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2025: पत्रकारों के खून से रंगा वर्ष, दुनियाभर में 165 पत्रकारों की हत्या, पूर्वोत्तर भारत रहा अपवाद!

नवा ठाकुरिया

जब वर्ष 2025 विदा हो चुका है और दुनिया एक नए कैलेंडर में प्रवेश कर चुकी है, तब पीछे मुड़कर देखने पर यह वर्ष मीडिया जगत के लिए एक काले अध्याय के रूप में दर्ज होता दिखाई देता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और जनहित में काम करने वाले पत्रकारों के लिए 2025 न केवल चुनौतीपूर्ण रहा, बल्कि घातक भी सिद्ध हुआ। जिनेवा स्थित वैश्विक मीडिया सुरक्षा एवं अधिकार संगठन प्रेस एम्ब्लेम कैंपेन (PEC) के आंकड़े इस सच्चाई को बेहद निर्ममता से सामने रखते हैं।

PEC के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनियाभर के 31 देशों में कम से कम 165 पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की हत्या की गई। यह संख्या बताती है कि पत्रकारिता करना आज भी कई देशों में जान हथेली पर रखकर काम करने जैसा है। हालांकि यह आंकड़ा 2024 में दर्ज 179 मौतों से कुछ कम है, फिर भी यह सदी की शुरुआत से अब तक के सबसे खतरनाक वर्षों में से एक माना जा रहा है।

क्षेत्रवार विश्लेषण करें तो मध्य पूर्व (Middle East) वर्ष 2025 में पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक इलाका रहा, जहां 87 पत्रकारों की जान गई। इसके बाद लैटिन अमेरिका में 27, एशिया में 23, अफ्रीका में 16, यूरोप में 10 और संयुक्त राज्य अमेरिका में 2 पत्रकारों की हत्या दर्ज की गई।

गाजा पट्टी पत्रकारों के लिए कब्रगाह बनती नजर आई। अकेले गाजा में कम से कम 60 पत्रकार मारे गए, जिनमें से अधिकांश इजरायली सैन्य हमलों के शिकार हुए। 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा शुरू किए गए संघर्ष के बाद से अब तक 221 फिलीस्तीनी पत्रकारों की मौत हो चुकी है—यह आंकड़ा वैश्विक मीडिया इतिहास में बेहद भयावह माना जा रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध भी पत्रकारों के लिए घातक साबित हुआ। इस संघर्ष में अब तक 9 पत्रकारों की मौत दर्ज की गई, जिनमें तीन यूक्रेनी, एक फ्रांसीसी और पांच रूसी पत्रकार शामिल हैं। PEC के अध्यक्ष ब्लेज़ लेम्पेन ने चिंता जताते हुए कहा कि आधुनिक युद्धों में तेज़ गति और अदृश्य ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल युद्ध संवाददाताओं के लिए एक नया और गंभीर खतरा बन गया है। घायल पत्रकारों तक पहुंचना भी अब पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है।

हिंसा और अराजकता की चपेट में अन्य देश मेक्सिको, जो लंबे समय से मादक पदार्थ तस्करी और संगठित अपराध से जूझ रहा है, 2025 में भी पत्रकारों के लिए खतरनाक देशों में शामिल रहा, जहां 9 पत्रकारों की हत्या हुई। सूडान में जारी गृह संघर्ष ने हालात और बिगाड़ दिए, जहां कम से कम 8 पत्रकारों की जान गई। यमन में 15 मीडिया कर्मियों की मौत, जिनमें से 13 एक ही हमले में मारे गए, ने वैश्विक चिंता को और गहरा किया।

भारत और दक्षिण एशिया की स्थिति

PEC के अनुसार, भारत में 2025 के दौरान 6 पत्रकारों की हत्या हुई—जो 2024 के आंकड़े से अधिक है। मारे गए पत्रकारों में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, अंडमान-निकोबार, हरियाणा, ओडिशा इत्यादि राज्य शामिल हैं।

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