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आज के अखबार : विनेश फोगाट का मामला पहले पन्ने पर है लेकिन वैसे नहीं जैसे होना चाहिए था आइए, समझें

संजय कुमार सिंह

भारतीय कुश्ती फेडरेशन ने पूरा मामला सार्वजनिक होने और सरकारी खर्च पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाकर भी हार जाने के बावजूद विनेश फोगाट को 2026 के एशियन गेम्स में भाग नहीं लेने देने का इंतजाम कर दिया है। कहने की जरूरत नहीं है कि विनेश ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व प्रमुख का विरोध किया, वे भारतीय जनता पार्टी के प्रभावी नेता हैं इसलिए उनका तो कुछ खास नहीं बिगड़ा लेकिन विरोध करने वाली को निपटा दिया गया है। शिकायत पर कार्रवाई तो बहुत दूर की बात है। आज यह खबर अमर उजाला में करीब पांच कॉलम का बॉटम है, नवोदय टाइम्स में दो कॉलम का बॉटम है, दैनिक भास्कर के दूसरे पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम की खबर है और टाइम्स ऑफ इंडिया में सेकेंड लीड है, द हिन्दू में दो कॉलम में है। सारी खबरें अदालत के कल के आदेश की हैं लेकिन भारतीय कुश्ती संघ ने जो खेल किया वह रह गया है जबकि खबर वही होनी चाहिए थी। इस खबर पर आने से पहले बता दूं कि आज की दूसरी बड़ी खबर नीट पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, मानसून कमजोर होने की आशंका (हिन्दुस्तान टाइम्स), सूखे का खतरा (दैनिक भास्कर) और कर्नाटक में डीके शिवकुमार को नया नेता चुनने के लिए विधायक दल की बैठक आज होने की खबर लीड है (दि एशियन एज)। इसके अलावा, दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉक्रोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट को तत्काल बाहल करने से इनकार कर दिया। यह आज हिन्दुस्तान टाइम्स में सिंगल कॉलम की छोटी सी खबर है। दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर आज यह खबर नहीं दिख रही है। आप जानते हैं कि सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखा जाए सरकार हैंडल ब्लॉक करवा लेती है। इसके लिए ऐसे कानून बनाए हैं और अनुपालन के लिहाज से काफी सख्त हैं। ऐसे में सरकारी या भाजपा से संबंधित मामले में सरकारी आदेश जाए तो कार्रवाई जरूरी होती है। लिहाजा कार्रवाई बिना कारण बताए, सफाई का मौका दिए बगैर हो रही है और सिर्फ आरोपों के आधार पर अगर सोनम वांगचुक छह महीने जेल में रह लिए, उमर खालिद छह महीने से ज्यादा समय से जेल में है। ऐसे में सोशल मीडिया हैंडल की परवाह कौन करे। लिहाजा, सरकारी झूठ तो चलता रह सकता है सरकार के खिलाफ सच भी रोका जा सकता है और कई पुराने हैंडल बंद करवाए जा रहे हैं।

Screenshot of Manoj Arora's tweet about Coempt’s mystery and three points: Manipal Group controls Coempt's EdTech arm; T.V. Mohandas Pai; Rajeev Chandrasekhar; mentions a Sanjay Hegde tweet below.
Screenshot 2026 05 30 101026

सीबीएसई ने कॉपी जांचने का ठेका जिस कंपनी को दिया है उससे संबंधित सवाल पूछने के लिए राहुल गांधी को बदनाम, अपमानित किया जा रहा है। जवाब देने की बजाय उनके सवाल को ही बेमतलब बताया जा रहा है। यहां तक कि हिन्दुस्तान टाइम्स में कल छपी खबर को शेयर करने पर भी अमित मालवीय ने लंबी-चौड़ी सफाई दी। इसमें यह भी तर्क है कि कांग्रेस की सरकारों ने भी इसी कंपनी की सेवा ली है। मुद्दा यह है कि वहां सिस्टम ठीक चल रहा है या कुछ गड़बड़ी हुई है तो ईडी क्या रहा है। जवाब कांग्रेस या राहुल गांधी से मांगने की बजाय भाजपा को ही देना है फिर भी भाजपा संगठित रूप से राहुल गांधी पर हमला कर रही है। वह भी तब जब राहुल गांधी ने यही लिखा था कि, इस कहानी को ध्यान से पढ़ें। CBSE ने तीन बार OSM टेंडर निकाले। पहली बार एक भी बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई भी योग्य बोली लगाने वाला नहीं मिला। और आखिरकार, तकनीकी मापदंडों को तब तक नीचे किया गया, जब तक कि COEMPT उन्हें पूरा न कर सका। इन सवालों का जवाब देने की बजाय गलत, अपुष्ट तर्क दिए जा रहे हैं जबकि सिस्टम ऐसा है कि उसे 17-18 साल के लड़के ने हैक कर लिया। हद तो तब हो गई जब सीबीएसई ने प्रिंसिपल को आदेश दे दिया कि रील बनाकर सरकारी संदेश या विचारधारा को सही बताएं। इसमें यह मामला दब गया या दबा दिया गया कि कंपनी किसकी है, बदनाम होने के बावजूद नए नाम से ठेका कैसे दे दिया गया। यह अलग बात है कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के खिलाफ प्रचार चल रहा है तो यह भी बताया जा रहा है कि सीबीएसई ने ठेका जिस कंपनी को दिया है वह भाजपा के प्रचारकों और समर्थकों की है। उदाहरण के लिए ऊपर लगे स्क्रीनशॉट को देखिए। यह एक्स की एक पोस्ट है। इसमें राहुल गांधी का सवाल है, कंपनी किसकी है? जवाब में कहा गया है :  यहाँ COEMPT का रहस्य बताया गया है और यह भी कि निविदाओं को COEMPT के हिसाब से क्यों बदला गया… 1. मणिपाल ग्रुप (मुख्य रूप से अपने डिवीज़न, मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज़ के ज़रिए) COEMPT में ज़्यादातर हिस्सेदारी रखता है और इसे अपनी EdTech तथा डिजिटल परीक्षा शाखा के तौर पर नियंत्रित करता है। 2. टीवी मोहनदास पई – जो भाजपा के एक जाने-माने और मुखर समर्थक हैं – मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज़ के चेयरमैन के तौर पर काम करते हैं। 3. भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर, मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के एक जाने-माने पूर्व छात्र हैं; एमआईटी, मणिपाल एकेडमी ऑफ़ हायर एजुकेशन (एमएएचई) के ‘ताज का एक नगीना’ (सबसे अहम हिस्सा) है। देखता हूं कल यह खबर बनती है कि नहीं।

Official WFI circular confirming Ms. Vinesh Phogat may compete in the 50 kg weight category for selection trials after not participating in any UWW events since the 2024 Olympics in Paris and related qualifiers in Kyrgyzstan and Hungary.
Vinesh

मुझे लगता है कि आज की खबरों में खेल वाली खबर ही राजनीतिक है और कुश्ती की है तो यह सूचना कि खिलाड़ी हार गई राजनीति या सिस्टम जीत गई, महत्वपूर्ण है। अमर उजाला में खबर तो है पर प्रस्तुति सरकारी है। मुख्य शीर्षक से अलग एक शीर्षक है, 50 या 57 किलो, भारवर्ग पर फंसेगा पेंच, देर रात तक विनेश की नहीं पहुंची एंट्री। जाहिर है, अमर उजाला ने अपने रिपोर्टर को इस काम में लगाया हुआ होगा या कुश्ती महासंघ ने यह सूचना दी होगी – पत्रकारिता के नियमों के अनुसार दोनों ही प्रचार है। खबर होगी पर पत्रकारिता नहीं, प्रेस विज्ञप्ति वाली। मुख्य खबर से अलग पर बीच में विनेश फोगाट की फोटो के साथ एक खबर का शीर्षक है, विनेश को नसीहत… आप बेहतरीन पहलवान, पर देश पहले। इसके साथ कोर्ट ने कहा के तहत लिखा है – भारतीय खेल प्रणाली अंतरराष्ट्रीय नियमों से जुड़ी है और डोपिंग के मानकों का पालन अनिवार्य है। यदि वैश्विक स्तर पर किसी प्रकार की अयोग्यता होती है तो इसका भारत पर नकारात्मक असर पड़ता है। मुख्य खबर का उप शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने कुश्ती महासंघ से कहा – महिला पहलवान से उम्मीदें व अपेक्षाएं बढ़ीं। मुख्य शीर्षक है, घर लौटने को नहीं कहेंगे…ट्रायल में हिस्सा ले सकेंगी विनेश। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और इस खबर से अलग तथ्य यह है कि विनेश ने पेरिस ओलंपिक में महिलाओं की 50 किलो कुश्ती स्पर्धा में भाग लिया था। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। लेकिन ठीक पहले  उनका वजन तय सीमा (50 किग्रा) से मात्र 100 ग्राम अधिक पाया गया। इस कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। मुझे लगता है कि विनेश को देश (या भारतीय कुश्ती संघ) की ओर से आवश्यक सुविधा नहीं मिलने के कारण भी ऐसा हुआ। नतीजा यह रहा कि विनेश तो मेडल से वंचित रही हीं, देश को भी मेडल नहीं मिला जो मिल सकता था और इस कारण पूरे देश की जिम्मेदारी थी कि वे 100 ग्राम वजन बढ़ने या ज्यादा होने के कारण डिसक्वालीफाई नहीं होतीं। उस समय क्या हुआ और जो जरूरी था वह अभी मुद्दा है नहीं, जो हो रहा है उसे पिछली बार जो हुआ उसके आलोक में देखना चाहिए। भारत को चाहिए कि विनेश सही भारवर्ग में भाग ले और मेडल लाए। लेकिन उसके पास दूसरे खिलाड़ी भी हैं और जाहिर है उसे सर्वश्रेष्ठ को भेजना चाहिए। पर वह विनेश को नहीं जाने देने में परेशान हैं। अगर डोपिंग के मामले में भारत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है तो एक खिलाड़ी को सही भार वर्ग में नहीं भेजने या इसपर विवाद करके भाग नहीं लेने देने या वजन 100 ग्राम ज्यादा होने के कारण डिसक्वालीफाई हो जाने से भी असर पड़ेगा और नहीं भी पड़ता हो तो खबर ईमानदारी से निष्पक्ष होनी चाहिए।

खबर का मामला यह है कि भारतीय कुश्ती संघ ने विरोधी को निपटाने का पूरा उपाय किया है जो तरीका अपनाया वह एकदम नियमानुकूल, तार्किक और जबरदस्त है। फिर भी, क्या यह उसके विरोध के कारण नहीं है? और है तो खबर पहले नहीं होनी चाहिए थी? पूरा मामला आप जानते हैं। हाल में खबर थी कि डब्ल्यूएफआई ने विनेश को घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने से अयोग्य घोषित कर दिया था, क्योंकि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों के लिए डोपिंग-रोधी नियमों के अनुसार 6 महीने का अनिवार्य ‘नोटिस पीरियड’ होता है। अदालत ने  डब्ल्यूएफआई के रवैये को “बदले की भावना वाला” और “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मां बनना कोई अपराध नहीं है और इससे किसी भी खिलाड़ी के करियर को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। खासकर तब जब इसमें देश के लिए एक मेडल जीतने या नहीं जीतने की संभावना -आशंका भी है। पर जो स्थितियां हैं उसमें  हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। इसके लिए ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में ट्रायल करने के आदेश दिए गए। लेकिन डब्ल्यूएफआई नहीं माना। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल नजदीक होने का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने या उस पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। इस तरह विनेश फोगाट को इन कानूनी राहतों के जरिए 30 और 31 मई को हुए एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने का मौका मिला। आज जो खबर छपी है वह मुख्य रूप से यही है और लग रहा है कि सब ठीक है। विनेश के साथ कुछ अन्याय नहीं हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसका पूरा ख्याल रखा है। लेकिन तथ्य यह है कि अमर उजाला की खबर, ….भारवर्ग पर फंसेगा पेंच 28 मई के इस पत्र के आधार पर है। इसी से साफ हो जाता है कि विनेश फोगाट भाग नहीं ले सकेंगी। जिस भार वर्ग से विनेश दो साल पहले 100 ग्राम ज्यादा वजन के कारण डिसक्ववालीफाई हो चुकी हैं उसी वर्ग में रहने की बाध्यता बिना पूछे रखी गई है तो कुछ कहने की जरूरत नहीं है और पूछ कर रखी गई होती तो हाईकोर्ट तक लड़ने वाली विनेश की एंट्री कल रात तक क्यों नहीं पहुंचती। जाहिर है, 28 मई के पत्र को छिपाया गया या महत्व नहीं दिया गया। और सुप्रीम कोर्ट से बात बन जाती तो उसी की आड़ में काम हो जाता नहीं हुआ तो कुश्ती संघ को अपना अंतिम अस्त्र सार्वजनिक करना पड़ा जो नियमानुसार होते हुए भी खबर है और खबर आज की नहीं 28 को ही होनी चाहिए थी, 29 के अखबार में छपनी चाहिए थी।

इस पत्र में कहा गया है, “….चूँकि विनेश फोगाट ने एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी के तौर पर 2024 के पेरिस ओलंपिक खेलों, किर्गिस्तान में आयोजित ओलंपिक क्वालिफायर और हंगरी में आयोजित चौथे रैंकिंग टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और 2024 के ओलंपिक खेलों के बाद से उन्होंने किसी भी अन्य प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है, इसलिए डब्ल्यूएफआई ने उन्हें 50 किलोग्राम भार वर्ग के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति प्रदान कर दी है।” तथ्य यह भी है कि विनेश फोगाट मुख्य रूप से 53 किलो और 50 किलो भार वर्ग में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में शामिल हुई हैं। मुझे लगता है कि भार वर्ग को देखना और गड़बड़ी नहीं हो,  सुनिश्चित करना उसका भी काम था जिसे उनके जीतने से लाभ होता। इस मामले में हमारा भारत देश भी था। पर जो हुआ वह यादगार है। ऐसे में उन्हें 50 किलो वर्ग में खेलने की अनुमति देना खेलों में राजनीति और राजनीति में खेल दोनों है। खबर तो है ही। जो स्थितियां हैं उसमें इससे जुड़ी देशभक्ति को समझने की जरूरत है। हिन्दुओं का भला तो हर क्षेत्र में हो ही रहा है। इसीलिए हम विश्वगुरू हैं या होने के आउटर पर खड़े हैं। 

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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