लखनऊ: दैनिक भास्कर के रिपोर्टर विकास श्रीवास्तव पर उनकी एक रिपोर्ट को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है। इसे लेकर मीडिया जगत में खासी नाराजगी पसर रही है। सैंकड़ों की तादाद में पत्रकार विकास के सपोर्ट में सोशल मीडिया पर बहुत कुछ लिख रहे हैं।
नीचे पढ़े कुछ प्रतिक्रियाएं….
विकास श्रीवास्तव एक गंभीर और जिम्मेदार पत्रकार हैं। बिना मूलभूत नियमों का पालन किए बगैर खबर नहीं लिखते। कोर्ट में मामला टिकेगा नहीं लेकिन ये पत्रकारों को डराने वाला कदम है- नवल कांत सिन्हा
विवेक त्रिपाठी-
बिल्कुल सहमत हूं.. विकास श्रीवास्तव एक जिम्मेदार पत्रकार है और उसकी खबर मैंने पूरी पढ़ी.. एक-एक लाइन पढ़ी.. उसने खबर लिखने से पहले आईएएस बाबूलाल मीणा से बात करने की कोशिश की.. मेरी जानकारी के मुताबिक विकास ने उन्हें कई बार कॉल की लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की. इसके बाद विकास ने उन्हें कई मैसेज किए.. उनका पक्ष जानने के लिए, जिसके स्क्रीनशॉट भी विकास ने अपनी खबर में लगाए हैं.. इसके बाद भी आईएएस बाबूलाल मीणा ने अपना पक्ष नहीं रखा. शायद वो पहले से तैयार थे.. सोच कर बैठे थे कि अगर मेरे खिलाफ कुछ लिखोगे तो एफआईआर लिखाऊंगा..
ये वही आईएएस बाबूलाल मीणा हैं जिनके खिलाफ अल्पसंख्यक विभाग के अफसर और कर्मचारियों ने विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया था.. इसके बाद वो समाज कल्याण के प्रमुख सचिव बने और समाज कल्याण के एक निदेशक को ऑनलाइन मीटिंग में इतना कुछ कह डाला कि उन्हें एंजाइना पेन हो गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.. यहां से वो रेशम विभाग के अपर मुख्य सचिव बने और तमाम महिलाओं ने उनके खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत की. हालांकि, दबाव पड़ने के बाद महिलाएं खामोश हो गईं और उन्होंने शिकायत की बात से इनकार कर दिया..
ऐसी ही एक शिकायतकर्ता महिला से मैंने बात की थी तो वो मुकर गई.. अगर ये सारी बातें, इतनी शिकायतें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को नहीं दिख रही हैं तो इशारा साफ है कि ब्यूरोक्रेसी के कुछ अफसर सरकार को डुबोने की तैयारी कर चुके हैं.. 27 की राह मुश्किल है..
ज्ञानेंद्र शुक्ला-
लखनऊ के युवा पत्रकार पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण व चिंताजनक है! खबरों को लेकर मुकदमे दर्ज होने के सिलसिले से लोकतंत्र को आघात पहुंचता है!!
दैनिक भास्कर डिजिटल के पत्रकार विकास श्रीवास्तव ने एक खबर लिखी जो कतिपय पीड़िताओं की शिकायतों के आधार पर थी, पत्रकार द्वारा लिखी गई खबर में जो मुद्दे उठाए गए हैं वे अति गंभीर प्रवृत्ति के हैं। खबर के मुताबिक एक वरिष्ठ आईएएस अफसर के खिलाफ लगे इन कथित आरोपों के बावत शिकायतें आईजीआरएस व प्रधानमंत्री कार्यालय तक से की गईं।
बहरहाल, खबर प्रकाशित होने के बाद विकास के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह है कि इस बेहद संवेदनशील मामले में एक उच्चस्तरीय समिति बनाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि आरोपों से लेकर शिकायतों तक से जुड़े हर पहलू की सच्चाई सामने आ सके।
विशाल ज्योति अग्रवाल-
दैनिक भास्कर के पत्रकार विकास श्रीवास्तव पर FIR हो गयी है! खबर एक IAS द्वारा अधीनस्थ महिलाओं के साथ आपत्तिजनक व्यवहार के संबंध में थी, यह खबर आज भी दैनिक भास्कर App पर मौजूद है!
पीड़ित महिलाओं ने अपनी शिकायत हर स्तर पर की, यहाँ तक पीएमओ तक को भेजी, लेकिन IAS का कुछ नहीं हुआ, लेकिन ये खबर हुई तो पत्रकार पर ही FIR हो गयी!
शान-
उत्तर प्रदेश में पत्रकारों को अब पत्रकारिता छोड़ सरकार और शासन की गुलामी शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि यदि पत्रकारिता करेंगे तो FIR होगी… सरकार को फरमान जारी कर देना चाहिए कि यूपी में जो भी पत्रकारिता करेगा उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही (FIR) होगी।
यूपी में अब सरकार/शासन का PR का भोंपू बजाना ही पत्रकारिता है बाकी यदि सच/निष्पक्ष ख़बर दिखाई या लिखी तो FIR होगी।
सभी पत्रकारों को 5 कालिदास मार्ग पर एकजुट होकर “योगी जी जिंदाबाद”, “योगी जी जिंदाबाद” के नारे लगाने चाहिए, क्योंकि पत्रकारों के पास अब यही एक मात्र विकल्प बचा है अपना जीवन यापन करने हेतु/अपने परिवार का पालन पोषण करने हेतु।
शुभम त्रिपाठी-
चुप बैठना,पाप का सहभागी होना है। सबको ज्ञात है भ्रष्टाचार चरम पर है। लोकतंत्र की जगह अधिकारीतंत्र प्रभावी है। एक IAS अधिकारी के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप के बाद पत्रकार विकास श्रीवास्तव पर FIR लिखाई जाती है और प्रताड़ित किया जाता है। वाह रे रामराज्य।
ये रिपोर्ट सिर्फ दैनिक भास्कर ने की हम सब पूछते रहे इस त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार कौन! दैनिक भास्कर के आशीष राय और विकास श्रीवास्तव वो 6 चेहरे भी ढूँढ लाए थे- साक्षी जोशी




