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अग्निवीर पर संसद में सरकारी झूठ, पहले पन्ने से खबर गधे के सिर से सींग की तरह गायब!

संजय कुमार सिंह

आज की खबर यह होनी चाहिये थी विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी ने नीट पर चर्चा की मांग की जिसे सत्तारूढ़ दल ने स्वीकार नहीं किया। अपने पहले भाषण में अग्निवीर का मुद्दा उठाया जिसे सरकार ने गलत करार दिया पर राहुल गांधी अपने आरोप पर अड़े रहे। अखबारों में सरकारी पक्ष ही छपा तो कल रात में उन्होंने शहीद अग्निवीर के पिता का वीडियो जारी कर साबित कर दिया कि वे सही बोल रहे थे। आप जानते हैं कि अमर उजाला में खबर छपी थी, अग्निपथ पर राजनाथ से तकरार – रक्षा मंत्री बोले सदन को गुमराह न करें। इसमें कहा गया था कि बलिदान होने पर जवान के परिवार को एक करोड़ देने का प्रावधान है। खबर के अनुसार राहुल गांधी ने कहा था कि अग्निवीरों से यूज एंड थ्रो वाले मजदूर जैसा बर्ताव होता है। शहादत के बाद उन्हें कुछ नहीं मिलता। यहां यह दिलचस्प है कि राहुल गांधी ने जब हिन्दुओं के खिलाफ कुछ नहीं कहा तो उसे मुद्दा बनाने की कोशिश की गई। ऐसे में अग्निवीर के मामले में अगर गलत कहा होता तो ट्रोल सेना ने आसमान सिर पर उठा लिया होता। ऐसा नहीं हुआ मतलब राहुल गांधी गलत नहीं थे। राहुल गांधी ने वीडियो ट्वीट कर साबित कर दिया कि वास्तविकता क्या है। दुख की बात यह है कि अखबारों ने इसपर कोई स्टैंड नहीं लिया और चुप्पी साध गये। आज यह मामला पहले पन्ने पर है ही नहीं।

दूसरी ओर प्रधानमंत्री का प्रचार पूरा है और इसमें इस खबर को भी प्रमुखता नहीं मिली है कि हाथरस में सत्संग आयोजित करने वाले बाबा फरार हैं और घटना स्थल को साफ कर या गया है। इस खबर के रहते, अखबारों की लीड और सुर्खी है, जांच के आदेश। कुल मिलाकर, आज के अखबारों में मुख्य रूप से दो ही खबरें हैं – मणिपुर पर प्रधानमंत्री का भाषण और हाथरस कांड का फॉलोअप। एक खबर हेमंत सोरेन के फिर मुख्यमंत्री बनने की है पर उसे आज के समय में सामान्य या बिना स्वाद का माना जा सकता है। मणिपुर पर संसद में प्रधानमंत्री ने पहली बार विस्तार से कुछ बोला है तो यह महत्वपूर्ण है ही। अमर उजाला ने प्रशंसा में सिर्फ इसे परोसने की जगह लीड का शीर्षक लगाया है, संविधान पर बुलडोजर चलाने वालों के मुंह से उसकी रक्षा की बात शोभा नहीं देती है। अब तो सबको पता है कि संविधान की रक्षा के इंडिया गठबंधन के दावे के जवाब में प्रधानमंत्री ने 49 साल पुरानी इमरजेंसी को ढाल बनाया है और अमर उजाला लिख चुका है कि इमरजेंसी भाजपा की राजनीति है और इमरजेंसी के जरिये वह विपक्ष को घेरने की कोशिश कर रही है। आज की लीड के बाद हम मान सकते हैं कि अमर उजाला इसमें सरकार या प्रधानमंत्री का सहयोग कर रहा है। मेरे सात अखबारों में ऐसा शीर्षक आज सिर्फ अमर उजाला में है।

कई बार कहा जा चुका है कि इमरजेंसी का प्रावधान संविधान में है और विधिवत लागू किया गया था। कम से कम नोटबंदी की तरह किसी तानाशाह के फरमान की तरह तो नहीं ही था और ना ही तब रोज गोलपोस्ट बदलकर यह साबित किया गया था कि निर्णय बिना सोचे-समझे लिया गया है। इमरजेंसी में नेता और उनके परिवार ही परेशान हुए थे लेकिन नोटबंदी या अघोषित इमरजेंसी ने आम आदमी को परेशान किया है। जीएसटी लागू करने और अनुच्छेद 370 हटाने का तरीका भी कोई बहुत लोकतांत्रिक और आदर्श नहीं था। इसलिए इमरजेंसी को तानाशाही और मनमानी, अंधाधुंध गिरफारी आदि जो कहिये, यह संविधान विरोधी नहीं है। उसपर भी बुलडोजर तो तानाशाही का प्रतीक अब बना है। इमरजेंसी में तुर्कमान गेट पर बुलडोजर जरूर चला था लेकिन मनमानी और सरकारी आतंक फैलाने के लिए बुलडोजर नया है। इसलिए अमर उजाला के इस प्रयास का कोई लाभ नहीं होना है पर वह मेरा विषय नही है। नवोदय टाइम्स में यह तीन कॉलम में दो लाइन के शीर्षक के साथ सेकेंड लीड है। शीर्षक है, “मणिपुर में स्थिति सामान्य करने को प्रयासरत : मोदी”। इस खबर से साथ एक और शीर्षक है, नीट : पेपर लीक पर भी बोले प्रधानमंत्री।

इसके मुकाबले, अमर उजाला में विशालकाय लीड के बीच में एक शीर्षक है, मणिपुर में आग में घी डालने की कोशिश करने वाले को चेताया। ये अलग बात है कि आग में पानी डालने की कोशिश हुई या नहीं यह सूचना नहीं है और अगर हुई थी तो उसकी खबर नही दिखी। हालांकि, प्रधानमंत्री बोले ही अब हैं और द हिन्दू ने अपनी खबर में यही बताया है। शीर्षक है, मोदी ने कहा, मणिपुर में शांति के लिए  हम सबको राजनीति से ऊपर उठना चाहिये। मोदी की राजनीति अमर उजाला में दिख ही रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसपर लिखा है, प्रधानमंत्री ने विपक्ष से कहा, मणिपुर सामान्य होने की ओर लौट रहा है, आग में घी न डालें। हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है, मणिपुर आग में घी डालने वालों को  खारिज कर देगा : मोदी”। इंडियन एक्सप्रेस में यह दो कॉलम की लीड है। शीर्षक है, “हिंसा कम हुई है, शांति की उम्मीद है: मणिपुर पर प्रधानमंत्री”। उपशीर्षक है, गांधी परिवार पर निशाना साधा, कहा चुनाव में हार के लिए परिवार एक दलित को जिम्मेदार बना रहा है। इंडियन एक्सप्रेस में लीड के साथ एक खबर का शीर्षक है, मणिपुर ने प्रधानमंत्री आवास योजना के 5000 घर मांगे, सुरक्षा के लिए आवंटन बढ़ाने की मांग की।

कहने की जरूरत नहीं है कि इन सभी खबरों में कोई भी खबर ऐसी नहीं है जिसे यह जानने के लिए पढ़ा जाना चाहिये कि सरकार ने वहां शांति के लिए क्या किया है या जो किया है उसका क्या प्रभाव हुआ। किसी भी शीर्षक से ऐसा नहीं  लगता है। यह प्रधानमंत्री का दावा भर है जिसकी पुष्टि अखबार वाले नहीं करते हैं और इसका पता अग्निवीर के मामले में दावों और प्रतिदावों से चलता है। मणिपुर की हालत का पता द टेलीग्राफ की खबर से चलता है। यहां यह सेकेंड लीड है। इसका शीर्षक है, “मणिपुर की सरकार पर भरोसा नहीं है: एक कुकी के इलाज से इनकार पर सुप्रीम कोर्ट“। खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के एक कुकी अंडरट्रायल का इलाज असम में कराने का आदेश दिया है और कहा है कि उसे मणिपुर सरकार पर भरोसा नहीं है और यह भी कि उससे आवश्यक देखभाल से वंचित रखा गया क्योंकि वह एक विशेष समाज का है।

कहने की जरूरत नहीं है कि इस खबर से मणिपुर सरकार के स्तर पर राज्य की स्थिति का पता चलता है। द हिन्दू की खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा है, इतिहास से पता चलता है कि राज्य में सामाजिक तनाव की जड़ें गहरी हैं। यही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि राज्य में करीब 11,000 एफआईआर हुई हैं और अभी तक 500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आप जानते हैं कि मणिपुर 14 महीने से हिंसा की चपेट में है और अगर अभी तक 500 गिरफ्तारियां ही हुई हैं तो रोज एक से कुछ ज्यादा का औसत बनता है जबकि एफआईआर 11,000 हैं और 22 एफआईआर पर एक गिरफ्तारी का औसत बैठता है। इससे आप समझ सकते हैं कि हिंसा रोकने के लिए सरकार ने क्या किया है और इन आंकड़ों का क्या मतलब है। पहले की खबरों के अनुसार करीब 300 चर्च जलाये गये हैं। अगर उनकी एफआईआर भी इनमें है एक चर्च जलाने के लिए कितने लोग गिरफ्तार किये गये? प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि 1993 में राज्य में ऐसी ही हिंसा हुई थी और वह 10 साल चला था। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में राज्य में 10 बार राष्ट्रपति शासन लगा है। हमलोगों ने ऐसे तरीके नहीं अपनाये हैं।

आप जानते हैं कि विपक्ष राजयसभा से वाकआउट कर गया था और पंजाब केसरी की कल की खबर के अनुसार कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने इसका कारण यह बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झूठ बोल रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा-आरएसएस, जनसंघ और उनके “राजनीतिक पूर्वजों” ने भारतीय संविधान का कड़ा विरोध किया था। प्रधानमंत्री जब राज्य सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब दे रहे थे, तो विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसदों ने सदन से वाकआउट किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार भाजपा के पूर्व सहयोगी बीजू जनता दल ने भी वाकआउट किया। इसके बावजू प्रधानमंत्री ने कहा और टाइम्स ऑफ इंडिया ने उसे भी छापा है, विपक्ष के पास सच्चाई का सामना करने की हिम्मत नहीं है। अखबार ने लिखा है कि भाषण के दौरान सभापति जगदीप धनखड़ ने हस्तक्षेप की इजाजत नहीं दी इसलिए वाकआउट हुआ। नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार, धनखड़ अपने इस अपमान से दुखी हैं। खबर में यह नहीं लिखा है कि उन्होंने हस्तक्षेप की इजाजत नहीं दी पर उनकी बात लिखी है, धनखड़ ने विपक्ष के बहिर्गमन को दर्दनाक और पीड़ादायक करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सत्ता पक्ष की बात सुननी चाहिये। मैं इस कुर्सी पर बैठकर बहुत दुखी हूं। यहां मुझे राजनाथ सिंह की याद आती है कि उन्होंने सरकार के बचाव में अग्निवीर के मामले में झूठ बोला और मुद्दे को घुमाने की कोशिश की। पता नहीं वे अपनी कुर्सी से खुश हैं या परम खुश।

भगदड़ के सबूत के साथ भोले बाबा गायब

आज के अखबारों में हाथरस की भगदड़ का फॉलो अप है। इसकी खास बात है कि सत्संग का आयोजन करने वाले भोले बाबा और भगदड़ के सबूत गायब हैं। द टेलीग्राफ में आज यही लीड है और शीर्षक है, “लापता होने की कार्रवाई : भोले बाबा और भगदड़ के सबूत”। अखबार का फ्लैग शीर्षक है, छेड़छाड़ का 18 साल पुराना आरोप पुलिस की नौकरी से निलंबित किये जाने का कारण बना था। लखनऊ डेटलाइन से पीयूष श्रवास्तव की खबर इस प्रकार है, हाथरस में एक सत्संग में भगदड़ में मारे गए 121 श्रद्धालुओं के परिवार शोक मना रहे थे, वहीं स्वयंभू संत सूरज पाल उर्फ ​​भोले बाबा ने चुप रहने का फैसला किया और आयोजकों को फोरेंसिक टीम के आने से पहले घटनास्थल को साफ करने का मौका दिया गया। एक बयान में पाल ने जानमाल के नुकसान पर शोक जताते हुए बाबा ने दावा किया कि भगदड़ के पीछे “असामाजिक तत्व” थे। आगरा में उनके दो आगामी समागम अब अधिकारियों द्वारा रद्द कर दिए गए हैं। कासगंज जिले के बहादुरनगर गांव के मूल निवासी भोले बाबा, जिन्हें नारायण साकार विश्व हरि के नाम से भी जाना जाता है, सिकंदराराऊ के फुलराई गांव में तीन दिवसीय सत्संग आयोजित करने आए थे, जो मंगलवार को दुखद घटना के साथ समाप्त हो गया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि पाल उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल थे, लेकिन 18 साल पहले इटावा में एक महिला का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद, वे एक धार्मिक उपदेशक बन गये और जल्द ही उनके अनुयायियों की संख्या काफी बढ़ गई। चश्मदीदों ने बताया कि भक्तों ने घेराबंदी वाले क्षेत्र से बाहर निकलकर उपदेशक के पैर छूने और उस रंगोली से गुलाल लेने की कोशिश की, जिस पर बाबा कार्यक्रम के अंत में चले थे। भगदड़ इसी से मची। हालांकि, पाल के पैतृक गांव बहादुरनगर के निवासियों ने उनकी प्रशंसा की कि उन्होंने कभी किसी से कोई दान या चढ़ावा नहीं मांगा। शुरू में पाल अपने गांव में एक धाम में सत्संग आयोजित करते थे, लेकिन कार्यक्रमों में भीड़ बढ़ने के बाद उन्होंने इसे बंद कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि “भव्य धाम” आश्रम उनके भक्तों से मिले स्वैच्छिक दान से बनाया गया था। गांव की महिलाओं ने कहा कि पाल का आचरण “बहुत अच्छा” था और वह केवल भगवान से जुड़ी बातें ही करते थे।

इंडियन एक्सप्रेस में आज इस खबर का शीर्षक है, हाथरस के बाबा ने दावा किया था कि वे मरे को जिन्दा कर सकते हैं। सन 2000 में गिरफ्तार किये गये थे। अमर उजाला का शीर्षक है, रिटायर जज करेंगे हथरस कांड की जांच, योगी का साजिश से इनकार नहीं। मुख्यमंत्री ने घटना स्थल का दौरा किया और कहा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इन खबरों के साथ जो खबरें  हैं उनमें एक का शीर्षक है, एफआईआर में भोले बाबा का नाम नहीं। दूसरी खबर है, प्राथमिकी में मुख्य सेवादार मुख्य आरोपी। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, हाथरस में मरने वाले 121 हुए,तो पहली एफआईआर में लापता भोले बाबा का नाम नहीं है। द हिन्दू में यह खबर तीन कॉलम में है। शीर्षक है, हाथरस भगदड़ में मरने वाले 121 हुए; आयोजकों ने असामाजिक तत्वों पर आरोप लगाया। मेरा मानना है कि ये असामाजिक तत्व किसी और धर्म के तो होंगे नहीं। होते तो डबल इंजन सरकार में हिन्दुओं को कैसे सुरक्षा मिल रही है कि पहले पता नहीं चला और अगर हिन्दू ही हैं तो सरकार कैसी है कि हिन्दुओं के सत्संग में हिन्दू ही भगदड़ मचा देते हैं और 121 लोग मर जाते हैं। जाहिर है, हिन्दुत्व की सरकार का दावा खोखला है, जनता को इससे कोई फायदा नहीं है और इस आड़ में एक अक्षम व अयोग्य सरकार सत्ता पर कब्जा जमाये हुए है। मीडिया भी उसका साथ देता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की खबर का शीर्षक है, आयोजकों ने घायलों को नरअंदाज किया, सबूत मिटाने में व्यस्त देखे गये। नवोदय टाइम्स में आज यह खबर लीड है। शीर्षक है, हाथरस न्यायिक जांच के आदेश। मृतकों में यूपी के 16 जिलों के अलावा 3 राज्यों के भी लोग। इसके साथ एक और खबर का शीर्षक है, 40 टीमें भी नहीं ढूंढ़ पाईं बाबा को।    

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