राजद के जंगल राज पर आरोप और अपने राम राज्य या अमृत काल पर कान फाड़ू सन्नाटा
संजय कुमार सिंह
बिहार में पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार का कल अंतिम दिन था। चुनाव प्रचार खत्म होने की खबर दिल्ली के अखबारों में पहले पन्ने की खबर नहीं हो सकती थी लेकिन सरकार का चुनाव प्रचार तो दिल्ली से ही हो रहा है और कंट्रोल रूम दिल्ली में ही लग रहा है। इसलिए मामला थोड़ा अलग है। अमर उजाला और देशबन्धु के साथ अंग्रेजी के हिन्दुस्तान टाइम्स में भी चुनाव प्रचार खत्म होने की खबर लीड है। दि एशियन एज और आगे है, उसने प्रधानमंत्री के चुनाव प्रचार को लीड बनाया है और इसका शीर्षक है, एनडीए की बड़ी जीत होगी, जंगल राज वाली पार्टियों का सूपड़ा साफ होगा। यह खबर नई दिल्ली डेटलाइन से है और नहीं लिखा है कि यह बात उन्होंने कहां, किसी रैली या सभा में कही। खबर के अनुसार, मेरा बूथ सबसे मजबूत कार्यक्रम के भाग के रूप में भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं से बात करते हुए (कहां, नहीं लिखा है) मोदी ने जोर देकर कहा, एनडीए की सरकार बनना पक्का है। जंगल राज वालों को सबसे करारी हाल मिलेगी। बेशक प्रधान प्रचारक ऐसा कह सकते हैं लेकिन जिससे भी कहें उसे पूछना चाहिए या बिना पूछे भी प्रधानसेवक को बताना चाहिए कि ऐसा आप किस आधार या दम पर कह रहे हैं। द टेलीग्राफ में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में एसआईआर के विरोध की खबर लीड है और शीर्षक है, एसआईआर के पहले दिन डी (तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक और पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी यानी दीदी) की लड़ाई सड़कों पर। खबर के साथ ममता बनर्जी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन की तस्वीर है जबकि द्रमुक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। नवोदय टाइम्स और द हिन्दू की लीड एसआईआऱ शुरू होने की खबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया है कि खेतों में पराली जलाने के सबसे खास मौके पर दिल्ली के प्रमुख एयर मोनिटर ने काम नहीं किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड भी वायु प्रदूषण पर ही है। इसके अनुसार, देश के सबसे प्रदूषित 10 शहरों में में सभी दिल्ली और एनसीआर के हैं। सब में डबल इंजन की सरकार है।
हमें आज की खबरों को इन तथ्यों के आलोक में देखना चाहिए कि छठ पर 12 हजार विशेष ट्रेन चलाने की खबर ने अगर नुकसान नहीं किया हो तो फायदा नहीं ही हुआ होगा। दिल्ली में छठ करके देश के ‘पहले’ (या सच्चे कह जाने वाले) हिन्दू प्रधानमंत्री द्वारा छठ करके वोट लूटने की कोशिश को भी कामयाबी नहीं मिली। ऐसे में खबर यही हो सकती थी कि चुनाव प्रचार खत्म। लेकिन कल कुछ खास बातें हुईं। केंद्रीय मंत्री ने अपने समर्थकों को ऐसी सीख दी कि बिहार का जंगल राज उजागर हो गया, उन पर एफआईआर हो गई और यह बड़ी खबर है। एनडीए के महत्वपूर्ण साथी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को छह सीटें मिली हैं। सरकार समर्थक हम के एक उम्मीदवार के प्रचार लगी गाड़ी से शराब बरामद हुई। खबरों के अनुसार, गुरारू में इमामगंज से हम पार्टी की उम्मीदवार, दीपा मांझी का पोस्टर लगी गाड़ी से शराब बरामद हुई। प्रभात खबर ने चश्मदीद सामाजिक कार्यकर्ता मंटू यादव के हवाले से लिखा है रौना रेलवे फाटक बंद था और एक पिकअप से बाइक की हल्की टक्कर हो गयी। स्थानीय ग्रामीणों को पिकअप में अंग्रेजी शराब होने की सूचना मिली शराब की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गयी। हालात बिगड़ते देख पिकअप का चालक मौके से फरार हो गया। इसके बाद शराब लूटने की होड़ मच गयी। पोस्टर लगी गाड़ी में शराब देखकर लोग चौंक गये थे। पुलिस को सूचना देने से पहले ही भीड़ जुट गयी और लोग गाड़ी में रखी शराब की पेटियां निकालकर भागने लगे। पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही ग्रामीण बड़ी मात्रा में शराब लेकर फरार हो चुके थे। जब तक पुलिस बल ने मोर्चा संभाला, गाड़ी में बहुत कम शराब शेष बची थी। पुलिस को गाड़ी की तलाशी में केवल 17 कार्टन अंग्रेजी शराब ही बरामद हो पायी।
यह बिहार में अमृतकाल के दौरान ‘शुद्ध’ मतदाता सूची से कराए जाने वाले मतदान के लिए चुनाव प्रचार के अंतिम दिन की घटना है। चुनाव के समय शराब अपने आप में गलत है, बिहार में शराब बंदी है तो और गलत है, सत्तारूढ़ दल के समर्थक की पार्टी में होना न सिर्फ गलत है, अनैतिक भी है। हम पार्टी के मुखिया जीतन राम मांझी है, राजग कोटे से उन्हें छह सीटें मिली हैं। इमामगंज से जीतन राम ने अपनी बहू दीपा मांझी को उम्मीदवार बनाया है और इन्हीं के प्रचार वाहन से शराब बरामद होने की खबर पर आप क्या कहेंगे, आप ही तय कीजिए। बाराचट्टी से मांझी की समधन ज्योति देवी उम्मीदवार हैं और सिकंदरा से एक तीसरे उम्मीदवार का नाम प्रभुल्ल मांझी है। इससे पहले 24 अक्तूबर की खबर के अनुसार, हम ने 11 प्रमुख नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। राष्ट्रीय महासचिव राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से बृजभूषण शरण सिंह ने भी चुनाव प्रचार किया और प्रधानमंत्री की ही तरह अपने या अपनी पार्टी या उसके काम के बारे में नहीं बोलकर विपक्ष को ही कोसते रहे। उन्होंने कहा, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के बयानों को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधाते हुए कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे को या तो समझ नहीं है, या फिर वह हिंदी समझते ही नहीं हैं। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे जब भी बोलते हैं, जहर उगलते हैं। याद दिला दूं कि खरगे ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात की है और पूर्व गृहसचिव का 2013 में कहा वायरल है कि संघ के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
इन्हीं ने कल आरोप लगाया था कि बिहार में 62,000 करोड़ का घोटाला हुआ है। आपराधिक मामला दर्ज कर सीबीआई की जांच कराई जानी चाहिए। यह अदाणी को बिहार में पावर प्लांट लगाने के लिए जमीन दिए जाने से संबंधित है। मामला जो भी हो, एबीपी न्यूज ने इस खबर को डिलीट कर दिया। यह अकेले भाजपा नेता का मामला है या पूरे समूह की मिली-जुली कोशिश समझना मुश्किल है। ऐन मतदान के मौके पर भाजपा नेता बिहार की राजग सरकार पर ऐसा आरोप क्यों लगाएंगे और लगा दिया तो एबीपी ने डिलीट क्यों कर दिया और डिलीट कर दिया तो आरके सिंह ने अपने आरोप दोहराए कि नहीं, सोशल मीडिया पर लिखा या नहीं, यह सब सुशासन वाले बिहार में चर्चा का विषय नहीं है। चुनाव प्रचार समाप्त हुआ उसकी खबरों के साथ तो नहीं ही है, पहले पन्ने पर नहीं है। बिहार में चुनाव के समय सामान्य स्थिति और लेवल प्लेइंग फील्ड की बात होने की बजाय सरकार और सरकार समर्थक पार्टियों के इन कारनामों की खबर जरूर पहले पन्ने पर हो सकती थी। तब जरूरी था जब प्रधानमंत्री 1990 के जंगल राज 2004 के अपहरण की कहानी सुना चुके थे। अभी तो लोग शाहरुख खान के बेटे की गिरफ्तारी वसूली किए जाने के आरोपों का सच जानना चाहते हैं और सरकार ने उस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। खबर थी कि आर्यन को गिरफ्तार करने वाले अधिकारी, समीर वानखेड़े ने अभिनेता शाहरुख खान और गौरी खान की कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और अन्य के खिलाफ दो करोड़ रुपए की मानहानि का दावा करते हुए याचिका दाखिल की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। अगर यह मामला चलता तो कहा जा सकता था कि विवाद अधिकारी से संबंधित है। इसलिए ऐसा मुकदमा करना जरूरी समझा गया होगा जो अदालत में टिका ही नहीं। वैसे भी किसी अधिकारी की क्या हैसियत कि वह ऐसे काम करे? खासकर तब जब प्रधानमंत्री ‘ना खाउंगा, ना खाने दूंगा’ कह चुके हों। वैसे भी अपहरण औऱ वसूली तो पुराना धंधा है, 2004 में होता था पर क्या अब सरकारी अधिकारी वसूली के लिए गिरफ्तार करते हैं? जहां तक अपहरण और वसूली की बात है, ना खाउंगा, ना खाने दूंगा, इलेक्टोरल बांड और मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के दाग नहीं होने के बावजूद डबल इंजन वाले उत्तर प्रदेश में हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार एक डिप्टी एसपी को 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जुटाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लड़कों को रोमांस करने के लिए पॉस्को के तहत जेल भेजा जा रहा है। और यूपी पुलिस का एक कांस्टेबल आरोप लगाने के 22 साल बाद भी यह साबित नहीं कर पाया कि तीन लोगों ने उसकी हत्या की कोशिश की थी। इस हालत में प्रधानमंत्री बिहार के जंगल राज को याद करते रहे, मीडिया के लिए यह मुद्दा नहीं है। प्रधानमंत्री के लिए तो नहीं ही है। हां वे 2025 में 1990 की बात करें तो पहले पन्ने की खबर जरूर बनती है। (जारी)
आगे पढ़ें – केंद्रीय मंत्री का प्रचार और रेल दुर्घटना की खबर संयोग हो या प्रयोग काम की मुश्किलें बता रही है
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मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


