस मामले में आज खबर है (नवोदय टाइम्स) कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। एक जनहित याचिका दायर कर मांग की गई है कि लड्डुओं में (घी में नहीं?) पशुओं की चर्बी के कथित इस्तेमाल की एसआईटी जांच कराई जाये। खबर के अनुसार हिन्दू सेना और किसान सुरजीत सिंह यादव ने यह याचिका दायर की है। यहां उल्लेखनीय है कि दूध का पूरा अर्थशास्त्र बछड़ों और बैल को छोड़कर है। दूध असल में बछड़े का / के लिए होता है। वैसे ही जैसे मां का दूध बच्चे का होता है और मां आमतौर पर सहेली के बच्चों या अपने बच्चों के मित्रों को अपना दूध नहीं पिलाती हैं। शाकाहारियों का एक वर्ग दूध को शाकाहारी नहीं मानता है और इसमें यह कड़वा सच ये है कि घी खुद एनीमल फैट है। दूध प्राप्त करने से जुड़ी हिंसा, प्रताड़ना अलग है। हम स्वार्थ में उसकी बात नहीं करते हैं और हमें यही बताया गया है। दिलचस्प यह है कि सबको पता है कि बाजार में ‘पूजा के लिए’ विशेष घी मिलता है। सस्ता होता है। मैं नहीं जानता वह क्या होता है और सस्ता क्यों होता है। पर सस्ते घी से पूजा ठीक है? पूजा के घी के एक विज्ञापन के अनुसार 169 रुपये में 500 एमएल घी मिल रहा है। मंदिर के लड्डू के लिए यह चार सौ रुपये से कम के भाव खरीदा जा रहा था और गाय के दूध का शुद्ध घी बेचने वाले 1200 रुपये से कम नहीं लेते। ऐसे में मिलावट लड्डू के घी में हो या हवन के घी में क्या अनजाना है। जब पूजा मिलावटी घी से हो सकती है तो लड्डू कैसे अशुद्ध है? पर यह सब मुद्दा नहीं है क्योंकि आस्था के इकोसिस्टम सिर्फ आघात पता है। 

खबरें जो कम दिखीं

आज द टेलीग्राफ की लीड इसी कड़ी में है। वैसे तो यह खबर आम आदमी पार्टी की जनता अदालत की है और इसकी खबर दूसरे अखबारों में है पर मूल या खास बात टेलीग्राफ में है। बाकी अखबारों में क्यों नहीं है, समझना मुश्किल नहीं है। पेश है, आपके लिए यह खबर हिन्दी में। फिरोज एल विंसेंट की इस खबर के अनुसार भाजपा की मातृ संस्था आरएसएस के लिए अरविन्द केजरीवाल ने मुश्किल सवाल उठाये हैं। शीर्षक है, केजरीवाल ने बड़े हो गये बेटे के लिए आरएसएस पर कटाक्ष किया। आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अक्सर एक ऐसे नेता के रूप में देखे जाते हैं जो बहसंख्यकों को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं और ऐसी राजनीतिक लड़ाई के लिए तैयार नहीं लगते हैं। अब वे संघ के बड़े आलोचक के रूप में सामने आये हैं। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद राजधानी में अपनी पहली सार्वजनिक बैठक में केजरीवाल ने भाजपा और उसके वैचारिक स्रोत आरएसएस के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की। यह पहली बार नहीं है और इसे वे दोनों के बीच टकराव के रूप में देखते हैं। रविवार को जंतर मंतर रोड पर जनता की अदालत में केजरीवाल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पांच सवाल पूछे। आपको याद होगा, इस साल मई में अपने एक बयान में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा को अब पार्टी चलाने  के लिये आरएसएस की जरूरत नहीं है। 

इसका जिक्र करते हुए केजरीवाल ने पूछा: “आरएसएस को भाजपा के लिए मातृतुल्य कहा जाता है। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा की मातृ संस्था आरएसएस के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद की जा रही है। क्या बेटा इतना बड़ा हो गया है कि आंखें दिखाना शुरू कर दिया है? जिस बेटे को आपने पाला-पोसा और प्रधानमंत्री बनाया, वही बेटा आज पलटकर मातृ संस्था आरएसएस के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहा है। मैं मोहन भागवत से पूछना चाहता हूँ कि जब जेपी नड्डा ने यह कहा तो आपके दिल में क्या चल रहा था? क्या आपको दुख नहीं होता?” केजरीवाल ने भागवत से अन्य सवाल पूछे: “जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी देश भर में अन्य दलों के नेताओं को लालच देकर, धमकाकर और ईडी और सीबीआई के जरिए डराकर तोड़ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप सरकारें गिर रही हैं – क्या यह देश के लिए सही है?”

यही नहीं, “जिन नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और (गृह मंत्री) अमित शाह ने कुछ दिन पहले तक सबसे भ्रष्ट बताया था, उन्हें कुछ ही दिनों बाद भाजपा में शामिल कर लिया गया। क्या मोहन भागवत इस तरह की राजनीति से सहमत हैं?” और “क्या मोहन भागवत ने कभी प्रधानमंत्री को इन गलत कामों से रोका है?” इस सिलसिले में उन्होंने आगे कहा, “यह आप ही थे जिन्होंने नियम बनाया था कि 75 वर्ष की आयु पार करने वाले किसी भी व्यक्ति को रिटायर होना चाहिए… अब अमित शाह कह रहे हैं कि यह नियम नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं होगा। लेकिन मैं मोहन भागवत से पूछना चाहता हूं कि क्या वह इस बात से सहमत हैं कि जो नियम लाल कृष्ण आडवाणी पर लागू होता है, वह नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं होना चाहिए।” 2019 से केजरीवाल ने खुद को मोदी के एक सौम्य हिंदू प्रतियोगी के रूप में पेश किया है और 2021 में उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार का लक्ष्य “राम राज्य” है। 

अत्याचार के 97% मामले 13 राज्यों में

ऐसी दूसरी खबर, आज नवोदय टाइम्स में है। शीर्षक है, अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार के 97% मामले 13 राज्यों में हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई की हिन्दी सेवा भाषा की यह खबर क्या आपके अखबार में है? द प्रिंट में खबर इस प्रकार है, अनुसूचित जाति के खिलाफ 2022 में अत्याचार के 97 प्रतिशत मामले 13 राज्यों से सामने आए हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में ऐसे सबसे अधिक अपराध दर्ज किए गए। अनुसूचित जाति के खिलाफ 2022 में अत्याचार के सभी मामलों में से लगभग 97.7 प्रतिशत मामले 13 राज्यों में दर्ज किए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में ऐसे सबसे अधिक अपराध दर्ज किए गए। ये भी डबल इंजन वाले राज्य है। अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार के मामलों की ज्यादा संख्या वाले अन्य राज्यों में बिहार, उड़ीशा और महाराष्ट्र थे।

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