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उत्तर प्रदेश

सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता के आईफोन चोरी मामले में लापरवाह अस्सी चौकी प्रभारी निलंबित!

भड़ास4मीडिया पर मामले के उजागर होने और लगातार फॉलोअप के बाद आखिरकार अस्सी घाट मोबाइल चोरी प्रकरण में पुलिसिया लापरवाही पर गाज गिरी है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता के आईफोन चोरी मामले में ढिलाई बरतने के आरोपों को एसीपी जांच में सही पाए जाने के बाद अस्सी चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई दिखाती है कि जब सच सामने आता है और उस पर पत्रकारिता का दबाव बनता है, तो सिस्टम को जवाबदेह होना ही पड़ता है…


सुरेश गांधी-

वाराणसी। अस्सी घाट से सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता का मोबाइल चोरी होने के मामले में आखिरकार पुलिसिया लापरवाही पर कार्रवाई हुई है। प्रकरण में ढिलाई बरतने के आरोप में अस्सी चौकी प्रभारी रोहित त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई एसीपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीसीपी काशी जोन द्वारा की गई है। यह निलंबन न सिर्फ पुलिसिंग पर एक सवालिया निशान है, बल्कि यह भी साबित करता है कि एक जागरूक नागरिक, एक साहसी महिला और एक जिम्मेदार पत्रकार का फॉलोअप सिस्टम को झकझोर सकता है।

डीसीपी काशी जोन गौरव वंशवाल ने बताया कि मामले के सामने आने के बाद एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार को जांच सौंपी गई थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि चौकी प्रभारी शिकायतकर्ता महिला के साथ मौके पर तो गए, लेकिन मोबाइल की बरामदगी के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है।

घटना की पृष्ठभूमि

मुंबई निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता गुप्ता पुत्री उमेश गुप्ता अपने परिवार के साथ काशी भ्रमण पर आई थीं। 30 दिसंबर को अस्सी घाट पर भ्रमण के दौरान एक उचक्के ने उनका करीब दो लाख रुपये कीमत का आई फोन छीन लिया। घटना के तुरंत बाद अंकिता ने अस्सी पुलिस को सूचना दी। थाना भेलूपुर पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन इसके बाद जांच की गति ठहर गई।

जब पुलिस रुकी, तब नागरिक आगे बढ़े

पुलिस की निष्क्रियता से निराश होकर अंकिता ने अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग किया। उन्होंने मुंबई में अपने सहयोगियों की मदद से मोबाइल को ट्रेस किया। मोबाइल की लोकेशन चांदपुर क्षेत्र में एक ही मकान पर लगातार दिखाई दे रही थी। इसी लोकेशन के आधार पर अंकिता मौके पर पहुंच गयी, पुलिस को लोकेशन भेजने के बाद भी पुलिस सक्रिय नहीं हुई. इस दौरान अंकिता ने पत्रकार सुरेश गांधी को पूरी बात बताई. पत्रकार सुरेश गांधी के हस्तक्षेप पर रात दो बजे पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिस खानापूर्ति कर लौट आई। इसके बाद अंकिता ने हार नहीं मानी। अलसुबह होते ही वह दोबारा उसी लोकेशन पर पहुंचीं। मोबाइल एक ही मकान के भीतर दिख रहा था। अंकिता व पत्रकार द्वारा मकान मालिक से आग्रह कर कमरा खुलवाया, जहां से 20-25 चोरी के मोबाइल फोन बरामद हुए। खास यह है जब अंकिता मोबाइलों की झुंड में अपना मोबाइल देखा तो वह खुशी से झूम उठी, भला क्यों नहीं उसकी महनत जो सफल हुई थी. मकान मालिक ने बताया कि उसने यह कमरा किसी व्यक्ति को किराये पर दिया था, जो उसी रात से फरार है।

पत्रकार का फॉलोअप बना निर्णायक

इस पूरे घटनाक्रम में पत्रकार सुरेश गांधी का सक्रिय सहयोग और पुलिसिया सूचना-तंत्र महत्वपूर्ण रहा। बरामदगी के बाद लगातार फॉलोअप, तथ्य सामने लाना और मामले को सार्वजनिक करना ही वह कारण बना, जिससे पुलिसिया जांच आगे बढ़ी और अंततः लापरवाही उजागर होकर निलंबन तक बात पहुंची। मतलब साफ है यह मामला सिर्फ एक मोबाइल चोरी का नहीं है। यह पर्यटक सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों का प्रश्न है। अगर अंकिता जैसी शिक्षित, साहसी और तकनीक-सक्षम युवती खुद खड़ी न होती, अगर पत्रकार स्तर पर फॉलोअप न होता, तो शायद यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता। अस्सी घाट जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि अपराध सिर्फ चोर नहीं बढ़ाते, उदासीनता भी अपराध को संरक्षण देती है। चौकी प्रभारी का निलंबन यह साबित करता है कि इस प्रकरण में लापरवाही बरती गई, और यह भी कि जनदबाव व सच के सामने सिस्टम को झुकना पड़ता है। अंकिता का साहस और सुरेश गांधी का फॉलोअप न केवल सराहनीय है, बल्कि यह काशी ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए नागरिक जागरूकता की मिसाल बन गया है।

मूल खबर…

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