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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ : जो वेबसाइट अस्तित्व में नहीं है वो भी विष्णुराज में माल कूट रही है!

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की एंपेनलमेंट व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि विभाग की सूची में ऐसे-ऐसे न्यूज़ पोर्टल शामिल कर लिए गए हैं जिनका ज़मीनी स्तर पर कोई अस्तित्व ही नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम पर सरकारी विज्ञापनों का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिन पोर्टलों को एंपेनलमेंट सूची में दर्शाया जा रहा है, उनमें से कुछ डोमेन खुले बाज़ार में बिक्री के लिए उपलब्ध बताए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, राज्य के छोटे और संसाधनहीन छत्तीसगढ़ी पत्रकार अपने पोर्टल को मान्यता दिलाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आरोप है कि कथित कमीशनखोरी के इस खेल में वही पोर्टल सूची से बाहर रखे जा रहे हैं जो “व्यवस्था” के मुताबिक चलने में असमर्थ हैं। जनसंपर्क विभाग के भीतर चल रही इस कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार ने पूरी प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।


छत्तीसगढ़ जनसंपर्क में कई ऐसे फ़र्ज़ी न्यूज़ पोर्टल एंपेनलमेंट हैं जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है, लेकिन पेमेंट बाकायदा निकल रहा है, जनसंपर्क की वेबसाइट में जा कर देखिए http://aapkanews.com जिसे एम्पेनलमेंट लिस्ट में बताया जा रहा है GoDaddy पर 995 डॉलर पर बिक रहा है,याने की इस न्यूज़ पोर्टल का कोई अस्तित्व ही नहीं है।लेकिन जनसंपर्क के बड़े बाबू रवि मित्तल की मेहरबानी से इसको लिस्ट में डाल दिया गया है,दूसरी तरफ़ ग़रीब छत्तीसगढ़ी पत्रकार अपने न्यूज़ पोर्टल के लिए चप्पल फटकारते घूम रहा है।पर वो कमीशन देने में असमर्थ है इसलिए उसके न्यूज़ पोर्टल का नाम एंपेनेलमेंट लिस्ट में नहीं है। कुणाल शुक्ला, आरटीआई एक्टिविस्ट

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