गुरदीप सप्पल-
एक बार फिर 4 PM News का यूट्यूब चैनल मोदी सरकार ने बंद करवा दिया है। पिछले साल भी ऐसा ही किया था, तब संपादक संजय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से राहत पायी थी।
लेकिन बार बार अपनी अकूत पॉवर के ग़लत इस्तेमाल से मोदी सरकार हर वो आवाज़ दबाना चाहती है, जो उसके सुर में सुर न मिलाये।
सत्ता के ऐसे दुरुपयोग के ख़िलाफ़ कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं रहा जा सकता। जो अभिव्यक्ति की आज़ादी में यकीन रखते हैं, उन सभी को साथ आने की ज़रूरत है, एक दूसरे का हाथ थामने की ज़रूरत है।
डॉ आशुतोष वर्मा-
4PM के नेशनल चैनल को बंद करना ये साबित करता है कि सरकार स्वतंत्र मीडिया से भय खाती है।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है – स्वतंत्र और निर्भीक मीडिया। जब कोई सरकार आलोचना से डरने लगे, तो यह उसकी कमजोरी और विफलता का स्पष्ट संकेत होता है। ‘4 पीएम’ नेशनल एक ऐसा प्लेटफॉर्म था, जो बिना झुके, बिना डरे, जनता से जुड़े सवालों को उठाता था। उसका बंद होना केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का बंद होना नहीं, बल्कि सच बोलने वाली आवाज़ का दबाया जाना है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि सरकार जनमत और पत्रकारिता की स्वतंत्रता से डर रही है। जो मीडिया सत्ता की चापलूसी करे, वो सुरक्षित है, लेकिन जो सवाल पूछे, वह बंद किया जाता है। यह सीधे तौर पर संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
‘4 पीएम’ को बंद करना सरकार की नाकामी की सबसे बड़ी निशानी है, क्योंकि जब जवाब नहीं होते, तो आवाज़ें दबाई जाती हैं। लेकिन सवाल पूछने वालों की आवाज़ को कोई स्थायी रूप से नहीं दबा सकता।
4पीएम न्यूज के एक्स हैंडल का ट्वीट-
देश की गोदी मीडिया रेंग रही है, लेकिन 4PM तनकर खड़ा रहता है।
मोदी सरकार को ये बात चुभती है। यही वजह है कि मोदी सरकार, बार-बार नाकाम कोशिश करती है कि 4PM और संजय शर्मा की निडर पत्रकारिता को बंद करा दे।
एक बार फिर सरकार ने 4PM चैनल को बैन करा दिया है। लेकिन सरकार अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होगी। क्योंकि सच हमेशा ताकतवर था, है और रहेगा। सरकार को अपने फैसले वापस लेने होंगे।
संपादक संजय शर्मा को सुनिए…
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