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दिल्ली

न्यूज एजेंसी “यूएनआई” में चल रही अवैध छंटनी?

नई दिल्ली| यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI), जिसमें अभी-अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेशानुसार प्रबंधन परिवर्तन हुआ और स्टेट्समैन समूह ने कंपनी का नियंत्रण हाथ में लिया, में अवैध छंटनी शुरू हो गई है।

सूत्रों ने बताया कि नए प्रबंधन ने कर्मचारियों (खासकर गैर पत्रकार) से इस्तीफे लेने शुरू किए हैं। प्रबंधन का इरादा जून माह में ही सबको निबटाने का है। कर्मचारियों को सेवा के बचे हुए वर्षों पर प्रति वर्ष दो माह के वेतन देकर उनसे इस्तीफा लिया जा रहा है।

मजे की बात यह है कि इस्तीफे का स्वरूप भी मुहैया कराया जा रहा है, जो इस प्रकार है : “लंबी सेवा के बाद अपरिहार्य कारणों से मैं नौकरी छोड़ना चाहता हूं। मेरी माली हालत ठीक नहीं है इसलिए आपसे अनुरोध है कि एक माह के नोटिस पीरियड का वेतन और 2/4 वेतन देकर मुझे 30 जून से सेवामुक्त करें।”

बताया जा रहा है कि कथित मुआवजे के रूप में दिए जा रहे वेतनों की अधिकतम सीमा 10 निर्धारित की गई है यानी जिनकी बाकी सेवा की अवधि पांच वर्ष से अधिक है उन्हें भी अधिकतम 10 वेतन ही दिए जाएंगे।

बता दें कि स्टेट्समैन एनसीएलटी के समक्ष लिखकर दे चुका है कि वह सभी कर्मचारियों को बनाए रखने का प्रयास करेगा और यदि ऐसा संभव नहीं है तो कानून के अनुसार मुआवजा देगा।

यूएनआई के कर्मचारी श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम, 1955 से शासित होते हैं और इस अधिनियम व औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25 (एफ) के अनुसार यूएनआई प्रबंधन को छंटनी करनी है तो तीन महीने का नोटिस पीरियड व पूरी की गई सेवा के हर वर्ष पर पंद्रह दिन का वेतन मुआवजे के रूप में देना होगा।

जाहिर है, प्रबंधन की ऐसी कोई मंशा नहीं है इसलिए कर्मचारियों को डरा, धमकाकर और दबाव डालकर इस्तीफा लिया जा रहा है।

एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा दिए गये इनपुट पर आधारित

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