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बिक गई देश की दूसरी सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी यूएनआई, NCLT की मंजूरी, कौन है नया खरीदार? जानिए

नई दिल्ली : देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) को आखिरकार नया जीवन मिल गया है। लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही इस एजेंसी के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने द स्टेट्समैन लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है।

यह निर्णय इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत लिया गया, जिससे UNI में भारी निवेश का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि इसमें अभी तमाम पेंच हैं।

UNI को संकट से निकालने में IBC बना वरदान

NCLT द्वारा नियुक्त रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) पूजा बाहरी ने कहा, “आज इतिहास रच दिया गया है। IBC की बदौलत UNI जैसी ऐतिहासिक संस्था के पुनरुद्धार और पुनर्संगठन का आदेश मिला है। यह इस कानून की ताकत को दर्शाता है।”

उन्होंने बताया कि UNI पिछले कई दशकों से आर्थिक संकट से जूझ रही थी, लेकिन IBC के जरिए अब इसका पुनर्जीवन संभव हो सका है। उन्होंने कहा, “IBC का असली उद्देश्य कंपनियों का पुनरुद्धार और संचालन सुनिश्चित करना है और UNI इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गई है।”

64 साल पुरानी समाचार एजेंसी को नया जीवन

यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) की स्थापना 1959 में हुई थी और 1961 में इसने अपना संचालन शुरू किया। यह भारत की प्रमुख समाचार एजेंसियों में से एक है, जो अंग्रेजी, हिंदी (यूनीवार्ता), और उर्दू में सेवाएं प्रदान करती है। हालांकि, पिछले एक दशक से यूएनआई गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही थी, जिसके परिणामस्वरूप इसे दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत समाधान प्रक्रिया में लाया गया।

सबसे खास बात यह है कि UNI एशिया की एकमात्र विश्वसनीय समाचार एजेंसी है, जो उर्दू भाषा में सेवा प्रदान करती है। इस वजह से देशभर में उर्दू समाचार पत्रों और वेबसाइटों की निर्भरता UNI पर बनी हुई थी।

UNI के प्रमुख ग्राहक और भविष्य की उम्मीदें

UNI के ग्राहक सूची में एचटी सिंडिकेशन, हिंदुस्तान (हिंदी दैनिक), दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, पंजाब केसरी, राष्ट्रीय सहारा, सामना, विभिन्न राज्य सरकारें, राजभवन और प्रमुख राजनीतिक दल शामिल हैं।

वर्तमान में UNI में 250 से अधिक कर्मचारी, जिनमें पत्रकार, फोटो पत्रकार और अन्य गैर-पत्रकार शामिल हैं, काम कर रहे हैं। इसके अलावा, देशभर के जिलों तक फैला फ्रीलांसर और स्ट्रिंगर नेटवर्क भी इसकी रीढ़ बना हुआ है।

यूएनआई की प्रेस रिलीज पर आधारित


इससे पहले, फरवरी 2024 में, यूएनआई की नीलामी की खबरें सामने आई थीं, जिसमें अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी के बहनोई राकेश शाह सहित पांच लोगों के बोली लगाने की चर्चा थी। हालांकि, अंततः ‘द स्टेट्समैन लिमिटेड’ का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

यूएनआई के पुनरुद्धार के साथ, यह उम्मीद की जा रही है कि एजेंसी फिर से सफलता के शिखर को छू सकेगी और अपने ग्राहकों को त्वरित और सटीक समाचार प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखेगी।

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1 Comment

1 Comment

  1. विजय कुमार

    February 13, 2025 at 2:38 pm

    कोई खुशी की लहर नहीं है। इस प्लान में कर्मचारियों को सीआईआरपी कास्ट और पीएफ ग्रेच्युटी के अलावा बकाया वेतन का 8 से 9 प्रतिशत ही मिल पाएगा। लोगों को 30 से 35 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। बड़ी संख्या में लोग ब्लैक डे मनाने की तैयारी कर रहे हैं। असली खुशी 72 करोड़ रुपये में 1500 करोड़ की संपत्ति हासिल करने वाले को हो रही है।

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