Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

…और फिर वह हथियार आया, जिसने सब बदल दिया… एक अजीब, तीव्र साउंड वेव जैसा कुछ!

तकनीक के आगे फेल हुआ वेनेज़ुएला, अमेरिका ने यूँ गढ़ी आधुनिक युद्ध की परिभाषा

नितिन त्रिपाठी-

वेनेज़ुएला—दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल होल्डर, सोने और खनिजों का विशाल भंडार, रूस और चीन का करीबी साझेदार, और क्यूबा जैसी कम्युनिस्ट मिलिट्री ताक़त की छाया में पला देश। एक समय का कम्युनिस्ट दुनिया का पोस्टर बॉय। काग़ज़ पर इतनी ताक़त कि लगता है कोई इसे हिला भी नहीं सकता। लेकिन फिर भी, सिर्फ़ 8 हेलिकॉप्टर, करीब 20 कमांडो आए—और सब कुछ खत्म। राष्ट्रपति को ज़िंदा पकड़ा गया, पास के नेवल बेस ले जाया गया और वहाँ से अमेरिका पहुँचा दिया गया। इतना बड़ा देश, इतनी बड़ी सैन्य और रणनीतिक कथित ताक़त—और वह कुछ भी नहीं कर पाया। दुनिया सच में बदल चुकी है।

हम में से ज़्यादातर लोग आज भी युद्ध को उसी चश्मे से देखते हैं, जिससे हमने द्वितीय विश्व युद्ध या 1971 का भारत-पाक युद्ध देखा था—बड़ी सेनाएँ, हज़ारों सैनिक, महीनों चलने वाली लड़ाइयाँ। लेकिन आधुनिक युद्ध अब ऐसा नहीं होता। आज युद्ध संख्या का नहीं, तकनीक का खेल है। ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफ़ेयर, साइलेंट सिस्टम्स, ऐसे हथियार जिनका नाम तक आम लोग नहीं जानते—और शायद जिनका इस्तेमाल कभी खुले युद्ध में पहले हुआ ही नहीं।

जो विवरण सामने आया है, वह डराने वाला है। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति के एक कमांडो के बयान के मुताबिक़, अचानक सभी रडार सिस्टम बंद हो गए। बिना किसी चेतावनी के। उसके बाद आसमान में ड्रोन दिखाई दिए—बहुत सारे ड्रोन। सैनिकों को समझ ही नहीं आया कि प्रतिक्रिया कैसे दें। फिर कुछ ही हेलिकॉप्टर आए—गिनती में आठ से ज़्यादा नहीं—और उनमें से लगभग 20 अमेरिकी सैनिक उतरे। लेकिन उनके पास बंदूकों से कहीं ज़्यादा ताक़त थी।

उस कमांडो के शब्दों में—वे तकनीकी रूप से ऐसे उन्नत थे, जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। यह लड़ाई नहीं थी, यह एकतरफ़ा सफ़ाया था। सैकड़ों सैनिक थे, लेकिन कोई मौक़ा नहीं। फ़ायरिंग इतनी सटीक और तेज़ थी कि ऐसा लग रहा था जैसे हर सैनिक मिनट में सैकड़ों राउंड चला रहा हो। और फिर वह हथियार आया, जिसने सब कुछ बदल दिया। एक अजीब, तीव्र साउंड वेव जैसा कुछ। अचानक नाक से खून बहने लगा, उल्टियाँ शुरू हो गईं, और सिर अंदर से फटता हुआ महसूस हुआ। बिना छुए, बिना दिखे—लोग ज़मीन पर गिर गए।

इसके बाद जो हुआ, वह और भी ज़्यादा बोलता है। उसी पार्टी की नई सरकार, उप-राष्ट्रपति के नेतृत्व में, अब चुप है। कोई शोर नहीं, कोई बदले की भाषा नहीं। उल्टा—अमेरिका से सहयोग की बातें। डर और सदमे की प्रतिक्रिया अक्सर यही होती है—खामोशी।

यह पोस्ट अमेरिका की तारीफ़ नहीं है। यह चेतावनी है। चेतावनी उन लोगों के लिए जो आज भी ताक़त को जनसंख्या, सेना की संख्या और हथियारों के ढेर से मापते हैं। आज की दुनिया में युद्ध अब मोर्चों पर नहीं, सर्वरों पर जीते जाते हैं। बूट ज़मीन पर कम पड़ते हैं, एल्गोरिद्म ज़्यादा काम करता है।

आज युद्ध यह नहीं तय करता कि कौन ज़्यादा ताक़तवर है। आज युद्ध यह तय करता है कि कौन ज़्यादा तैयार था—और कौन अब भी पुराने ज़माने में जी रहा था।


विवेक बाजपेयी-

वेनेजुएला के तख्तापलट की सीक्रेट स्टोरी! मादुरो का भरोसेमंद जनरल ट्रंप का जासूस कैसे बना?

मादुरो के तख्तापलट के समय से ही विश्वासघात की थ्योरी तेज़ हो गई थी. लेकिन अब पहली बार गद्दारी के आरोप में वेनेज़ुएला के एक जनरल को बर्खास्त किया गया है. कुछ रिपोर्ट्स में जनरल की गिरफ़्तारी की ख़बरें भी हैं. गद्दारी के आरोप में बर्खास्त इस जनरल का नाम है जेवियर मार्कानो ताबाता. जनरल ताबाता प्रेसिडेंशियल हॉनर गार्ड के प्रमुख थे. इसके साथ-साथ वो वेनेज़ुएला की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट DGCIM के हेड भी थे. यानी उनके ऊपर दो-दो बड़ी ज़िम्मेदारियां थीं. प्रेसिडेंशियल हॉनर गार्ड के प्रमुख के रूप में उनका काम निकोलस मादुरो की सुरक्षा करना था. जो बॉडीगार्ड मादुरो की सुरक्षा के लिए लगाए गए थे, वो जनरल ताबाता के निर्देश पर काम करते थे.

वहीं काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट के प्रमुख के रूप में उनके पास विदेशी षडयंत्र, जासूसी और आतंकवाद को रोकने का काम था. यानी जिस व्यक्ति पर मादुरो की सुरक्षा का ज़िम्मा था. जिसे अमेरिकी ऑपरेशन के बारे में जानकारी जुटानी थी, वही अमेरिका के साथ मिल गया. बड़ा सवाल ये है कि जिस शख्स पर अपनी सुरक्षा को लेकर मादुरो सबसे ज्यादा भरोसा करते थे. वो ट्रंप का जासूस कैसे बन गया?

मादुरो के तख्तापलट के बाद अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ ने मादुरो के अपहरण के पीछे की साज़िशों का पता लगाने का आदेश दिया. मादुरो के बेटे गुएरा और उनके समर्थकों ने भी अमेरिका के ऑपरेशन के पीछे गद्दारी के आरोप लगाए थे.

जितनी आसानी से अमेरिका की डेल्टा फोर्स ने वेनेज़ुएला में तख्तापलट किया था, वो किसी इनसाइडर की भूमिका का इशारा कर रहा था. DNA मित्रो, अमेरिकी सैनिकों ने बिना किसी प्रतिरोध के बिल्कुल उसी जगह हमला किया जहां मादुरो रुके हुए थे. यानी उन्हें मादुरो के ठिकाने की सटीक जानकारी थी. जबकि मादुरो के बारे में कहा जाता है कि वो कुछ दिनों या कुछ घंटों के बाद अपना ठिकाना बदल लेते थे. इसके अलावा जब अमेरिका ने हमला किया, उस समय वेनेज़ुएला का एयर डिफेंस सिस्टम काम ही नहीं कर रहा था. जबकि वेनेज़ुएला के एयर डिफेंस सिस्टम को अपेक्षाकृत मज़बूत माना जाता है.

यही वजह है कि जैसे ही मादुरो को पकड़ने की ख़बर आई, वैसे ही ये सवाल उठने लगे कि वेनेज़ुएला के एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर निशाना क्यों नहीं साधा. अमेरिकी को मादुरो के सटीक ठिकाने की ख़बर कैसे लगी.

जनरल ताबाता की बर्खास्तगी के बाद इन सवालों के जवाब सामने आए हैं. जनरल ताबाता पर पहला आरोप ये है कि उन्होंने मादुरो की लोकेशन के बारे में अमेरिका को बताया. उन पर दूसरा आरोप ये है कि उन्होंने वेनेज़ुएला के एयर डिफेंस सिस्टम को डिएक्टिवेट कर दिया.

जनरल ताबाता से मिली जानकारी के आधार पर ही डेल्टा फोर्स ने मादुरो के सेफ हाउस की हूबहू नक़ल बनाई. उन्होंने ये अभ्यास भी किया कि वो उस क़िलेबंद घर में कैसे प्रवेश करेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ शुरुआती जांच में जनरल की भूमिका सामने आने के बाद उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का केस दर्ज किया गया है.

सत्ता में रहते हुए मादुरो जनरल ताबाता पर बहुत भरोसा करते थे. वेनेज़ुएला में काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट के प्रमुख के रूप में जनरल ताबाता पर अत्याचार के कई आरोप हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ मादुरो के इशारे पर जनरल ताबाता ने मादुरो के विरोधियों पर ज़ुल्म किए थे. इन आरोपों की वजह से अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध भी लगाए थे. लेकिन जनरल ताबाता वफ़ादार से गद्दार क्यों बने, इसको लेकर अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. सवाल ये भी है कि अगर वो अमेरिकी एजेंट थे तो अब अमेरिका जनरल को बचाने के लिए क्या करेगा.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन