हेडलाइन मैनेजमेंट संयोग और प्रयोग में उलझ गया। रेल दुर्घटना को ऐक्ट ऑफ गॉड भी मानें तो आखिर भगवान नाराज क्यों हैं? या खुशी में कर रहे हैं?
आज के अखबार – दो
संजय कुमार सिंह
इन तथ्यों के आलोक में कल जो सब हुआ उसे बताने से पहले आप जानते हैं कि चुनाव प्रचार में भाजपा का काम नहीं लालू यादव का जंगल राज मुद्दा था। वोट बटोरने के लिए शुरू की गई ऑपरेशन सिन्दूर जैसी तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं तो आज के लिए हेडलाइन मैनेजमेंट भी किया जाना होगा। क्या हुआ, हुआ या नहीं या कितना हुआ – मैं नहीं जानता। अखबारों और सोशल मीडिया की खबरों से पता चलता है कि भाजपा राज में उभरे एक प्रचारक चैनल ने पूर्व रेल मंत्री का वीडियो जारी किया जिसमें दिखाया गया है कि मंत्री हवाई अड्डे पर भी काम करते हैं। अव्वल तो तमाम वीआईपी अंतिम समय में एयरपोर्ट पहुंचते हैं, इनके कारण फ्लाइट लेट उड़ने की भी खबरें रही हैं और व्यस्त मंत्री के लिए इतना तो किया ही जाना चाहिए। यह कतई उचित नहीं है कि किसी केंद्रीय मंत्री को आम आदमी की तरह हवाई अड्डे पर बोर्डिंग का इंतजार करना पड़े। इस वीआईपी व्यवस्था का विरोध भी नहीं है। दूसरी ओर, मंत्री के काम कौन नहीं जानता है और कौन नहीं देख रहा है। बात सिर्फ काम की नहीं शतरंज के मोहरे की तरह इधर-उधर और किसी भी समय हटा दिए जाने की भी है पर अभी वह मुद्दा नहीं है। देश में आम आदमी के लिए सुविधाओं और पारदर्शिता का जो हाल है उसमें मंत्री का ‘काम’ क्या होगा समझना मुश्किल नहीं है। वैसे भी, खबर वह होती है जो छिपाई जाए, इसमें खबर क्या है? एजंसी के साथ प्रचार का ठेका हो और करार पर दस्तखत हो रहे हों तो जरूर खबर हो सकती है। पर ऐसा बताया नहीं गया था।
देश में जो व्यवस्था है, बिहार में चुनाव जिन स्थितियों और प्रचार के बीच हो रहा है उसमें कल चुनाव प्रचार के अंतिम दिन जो हुआ उसे हाल तक तो संयोग ही कहा जाता था लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा था, संयोग हो या प्रयोग और अगर सनातनियों के लिए सब कुछ ईश्वर ही करता है तो संभव है ईश्वर प्रयोग भी करता हो कल का रेल हादसा इसीलिए हुआ हो। ऐसे में तथ्य है कि केंद्रीय मंत्री का प्रचार जो देखने में प्रचार के ठेके पर दस्तखत करने जैसा भी लग रहा है। उसे खबर नहीं बनाकर उनके व्यस्त रहने को खबर बनाया गया और इस प्रचार को बेअसर करने के लिए रेल दुर्घटना हो गई। यहां तक तो मामला संयोग और प्रयोग का है लेकिन अखबारों में आज रेलवे की खबर के मामले में प्रयास और लापरवाही भी है। प्रयास यह कि इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर तीन-तीन कॉलम की एक जैसी फोटो छपी है जो बता रही कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बिहार जाने वाली ट्रेन में सवार होने के लिए दसियों हजार लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। बिहार में पहले चरण का मतदान कल यानी 6 नवंबर को है और तस्वीर कल यानी चार नवंबर की है और बताया जा रहा है कि ये लोग वोट देने के लिए बिहार जा रहे हैं। मुझे नहीं लगता है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली से वोट डालने बिहार जाते होंगे। देशभक्ति का मामला गर्माने से पहले ऐसा बिल्कुल नहीं होता था। कोई चुनाव के पहले चला गया, वोट भी डाल आया तो बात अलग थी। देशभक्ति का मामला गर्माने के बाद भी देश भक्त लोग ही जाएंगे।
चुनाव चोरी पर अपनी प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने दिखाया कि भाजपा के बहुत सारे वोटर कई राज्यों में हैं और जाहिर है वे वोट देने जाते होंगे। लेकिन अभी हाल तक प्रचार यह हो रहा था कि छठ के लिए भीड़ है क्योंकि लोग वोट देने भी जाना चाह रहे हैं। मेरा सवाल है कि जो छठ में नहीं गया वह अब सिर्फ वोट देने जा रहा है और अगर हां तो नई दिल्ली से बिहार के लिए चलने वाली राजधानी जैसी ट्रेन से जाने के लिए यह भीड़ जुटी है? वरना पुरानी खबर है कि दिल्ली से पूर्व की ट्रेन आनंद विहार से जाती है। राजधानी, शताब्दी जैसी ट्रेन अपवाद है। छठ के पहले मैंने आनंद विहार स्टेशन पर भीड़ और एक साथ पांच-छह ट्रेन खड़ी देखा है। वह विशेष व्यवस्था होगी और छठ के लिए की गई होगी। अब अगर भीड़ है तो क्या इसका अनुमान नहीं था। क्या पहले भी मतदान के लिए लोग ऐसे जाते रहे हैं, ऐसी कोई खबर मैंने पहले तो नहीं पढ़ी। इस बार अगर लोग जा रहे हैं तो विवरण क्यों नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस ने कैप्शन में लिखा है कि भीड़ पश्चिम बंगाल जाने वालों की भी है जहां एसआईआर शुरू हो गया। अखबारों की लापरवाही यह है कि मरने वालों की संख्या छह से लेकर आठ बताई गई है। घायलों की संख्या भी 14, 17 से करीब 20 तक बताई गई है। एएनआई ने आज सुबह 11 लोगों के मरने की खबर दी है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि मरने वालों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की खबर है और एक भी कम ज्यादा होने से 10 लाख रुपये इधर-उधर हो सकते हैं और जब देश में भ्रष्ट सरकार होती थी तो 500 रुपए की रिश्वत लेने के भी मुकदमे चले हैं, सजा हुई है। अब 10 लाख तो नकद दे दिए जाते हैं बिना यह बताये कि मरने वाले कितने थे। खासकर इसलिए कि रेलवे ने दुर्घटना के समय ना बाद भी कभी यह बताता है कि असल में कितने मरे, कितना मुआवजा कैसे दिया गया। सरकार भ्रष्टाचार नहीं करती है और व्यवस्था ठीक की गई है तो जरूर बताना चाहिए और इतने सारे प्रचारकों ने नहीं बताया तो आप समझ सकते हैं कि रेल मंत्री व्यस्त रहते हैं तो काम क्या होता है या कुछ और रेल मंत्री के पद होने चाहिए। रेल मंत्रियों को भिन्न हिस्सों का जिम्मेदार होना चाहिए। कुल मिलाकर, इस सरकार का काम केवल प्रचार से चल रहा है और और जितनी भी हैं, ज्यादातर प्रचार हैं। पत्रकारिता का नियम यही है कि जो छिपाया जाए वही खबर है जो बताया जाए वह प्रचार है।
इस लिहाज से द टेलीग्राफ की एक खबर, उत्तर प्रदेश के 11 हवाई अड्डे बंद ही खबर है। हालांकि, यह भी पूर्व घोषित है, मुझे पहले से पता है। दिलचस्प यह कि क्षेत्रीय संपर्क की यह योजना उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) नाम से शुरू की गई थी और हवाई चप्पल वालों को हवाई यात्रा करने लायक बनाने के प्रचार का भाग थी। कहने की जरूरत नहीं है कि भारी चर्चा के बाद सरकार ने अब प्रेस विज्ञप्ति जारी की है और जिन अखबारों ने इसे पहले नहीं छापा उन्होंने अब भी नहीं छापा है क्योंकि खबर पुरानी हो गई भले सरकार का ‘प्रचार’ ही है। खबर के खास अंश इस प्रकार हैं – बहुत सारे हवाई अड्डों का उद्घाटन खूब धूम-धाम से हुआ है। सरकार के अनुसार, देश में 126 नागरिक हवाई अड्डे चालू हैं। 11 अन्य हवाई अड्डों पर उड़ान संचालन, जो सभी उड़ान योजना के तहत खोले गए थे, विभिन्न कारणों से निलंबित कर दिए गए हैं – कुछ 2023 से और कुछ 2024 से। सरकार की एक मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और श्रावस्ती, गुजरात के भावनगर, पंजाब के लुधियाना और सिक्किम के पाकयोंग में हवाई अड्डों पर परिचालन 26 अक्टूबर 2025 से 28 मार्च, 2026 तक प्रभावी शीतकालीन कार्यक्रम के लिए निलंबित कर दिया गया है। इन सात के अलावा, द टेलीग्राफ को कई हवाई अड्डे के स्रोतों से पता चला है कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, आजमगढ़ और सहारनपुर और मध्य प्रदेश के रीवा में भी उड़ान सेवाएं बंद कर दी गई हैं। अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती के हवाई अड्डे उन हवाई अड्डों में शामिल थे जिनका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2024 के आम चुनाव से पहले किया था। कुशीनगर हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाली आखिरी उड़ान 7 नवंबर, 2023 को थी। आजमगढ़ के लिए यह 23 नवंबर, 2024 थी; अलीगढ़ के लिए, अप्रैल 2025; चित्रकूट, 16 दिसंबर, 2024; मुरादाबाद, नवंबर 2023; श्रावस्ती, दिसंबर 2024; और लुधियाना, 27 सितंबर। सहारनपुर हवाई अड्डे पर कभी भी किसी भी उड़ान के उतरने या उड़ान भरने का कोई डेटा सार्वजनिक डोमेन में नहीं है। (समाप्त)
इससे पहले का अंश – प्रचार बंद होने के बाद हेडलाइन मैनेजमेंट, उसका असर, संयोग और ऐक्ट ऑफ गॉड! पढ़ें।
लिंक – https://www.bhadas4media.com/prachar-band-hone-ke-baad-headline-management/
लेखक संजय कुमार सिंह से [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।


