बाराबंकी। श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी के बाहर एलएलबी कोर्स की मान्यता की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे ABVP कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज का मामला गरमा गया है। इस घटना में लगभग दर्जनभर छात्र घायल हो गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने मामले की जांच अयोध्या रेंज के आईजी प्रवीण कुमार को सौंपी है।
कार्रवाई क्या हुई?
- सीओ सिटी हर्षित चौहान को हटाकर सीओ ऑफिस से सम्बद्ध किया गया।
- कोतवाली नगर के एसएचओ रामकिशन राणा और चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर किया गया।
- नगर कोतवाल को भी लाइन हाजिर किया गया।
- लाठीचार्ज में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन से सम्बद्ध कर दिया गया।
पूरा मामला क्या है यहां समझिए-
श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU) में एलएलबी कोर्स की मान्यता को लेकर हुए छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस लाठीचार्ज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कल हुए लाठीचार्ज में दर्जनभर से अधिक छात्र घायल हो गए थे, जिनमें कई के हाथ-पैर में पट्टियां बंधी देखी गईं।
छात्रों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन विवाद बढ़ने पर पुलिस ने अचानक बल प्रयोग किया। इस घटना से नाराज छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन व पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लाठीचार्ज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एबीवीपी ने आज सुबह 10 बजे विश्वविद्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यह लड़ाई केवल डिग्री की मान्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के उत्पीड़न, अनियमितताओं और मनमानी फीस वसूली के खिलाफ भी है।
एबीवीपी का कहना है कि जब तक छात्रों की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए लिखा है-
संजय प्रसाद पर ABVP का सीधा अटैक!! यूपी पुलिस के बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज से भड़की ABVP ने सीधा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव पर हमला बोल दिया है।
ABVP के हैंडल्स से योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद का पोस्टर जारी कर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
यहां तक कि ABVP के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही ने भी संजय प्रसाद का नाम लेकर उन पर गंभीर आरोप लगा दिए हैं।
संजय प्रसाद मुर्दाबाद का नारा लगाने वाला ये खुद बीजेपी का अपना विद्यार्थी संगठन है। संजय प्रसाद की SRMU यूनिवर्सिटी के संचालकों के साथ तस्वीर भी वायरल की जा रही है।
सवाल बड़ा सीधा सा है। क्या संजय प्रसाद के खिलाफ कोई जांच बिठाई जाएगी? क्या उन्हें पद से हटाया जाएगा?
रोम के महान सम्राट जूलियस सीजर आज से करीब 2600 साल पहले कह गए हैं कि “Caesar’s wife must be above suspicion”
यानि सीजर की पत्नी अर्थात सबसे करीबी व्यक्ति को सदैव संदेह से परे होना चाहिए।
जब मुख्यमंत्री के निकट बने रहने में संभवत: परछाई को भी मात देने वाले अफसर पर खुद बीजेपी का अपना संगठन ऐसे गंभीर आरोप लगा रहा है, तो क्या उस अधिकारी को अब भी अपने पद से चिपके रहना चाहिए?
या फिर नैतिकता के “थ्री पीस सूट” न सही, उसके रुमाल की ही लाज रखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए?
ABVP को NSUI का फुल सपोर्ट!




बड़ी ख़बर–
यूपी पुलिस के ‘बर्बर’ लाठीचार्ज में बुरी तरह घायल ABVP के कार्यकर्ताओं को NSUI ने दिया समर्थन।
लखनऊ के ट्रामा सेंटर में भर्ती ABVP के घायल कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए पहुंचे NSUI के छात्र।
दोनो ही छात्र संगठनों के बीच इस मुद्दे पर हुई सहदय बातचीत और मेलमिलाप की तस्वीर।
छात्र एकता की इस अद्भुत तस्वीर के बीच दूर कहीं नेपथ्य में प्रसिद्ध कवि कुंवर नारायण की कविता की लाइनें गूंज रहीं थीं-
‘कोई भी दुख
मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं
वही हारा जो लड़ा नहीं’


इस प्रकरण पर लखनऊ के पत्रकार मनीष पांडेय ने आईएएस संजय प्रसाद को लेकर क्या कुछ लिखा है पढ़िए…

यूपी की राजनीति में ये साफ़ दिखने लगा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सुनियोजित साजिशें रची जा रही हैं। पहले गोरखपुर में सीएम के विशेष कार्याधिकारी बल्लू राय पर हमला, और अब बाराबंकी की घटना का ठीकरा सीएम के सबसे भरोसेमंद अफसर प्रमुख सचिव संजय प्रसाद पर फोड़ने की कोशिश।
गोरखपुर में हमला पार्टी के ही विधायक के रिश्तेदार/ भाई करवाते हैं और बाराबंकी की घटना में पार्टी के ही कुछ नेता “रामस्वरूप यूनिवर्सिटी कनेक्शन” का झूठा राग अलापकर संजय प्रसाद को कठघरे में खड़ा करने लगते हैं। यह कोई साधारण इत्तेफाक़ नहीं, बल्कि साफ़ साज़िश है।
सच्चाई ये है कि संजय प्रसाद जैसे सुलझे हुए, ईमानदार और मस्तमौला अफसर योगी जी के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी काबिलियत और निष्पक्ष कार्यशैली की वजह से टिके हुए हैं। योगी जी के नज़दीक सिर्फ़ वही रह सकता है जो ईमानदार हो और जनता के लिए समर्पित हो। चापलूस और बेईमान लोग यहाँ दो दिन भी नहीं ठहर पाते।
“पंचम तल” से लेकर आज तक संजय जी के पास जितनी ताक़त रही है, अगर कोई और होता तो अब तक सत्ता के दम पर अपना साम्राज्य खड़ा कर चुका होता। लेकिन योगी जी ने ऐसे अफसरों को ही अपने पास रखा जो सिस्टम को साफ़ रखने में मददगार हों।
संगठन मंत्री और संजय प्रसाद को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें भी पूरी तरह से बकवास हैं। सच ये है कि संगठन मंत्री ने खुद फोन कर बाराबंकी घटना पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा था। उसी रात बातचीत हुई और अगले ही दिन सीएम की बैठक के बाद चौकी इंचार्ज से लेकर सीओ तक सब बदल दिए गए।
मतलब साफ़ है -आरोप लगाने वाले सिर्फ़ भ्रम फैलाना चाहते हैं। साजिशों और अफ़वाहों के दम पर योगी जी की टीम को तोड़ा नहीं जा सकता।
याद रखिए – झूठे आरोप लगाना आसान है, लेकिन सच हमेशा एक न एक दिन सामने आ ही जाता है। और ये भी तय है कि ऐसी घटिया राजनीतिक साजिशें कभी भी सफल नहीं होंगी।
प्रमुख सचिव संजय प्रसाद के बहाने मुख्यमंत्री योगी को निशाना बनाने की कोशिश – सुरेश बहादुर सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)
बाराबंकी में लाठी चार्ज के बाद आरोप संजय प्रसाद पर नहीं बल्कि उनके बहाने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है लेकिन यह साजिश सफल नहीं होगी। भाजपा के अंदरूनी राजनीति के कारण योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाने की साजिश रची जा रहीहै।
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और उत्तर प्रदेश के गृह सचिव संजय प्रसाद को व्यक्तिगत रूप से पिछले 25 सालों से जानता हूं, आज तक कभी उनके ऊपर कोई आरोप नहीं लगा।
संजय प्रसाद आज जो कुछ भी है अपनी काबिलियत के दम पर हैं ।धरना प्रदर्शनों पर हर सरकारों में लाठी चार्ज होती रही है।
जब आप धरना प्रदर्शन करते हैं तो हर चीज के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए के लिए बल प्रयोग करती है।पुलिस यह नहीं देखती कि आप किस संगठन के हैं, किस पार्टी के हैं और किस विचारधारा के हैं वह कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपना काम करती है।
ऐसा पहले भी होता रहा है।



