नासिक। त्र्यंबकेश्वर में कुंभ मेले से जुड़ी बैठक की कवरेज करने पहुँचे तीन टीवी पत्रकारों पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर हत्या की कोशिश, दंगा फैलाने और आपराधिक धमकी जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
कैसे हुआ हमला?
शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे पत्रकार योगेश खरे, अभिजीत सोनवणे और किरण ताजने अपने ड्राइवर के साथ चार पहिया वाहन से त्र्यंबकेश्वर पहुँचे। पुलिस के मुताबिक, वहाँ पर ठेके पर काम करने वाले कुछ युवक, जो नगरपालिका परिषद की ओर से प्रवेश शुल्क वसूलते हैं, उन्होंने पत्रकारों की गाड़ी रोक ली।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों ने पहचान बताने और कवरेज का कारण समझाने के बावजूद उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया। जब दो पत्रकारों ने इस वसूली को कैमरे में रिकॉर्ड करना शुरू किया तो विवाद बढ़ गया और उन पर हमला कर दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने के बाद योगेश खरे तुरंत थाने पहुँचे और पुलिस लेकर लौटे, तब तक अन्य दोनों पत्रकारों की पिटाई हो चुकी थी। पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों — प्रशांत सोनवणे (21), शिवराज आहर (21) और ऋषिकेश गंगुर्डे (19) — को गिरफ्तार कर लिया।
त्र्यंबकेश्वर थाने के निरीक्षक महेश कुलकर्णी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 109 (हत्या की कोशिश), 189 (गैरकानूनी जमाव), 191 (दंगा) और 351 (आपराधिक धमकी) के तहत केस दर्ज किया गया है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
हमले में घायल पत्रकार किरण ताजने को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबळ ने अस्पताल जाकर उनकी मुलाकात की और घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने नासिक ग्रामीण एसपी बलासाहेब पाटिल को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
वहीं, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सापकाळ ने इस घटना को “अमानवीय” बताया और कहा कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है।



