लखनऊ- उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने वर्ष 2024 का वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को सौंपा है। इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों का विस्तार से जिक्र है। रिपोर्ट के आधार पर 4 आईएएस अधिकारियों, 10 नगर पालिका-नगर पंचायत अध्यक्षों और 93 अन्य सरकारी अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
कितने मामले आए और कितनों का निपटारा हुआ
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में लोकायुक्त कार्यालय को 2168 नई शिकायतें प्राप्त हुईं। पुराने मामलों समेत कुल 4484 प्रकरण विचाराधीन रहे। इनमें से 2131 मामलों का निपटारा कर दिया गया। शुरुआती जांच में 1200 मामलों का समाधान हो गया, जबकि 931 मामलों में विस्तृत जांच के बाद कार्रवाई की गई। वर्ष के अंत तक 2353 मामले अभी भी लंबित रहे।
शिकायतकर्ताओं को मिली राहत
लोकायुक्त की सक्रियता का असर यह रहा कि 115 मामलों में शिकायतकर्ताओं को पूरी राहत मिली। इनमें अधिकांश लोग पेंशन और सेवानिवृत्ति संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे थे। उन्हें कुल 3.72 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया। दिलचस्प बात यह है कि राहत पाने वाले 9 लोगों ने लोकायुक्त को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद भी दिया।
शासन को भेजी गई रिपोर्टें
लोकायुक्त ने वर्षभर में शासन को कुल 55 रिपोर्टें भेजीं, जिनमें 31 सामान्य रिपोर्ट, 20 सिफारिशें और 4 विशेष रिपोर्ट शामिल हैं। इन रिपोर्टों में स्पष्ट कहा गया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए।
जागरूकता पर जोर
भ्रष्टाचार की रोकथाम के साथ-साथ लोकायुक्त ने जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया। प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित शिविर में लोगों को सीधे लोकायुक्त तक शिकायत पहुँचाने के तरीकों की जानकारी दी गई। वहीं विभिन्न विश्वविद्यालयों के 250 छात्रों को प्रशिक्षण देकर पारदर्शी प्रशासन और लोकायुक्त की कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
रिपोर्ट में बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार इन सिफारिशों पर कठोर कदम उठा सकती है।
लखनऊ के पत्रकार विवेक त्रिपाठी ने इस प्रकरण पर लिखा है-
यूपी के वो 4 आईएएस कौन हैं जो लोकायुक्त की जांच में दोषी पाए गए हैं?? पता सबको है लेकिन मामला ब्यूरोक्रेट्स का है इसलिए कोई बोल नहीं रहा.. फिलहाल लोकायुक्त की जांच में चार आईएएस अफसरों के साथ 93 लोक सेवक भी दोषी पाए गए हैं.

लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने राज्यपाल को वार्षिक प्रतिवेदन 2024 सौंपा था जिसमें आईएएस अफसरों और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है. ये प्रतिवेदन पिछले साल का है.
लोकायुक्त प्रशासन ने पिछले साल 2131 परिवादों का निस्तारण किया है. कुल 55 प्रतिवेदन, संस्तुति और विशेष प्रतिवेदन सरकार को भेजे गए जिनमें चार आईएएस अधिकारियों के अलावा 10 नगर पालिका/नगर पंचायत अध्यक्ष और 93 लोक सेवकों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है.
लेकिन क्या आईएएस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी?? क्या कभी हुई भी है?? बड़े बड़े उदाहरण हमारे सामने हैं..



