रजत शर्मा पत्रकार नहीं, एक सफल एंटरटेनर हैं… (संदर्भ: आपकी अदालत के 21 साल)

‘आपकी अदालत’ के 21 साल पूरे होने पर रजत शर्मा द्वारा आयोजित महामहोत्सव पर मैंने कुछ नहीं लिखा, इस बात की कई लोगों ने मेल करके शिकायत की है. कुछ साथियों ने फैक्टशीट भी भेजी है इस महाउत्सव को लेकर. आज सोच रहा हूं लिख ही डालूं क्योंकि न लिखने के पीछे जो मूल कारण था, इस महाउत्सव की कवरेज को न देख पाना, उससे कल निजात पा गया. कल एक साथी के घर पर इंडिया टीवी खुला तो वहां पर महाउत्सव की पुरानी रिकार्डिंग आ रही थी, कुछ उसी तरह जैसे कभी एक खास एंटरटेनमेंट चैनल खोल लो तो कामेडी विथ कपिल का पुराना एपिसोड चालू दिखेगा, या कोई दूसरा एंटरटेनमेंट चैनल खोल लो तो सावधान इंडिया की साजिशें उदघाटित होती मिलेंगी.

‘आपकी अदालत’ के 21 साल होने के मेगा इवेंट यानि महा आयोजन की रिकार्डिंग पहली बार जब कल इंडिया टीवी पर देख रहा था तो उसी कार्यक्रम में आमिर खान ने रजत शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि ”आप यूं ही सबको एंटरटेन करते रहें”.

मैं ‘एंटरटेन’ शब्द पर अटक गया.

अटका तो बहुत सारे शब्दों पर. जैसे शाहरूख ने बताया कि ”ये रजत शर्मा फिल्म वालों का खूब प्रमोशन करते हैं”.

तो, आपकी अदालत द्वारा प्रमोशन और एंटरटेनमेंट का जो 21 साल लंबा पुराना सिलसिला चला आ रहा है, उस पर अगर आप पत्रकारीय लिहाज से लिखने बैठेंगे तो क्या लिख पाएंगे, यह भी एक बड़ा सवाल है. कुछ वैसे ही जैसे ‘कामेडी विथ कपिल’ के 11 साल होने पर कोई ग्रैंड महोत्सव हो तो उस पर क्या लिखा जा सकता है. यही सब लिखा जाएगा कि बहुत बड़े-बड़े लोग आए और खूब मस्ती आई छाई प्रोग्राम में. पर रजत शर्मा और कपिल शर्मा में बड़ा हैं. रजत शर्मा पत्रकारिता और सरोकार के नाम की खाते हैं तो कपिल शर्मा विशुद्ध एंटरटेनमेंट करके कमाते हैं. ऐसे में दोनों को एक ही तराजू पर तौल कर रखना देखना पाप होगा.

एक साथ ने मेल करके मुझसे पूछा है कि– ”यशवंत जी, बालीवुड के तीन खानों के साथ रजत शर्मा के डान्स को बारे में क्या कहेंगे, क्या ये सब शोभा देता है एक पत्रकार को. मुझे विश्वास है कि आप इस विषय पर ज्यादा असरकारक लिख सकेंगे. तस्वीर भी भेज रहा हूं.”

एक दूसरे साथी ने फैक्टशीट मेल करते हुए प्वाइंटवाइज बताया है कि— ”What is the reason & meaning Rajat Sharma Show on the 21st year of his AAP Ki Adaalat. It should or such kind of functions are arranged after 100, 500, 1000 the episode or after 25th, 50th or after such period. Since Rajat Sharma is close to Modi so he was confident of PM’s participation in his function that is he only reason for the celebration of his function. If anyone else would be the PM then there is no possibility of such function by Sharma. Only Modi sympathisers were invited in the function whether they are politicians, business tycoons or film stars. Nitish Kumar was nowhere in sight in function. Only certain Congress Party leaders were invited while Sonia baiter Natwar Singh was among the invitees. None of the prominent Communist, Trinamool or Modi opposition leaders were in sight. It was like a film award ceremony as was witnessed. This was for the TRP of the programme. Since cricketers are away in Australia otherwise cricketers like Dhoni would share stage with film stars on the dais to enrich the TRP of the program.”

पहले तो दोनों साथियों को धन्यवाद कि उन्होंने इस सब्जेक्ट की तरफ मेरा निजी तौर पर ध्यान दिलाया.

रजत शर्मा की पत्रकारीय सोच-समझ के बारे में एक जमाने में आलोक तोमर लिखा करते थे, जमकर लिखा करते थे. वो लिंक अगर मिल जाएगा तो मैं नीचे उपलब्ध कराता हूं. मोटा मोटी मुझे जो रजत शर्मा के बारे में समझ में आता है वो ये कि इस शख्स ने पत्रकारिता के नाम पैसा खूब पैदा किया. पत्रकारिता को लायजनिंग, टीआरपी, पीआर का जरिया बनाया. पत्रकारिता के नाम पर मिली शोहरत, बढ़े कद के जरिए ताकतवर लोगों से मजबूत रिश्ते गांठे. और, आखिरकार पत्रकारिता का ही गला रेतकर यह शख्स आज यह बताने लगता है कि मेरे पिता जी ने कभी कहा था कि किसी दूसरे को देखने किसी तीसरे के घर जाने से बेहतर है कि कुछ ऐसा करो कि लोग तुझे टीवी पर देखें. रजत शर्मा से कोई पूछे कि उन्होंने ढेर सारा धन और खूब प्रसिद्धि हासिल करके क्या देश के सभी गरीब बच्चों के सपनों को पूरा कर दिया या खुद अपने सपने पूरे कर बाकी सबको डूब मरने को छोड़ दिया. जिस पत्रकारिता की डगर पर चलकर रजत शर्मा आज यहां तक पहुंचे हैं, उस पत्रकारिता का यह तकाजा था कि रजत शर्मा देश के हर गरीब बच्चे की आंखों में पल रहे सपने के पूरा होने में आ रही दिक्कतों को एक्सपोज करते और सत्ता-सिस्टम से मुकाबिल होते. यानि सत्ता-सिस्टम की पोल खोलकर वह असल जनपक्षधर पत्रकारिता करते और आम जन के समृद्ध सुखी स्वस्थ शिक्षित होने में बाधक बन रहे कारणों का खात्मा करते. पर शर्मा जी ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने अपनी कंपनी का टर्नओवर बढ़ाया. अपने चैनल की टीआरपी बढ़ाई. अपने पीआर और लायजनिंग को ग्लोबल कर दिया. इस तरह लकदक चकमक एक निजी साम्राज्य खड़ा कर लिया. मीडिया के ऐसे ‘नव साम्राज्यवादी’ केवल शर्मा जी ही नहीं हैं. बहुत सारे हैं. राजीव शुक्ला को ले लीजिए. ढेर सारे नाम मिलेंगे. अब तो मीडिया के माध्यम से साम्राज्य विस्तार की ताकत देख अंबानी तक इस विधा में पूरी क्षमता से कूद चुके हैं. ऐसे में रजत शर्मा का आपकी अदालत के 21 साल पूरे होने पर महाउत्सव करना और पीएम, राष्ट्रपति तक को इनवाइट कर लेना चौंकाता नहीं है.

सही लिखा इस साथी ने. महाजश्न 100 या 500 या 1000 एपिसोड पूरे होने पर किए जाते हैं, 21 साल पूरे होने पर नहीं. कायदे से तो 25 साल पर किया जाना चाहिए, अगर साल गिनकर आयोजन करना था. लेकिन रजत शर्मा थोड़ा जल्दी में हैं. उन्हें मोदी के पीएम बन जाने से जो ताकत उर्जा मिली है, वही मेन ड्राइविंग फोर्स बन गई है. इस उर्जा ताकत को दुनिया को दिखाना था ताकि उनके चैनल इंडिया टीवी का ब्रांड वैल्यू बढ़ जाए. रजत शर्मा पुराने संघी रहे हैं और छात्र दिनों में एबीवीपी से जुड़े रहे हैं. अरुण जेटली समेत नरेंद्र मोदी से रजत शर्मा का पुराना वैचारिक याराना किसी से छिपा नहीं है. नरेंद्र मोदी के लिए रजत शर्मा ने इंडिया टीवी के माध्यम से जो पत्रकारिता के सभी पैमानों-नैतिकताओं को ताक पर रखकर जो काम किया, जो एहसान किया, उसे भला नरेंद्र मोदी कैसे भुला सकते हैं. सो, नरेंद्र मोदी आए और रजत शर्मा के एहसान गिना कर उनका आभार भी व्यक्त कर गए.

कुल मिलाकर आज के बाजारू दौर में ताकतवरों की एकता ही सबसे बड़ा मंत्र है. इसीलिए ताकतवर और भ्रष्ट नौकरशाह के ताकतवर व भ्रष्ट मीडिया मालिक से रिश्ते होते हैं और ताकतवर व भ्रष्ट मीडिया मालिक अपनी जड़ों को मजबूती देने के लिए ताकतवर व भ्रष्ट नेताओं से उर्जा ग्रहण करता रहता है. अकूत पैसे और प्रसिद्धि से पागल खिलाड़ी और फिल्मी सितारों की मजबूरी है कि वह ताकतवर व भ्रष्ट नेताओं, मीडिया मालिकों और अफसरों की यश गान करें ताकि उनके निजी संकट (मसलन कर चोरी, पियक्कड़ी करके किसी को गाड़ी से कुचल देना, फिल्म रिलीज पर छूट, फिल्म शूटिंग में मदद, सेंसर बोर्ड से फिल्म पास कराने में सुविधा, अपराधियों से रक्षा आदि इत्यादि) के दिनों में यह ताकतवर व भ्रष्ट तिकड़ी काम आ सके. इन दिनों सब कुछ पैसे से तय हो रहा है. जज से लेकर अफसर तक की क्रीम जगह पर पोस्टिंग हो या खबर छापने से लेकर प्रमोट करने तक का मीडिया का खेल. हर जगह पैसा मेन सब्जेक्ट है. नेता और नौकरशाह अपने ताकत का पूरा का पूरा इस्तेमाल अधिक से अधिक धन कमाने इकट्ठा करने में करते रहते हैं. इस काले धन के जरिए चुनाव विचार आयोजन गिरोहबंदी का खेल पूरे ताकत से खेला जाता है जिसे नंगी पुंगी जनता टुकुर टुकुर निहारती रहती है और काले धन के इस या उस खेल का मौखिक नैतिक समर्थन कर देती है, बैलेट के जरिए. इस तरह फिर पैसे बनाने और ताकतवर लोगों की एकता जमाने का खेल अगले पांच सालों तक निर्बाध खेला जाता रहता है. हमारे आपके लिए हैं ढेर सारे मोरल ग्राउंड, नैतिक नियम, सुभाषितानि, संवेदना, मनुष्यता, संविधान, कानून आदि इत्यादि, पर उनके लिए कुछ नहीं है. क्योंकि वे सब ताकतवर लोग एक हैं और ताकतवर लोग अपनी सुविधा के हिसाब से नियमों में अपवाद खोज लेते हैं, एक दूसरे को मदद राहत देने के लिए. रजत शर्मा ताकतवरों के गिरोह का एक ऐसा ही मजबूत नाम है जो मीडिया और पत्रकारिता का टैग लगाकर उर्जा धन यश ग्रहण कर खुद का साम्राज्य दिनों दिन फैलाता रहेगा….

इस मौके पर रजत शर्मा के चैनल इंडिया टीवी की एंकर तनु शर्मा के साथ हुए घृणित घटनाक्रम को जरूर याद दिलाना चाहूंगा. वो लड़की तनु शर्मा अब भी न्याय नहीं पा सकी है. रजत शर्मा जैसे ताकतवरों के आगे तनु शर्मा जैसे आम घरों की लड़कियों को न्याय मिलना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव भी है. रजत शर्मा सच्चे पत्रकार होते तो तनु शर्मा की कहानी को अपने चैनल पर दिखाए होते और खुद रोए होते. रजत शर्मा सच्चे पत्रकार होते तो लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आपकी अदालत के नरेंद्र मोदी वाले एपिसोड की फिक्सिंग (उन दिनों रजत शर्मा के चैनल के संपादक कमर वहीद नक़वी इसी फिक्सिंग के कारण इस्तीफा देकर चले गए थे) के बारे में जरूर सच्चाई बताते दिखाते. दर्जनों ऐसे अपने चैनल, उनके घर के मामले हैं, जिन पर रजत शर्मा के बोल नहीं फूटते, रजत शर्मा की अदालत नहीं लगती. ये वो डार्क एरियाज हैं, काले धब्बे हैं, जिनका उल्लेख करके शायद रजत शर्मा अपने महोत्सव का मजा किरकिरा नहीं करना चाहते, सो नहीं किया. हां उन्होंने शेखी खूब बघारी. अपने चेहरे की चमक को लेकर, मिलने वाली धमकी को लेकर, आंख में आंसू आ जाने को लेकर, गरीबी को लेकर, ईमानदारी को लेकर, पत्रकारिता का लेकर….। रजत शर्मा शायद एक बात बताना भूल गए. वो ये कि उन्होंने अपने सिर के बाल करोड़ों रुपए खर्च करके और लंदन जाकर ट्रीटमेंट कराके दुबारा उगाए हैं ताकि उनकी निजी ब्रांड वैल्यू बनी रहे. सलमान खान, आमिर खान, शाहरूख खान जैसे एंटरटेनर भी यही सब करते हैं, चेहरे से लेकर बाल तक की लगातार सर्जरियां कराई जाती हैं ताकि उनकी फिल्में, उनके शोज हिट हो सकें… 

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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