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आज के अखबार : ‘नामुमकिन मुमकिन है’, साबित करने वाली कई खबरें हैं और उनकी विशिष्टता भी!

संजय कुमार सिंह

आज नामुमकिन मुमकिन है साबित करने वाली कई खबरें अलग-अलग अखबारों में हैं लेकिन सब की अपनी विशिष्टता है और बहुत कम खबरें हैं जो सभी अखबारों के पहले पन्ने पर वैसे हैं जैसे कल उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद का फॉलोअप सभी अखबारों में पहले पन्ने पर था ही। आज नवोदय टाइम्स में छपी खबर के अनुसार, धनखड़ से आवास खाली कराया, सील किया, सोशल मीडिया टीम को हटाया। खबर में बताया गया है कि सोमवार रात इस्तीफा देने के बाद से ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सामान समेटना शुरू कर दिया था। देर शाम पता चला कि वीपी कार्यालय को सील कर दिया गया है। अमर उजाला में खबर है, सामान हो रहा है पैक आवास खाली करेंगे। अखबार ने लिखा है, नियमानुसार धनखड़ को लुटियन जोन में टाइप 8 का बंगला मिलेगा। सूत्रों ने बताया आवास खाली होते ही धनखड़ उपराष्ट्रपति एनक्लेव छोड़ देंगे। अगर ऐसा है तो नवोदय टाइम्स की खबर गलत है और अगर नियमानुसार (सरकारी) बंगला मिलना है तो बंगला आवंटित हुए बगैर उपराष्ट्रपति एनक्लेव खाली कराने का कोई मतलब नहीं है। यह नामुमकिन को मुमकिन करने वाली आज की पहली खबर है।  

दूसरी खबर उपराष्ट्रपति और उनके इस्तीफे से ही संबंधित और आज हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी है। इस खबर के अनुसार, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिये विपक्ष प्रायोजित नोटिस की प्राप्ति सूचना दी थी। इसके बाद कम से कम दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने पूर्व उपराष्ट्रपति से संपर्क किया और इनमें से एक ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री ने इस कदम को अस्वीकार किया है। पर 74 साल के उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे सदन के नियमों के अनुसार काम कर रहे थे। अखबार को यह जानकारी मामले की सूचना रखने वाले लोगों ने दी है। खबर के अनुसार राज्यसभा में उपराष्ट्रपति के बोलने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्य सभा में नेता जेपी नड्डा ने और केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को धनखड़ से बात की। इसमें बाकी सब ठीक हो तो भी उपराष्ट्रपति की किसी कार्रवाई का प्रधानमंत्री द्वारा मंजूर नहीं किया जाना और उसे उपराष्ट्रपति को सूचित किया जाना नामुमकिन का मुमकिन होना है। जेपी नड्डा ने उसी दिन राज्य सभा में कहा था, Nothing will go on record.. (आप लोग जो बोलेंगे वो रिकॉर्ड में नहीं जायेगा) Only what I say will go on record! (केवल मैं जो बोलूंगा वही रिकॉर्ड में जाएगा…।) आपको मालूम होना चाहिए। राज्यसभा की कार्यवाही को जानने समझने वाला कोई भी कहेगा कि ऐसा कहने का अधिकार उस दिन सिर्फ सभापति यानी जगदीप धनखड़ को था। हालांकि वे भी ऐसा कर नहीं सकते थे और जो रिकार्ड में नहीं जायेगा उसका कारण तो होना ही चाहिये और बिना कहे नहीं कहा जा सकता है आप कुछ भी कहें, रिकार्ड में नहीं जायेगा।

दस साल से फर्जी दूतावास

आज की तीसरी नामुमकिन को मुमकिन करने वाली खबर डबल इंजन वाले गाजियाबाद की है और अमर उजाला में लीड है। खबर के अनुसार गाजियाबाद के पॉश कविनगर मोहल्ले में किराये की एक कोठी में वेस्ट आर्कटिका, सेबोरेगा, पॉल्विया और लोडोनिया का फर्जी दूतावास चल रहा था। दुनिया में कहीं ये देश होते तो इनका दूतावास असली या फर्जी हो सकता था। पर ये देश हैं ही नहीं और इनका दूतावास चल रहा था। महीने, दो महीने से नहीं, कोई 10 साल से। फर्जी दूतावास चलाने वाला हर्षवर्धन वीजा व नौकरी दिलाने के नाम से लोगों से ठगी करता था और छिप कर नहीं, खुलेआम करता था। अस्तित्वहीन देशों के फर्जी दूतावास से करता था जहां वह सब कुछ उपलब्ध था जो एक फर्जी दूतावास चलाने के लिए जरूरी हैं। इनमें चार महंगी विदेशी गाड़ियां, 18 राजनयिक नंबर प्लेट, 44.70 लाख रुपये की भारतीय व विदेशी मुद्रा शामिल है। वैसे तो आप साधारण कार भी खरीदें और भुगतान खाते से करें या कर्ज लें तो सब सूचना सरकार और सरकारी विभागों को होती है और विवरण खगाले ही जाते हैं। विदेशी कारों के मामले में यह सब गंभीरता से और आवश्यक तौर पर किया जाना चाहिये। आम लोगों के मामले में तो किया ही जाता है। 15 साल से पुरानी गाड़ियों को जब्त करने के लिए पहचान लिया जा सकता है लेकिन फर्जी राजनयिक नंबर प्लेट वाली गाड़ियां 10 साल नहीं पहचानी गईं तो कई मामले हैं जो नामुमकिन का मुमकिन होना है।

इससे पहले गाजियाबाद पुलिस ने 13 मार्च 2025 को एक प्रो. केएस राणा को गिरफ्तार किया था। उसने खुद को ओमान का हाई कमिश्नर बताकर वीआईपी प्रोटोकॉल की मांग की थी। इससे पहले वह सपरिवार वृन्दावन गया था जहां उसे एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनाया गया था। प्रो. राणा गये साल इंडिया जीसीसी ट्रेड काउंसिल नामक एनजीओ से जुड़ा था। 2015 में आंबेडकर विश्वविद्यालय  आगरा से सेवानिवृत्त होने बाद उत्तराखंड और राजस्थान की चार यूनिवर्सिटी में कुलपति रह चुका था और उस समय दिल्ली में रह रहा था। पुलिस ने तब कहा था  कि प्रो. राणा का निजी सचिव विवेक उसे ओमान का हाई कमिश्नर बताकर प्रोटोकॉल देने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखता था, जबकि वह एक एनजीओ से जुड़ा हुआ था। खुद को जीजीसी (गल्फ कंट्रीज काउंसिल) बताकर वीआईपी प्रोटोकॉल लेता था। प्रो. राणा ने अपनी मर्सिडीज कार पर दूतावास वाली नंबर प्लेट लगा रखी थी। जांच करने पर पता चला कि वह लीबिया के राजदूत की गाड़ी का नंबर है। पुलिस को चाहिये कि वह इस बात की जांच करे कि दोनों मामले पूरी तरह अलग हैं या इनमें कोई संबंध है।

बूम बॉक्स की चपेट में दिल्ली

आज की चौथी नामुमकिन को मुमकिन करने वाली खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में है। इस खबर के साथ जिस फोटो का उपयोग किया गया है वही दि एशियन एज में भी है। खबर बताती है कि कांवड़ के कारण देश की राजधानी बूम बॉक्स की चपेट में रही। इसके अलावा, पैदल चलते कांवड़ियों के कारण दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे जाम रहने की खबर है। सरकारी प्रोत्साहन, संरक्षण और प्रचार के कारण कावंड़ियों की संख्या बढ़ गई है और खबर है कि पिछले साल के 4 करोड़ 14 लाख की जगह इस साल साढ़े चार करोड़ कावंड़िये हरिद्वार पहुंचे। तस्वीर से साफ है और वैसे भी सड़कों पर दिखता है कि कावड़ियों के लिए व्यवस्था नहीं के बराबर है। कायदे से उनके लिए लेन अलग किया जाना चाहिये जो बुनियादी जरूरत है। सरकार इसपर ध्यान नहीं दे रही होती तो अलग बात थी। नामुमकिन मुमकिन होना यह है कि भारी और तेज यातायात के बीच कावड़ियों के चलने से न सिर्फ उन्हें बल्कि वाहन चालकों को भी परेशानी होती है, मौत और दुर्घटनाओं से लेकर विवाद होता है पर सरकार यही सुनिश्चित करने में लगी है कि वे मुसलमानों से खरीद कर कुछ खायें तो उन्हें पता हो। उनकी कई दूसरी जरूरतों और सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया जबकि उनपर फूल बरसाये जाते हैं और इस साल तो गाजियाबाद में पुलिस वर्दी में कांवड़ियों के पैर दबाने की भी खबर रही। 

विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर)

द हिन्दू की लीड के अनुसार बिहार के 15 लाख मतदाताओं ने अभी तक फॉर्म नहीं जमा कराये हैं। दूसरी ओर, खबर है कि बहुत सारे लोगों के फॉर्म जमा कराये बगैर ही लोगों की जानकारी अपडेट और अपलोड की जा चुकी है। ऐसे में 15 लाख वोटर रह कैसे गये – यह सवाल तो होना ही चाहिये। दूसरी ओर जब बीएलओ को घर जाकर फॉर्म भरवाना था तब फॉर्म नहीं भरे जाने का कारण बीएलओ का उन तक नहीं जाना है या कुछ और। वैसे, संभावना यह भी हो सकती है कि वे अपने पुराने पते पर नहीं रहते हों और इसलिए फॉर्म नहीं भरा गया हो। पर खबर के अनुसार, ऐसे वोटर की संख्या एक लाख ही है जिनका पता नहीं चला। फॉर्म देने की अंतिम तारीख कल है और बिहार के कुल करीब आठ करोड़ वोटर में 15 लाख का फॉर्म नहीं आना वैसे भी बहुत ज्यादा नहीं है। दूसरी ओर, देशबन्धु की खबर के अनुसार कांग्रेस सांसद और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है, एसआईआर एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। मैं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश हो रहा हूं, इसलिये मैं इसपर ज्यादा नहीं कहूंगा। अगर आप सिर्फ कागजी दस्तावेजो के आधार पर कहते हैं कि सभी लोगों का नामांकन हो गया तो यह सही नहीं है। यह भी खबर है कि जनता दल यूनाइटेड के बांका, बिहार के सांसद गिरधारी यादव ने कहा है कि जो दस्तावेज मांगे गये हैं उन्हें एकत्र करने में उन्हें 10 दिन लग गये और इसमें खर्च तो हो ही रहा है। राज्य की गरीबी को देखते हुए हुए यह संख्या मुझे तो बहुत ज्यादा नहीं लग रही है और संभव है कि बहुत सारे लोगों ने गरीबी के कारण आवदेन नहीं करने का निर्णय किया हो या चाहकर भी आवेदन नहीं कर पाये हों। चुनाव आयोग का रवैया सबका नामांकन करने का रहा भी नहीं। इसके बावजूद, यह खबर चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति से बनी हुई है और ढेर सारे अनुत्तरित सवाल होने के बावजूद इसका लीड होना नामुमकिन को मुमकिन करना है।      

शव देने में गड़बड़ी

टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड के अनुसार पिछले दिनों अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना में मरने वालों के शव परिवार को देने में गड़बड़ी हुई है। इस आशय की खबर पहले डेली मेल में छप चुकी है। इसके आधार पर भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि मृतकों की पहचान स्थापित प्रक्रिया और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार की गई थी। अगर ब्रिटेन भेजे गये शव गलत हैं और उसकी शिकायत है तो जाहिर है सही शव या अवशेष दूसरों को भेज दिये गये होंगे जिन्होने अपना समझ कर उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया होगा। यह काम चाहे जितना मुश्किल हो और चाहे जिन नियमों के अनुसार किया गया हो, ऐसी गड़बड़ी तो छोड़िये, शंका भी नहीं होनी चाहिये थी और हो गई तो यह नामुमकिन का मुमकिन होना है। 

न्यायमूर्ति वर्मा मामले में जल्दबाजी

इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी लीड के अनुसार, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। संसद के दोनों सदनों के सभापति मिलकर एक वैधानिक समिति बनायेंगे जो उन कारणों की जांच करेगी जिनपर जज को हटाने की मांग की जा रही है। खबर के अनुसार इस मामले में ओम बिरला और हरिवंश की बैठक हो चुकी है जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। यह चर्चा उसी दिन हुई जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक पीठ का गठन करेगा जो न्यायमूर्ति वर्मा की अपील पर सुनवाई करेगा। न्यायामूर्ति वर्मा ने उस जांच समिति की कानूनी वैधता को चुनौती दी है जिसने दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक निवास से बेहिसाब नकदी बरामद होने के आरोपों की पुष्टि की है। इससे पहले राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार की शाम अचानक इस्तीफा दे दिया है। इस संबंध में पहले की खबर थी कि न्यायमूर्ति वर्मा के मामले में विपक्ष के नोटिस को स्वीकार किया जाना सरकार को बुरा लगा था। सरकारी सूत्रों ने कहा कि इससे ‘भ्रम’ पैदा हुआ था क्योंकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लोकसभा के 145 सांसदों के दस्तखत से ऐसा ही एक नोटिस मिल चुका था। इसके कई घंटे बाद राज्यसभा में धनखड़ ने विपक्ष के नोटिस की चर्चा की थी।

संसद में अगर न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की जल्दी है, इंडियन एक्सप्रेस में उसकी खबर भी है तो देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, लगातार तीसरे दिन भी नहीं चल लोकसभा। यह खबर किसी और अखबार में इतनी प्रमुखता से नहीं है और यह भी नामुमकिन का मुमकिन होना है। इसके साथ एक खबर का शीर्षक है, राज्यसभा में भी एसआईआर पर रार बढ़ी। देशबन्धु की लीड का उपशीर्षक है, बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रकिया को वापस लेने की मांग को लेकर विपक्ष का विरोध जारी। आज के अखबारों में यह खबर तो इतनी प्रमुखता से नहीं ही है लेकिन जो खबर प्रमुखता से है उसका शीर्षक है, संसद के दोनों सदनो में ऑपरेशन सिन्दूर पर 16-16 घंटे की चर्चा होगी। मुझे लगता है कि इसकी मांग थी और घोषणा हो गई है तो यह खबर अभी उतनी बड़ी नहीं है जितनी बड़ी चर्चा के बाद हो सकती है। इसके मुकाबले बिहार में एफआईआर को वापस लेने की मांग ज्यादा महत्वपूर्ण है। खासकर तब जब लोकसभा नहीं चल पा रही है।

रामनाथ ठाकुर सबसे आगे

उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद आज जब यह खबर कई अखबारों में है कि चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है तो नवोदय टाइम्स में यह खबर है कि रामनाथ ठाकुर इस पद के लिए उम्मीदवारों की दौड़ में सबसे आगे हैं। अखबार ने लिखा है कि यह फैसला कुछ ही दिनों में हो जायेगा हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ब्रिटेन और मालदीव से वापस आने के बाद होगा। खबर के अनुसार राम नाथ ठाकुर पिछले लोक सभा चुनाव से पहले भारत रत्न से सम्मानित बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं और भाजपा के कार्यवाहक अध्यक्ष तथा केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा उनके घर जाकर उनसे मिल चुके हैं। इस तरह नवोदय टाइम्स ने एक नाम की अटकल तो लगाई, दूसरे अखबारों में इसपर कुछ नहीं है और यह अकारण नहीं है। आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे फैसले लगभग अकेले अंतिम समय में संभवतः अकेले ही लेते रहे हैं और इसलिये ऐसे अनुमान लगाने का रिवाज नहीं है। ऐसे में अखबार ने दूसरा नाम दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना का भी सुझाया है और कहा है कि राम नाथ ठाकुर को आगे माना जा रहा है। आज के समय में यह अनुमान भी नामुमकिन का मुमकिन होना है और अगर सही रहा तो कोई बात ही नहीं है।

देशभक्ति की स्थिति

द टेलीग्राफ ने राहुल गांधी के बयान, ट्रम्प के दावों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी संदिग्ध है – को सेकेंड लीड बनाया है। विपक्ष के नेता के बयानों को इन दिनों जब महत्व नहीं दिया जाता है तब इसे इतनी प्रमुखता से छापना भी नामुमकिन मुमकिन होना है। यह खबर नवोदय टाइम्स में चार कॉलम के शीर्षक, ‘ट्रम्प ने किया 25 बार दावा, मोदी चुप, दाल में काला’ के साथ है और इसके साथ सिंगल कॉलम की खबर है, खुद को देशभक्त कहने वाले भाग खड़े हुए। यह प्रधानमंत्री पर कटाक्ष है लकिन खबर यह भी है कि भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह भी नामुमकिन को मुमकिन करने वाला मामला है। मोदी राज के पहले शायद ही कोई मंत्री ऐसी टिप्पणी करता और अगर करता तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती तथा कार्रवाई के लिये सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान नहीं लेता और किसी को याचिका दायर करनी पड़ती।

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