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अदाणी ग्रुप ने राजस्थान की सरकारी कंपनी से गलत तरीके से वसूले 1,400 करोड़ रुपये : जयपुर कोर्ट

जयपुर की एक जिला अदालत ने अपने जुलाई के फैसले में कहा है कि अदाणी समूह की अगुवाई वाली एक कोयला खनन कंपनी ने राजस्थान सरकार को 1,400 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुँचाया। अदालत ने पाया कि कंपनी ने राज्य सरकार से परिवहन शुल्क के नाम पर वह राशि वसूल की, जिसकी उसे कोई वैधानिक पात्रता नहीं थी।

फैसले के दौरान, राजस्थान सरकार ने अदालत में कहा कि वह कंपनी की “दबाव की रणनीति (arm-twisting)” के आगे “बहुत विनम्रता से” झुक गई, क्योंकि कोयले की आपूर्ति में कमी राज्य की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती थी। सरकार ने इसे “हमेशा वसूली करने वाली” कंपनी बताते हुए wrongful gain का आरोप लगाया।

https://twitter.com/supriyashrinate/status/1993211230308516281?s=48

स्क्रॉल डॉट कॉम में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने 5 जुलाई को दिए अपने फैसले में अदाणी-नेतृत्व वाली कंपनी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह कैग (CAG) से इस समझौते की विशेष ऑडिट कराने का अनुरोध करे। हालांकि, 13 दिन बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने इन निर्देशों पर स्टे दे दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

2007 में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) को छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य के घने जंगलों में स्थित पार्सा ईस्ट और केंते बसान कोयला ब्लॉक आवंटित हुआ, जिसमें 450 मिलियन टन से अधिक कोयला था।

इसके बाद वसुंधरा राजे सरकार के दौरान RRVUNL ने अदाणी एंटरप्राइजेज के साथ संयुक्त उद्यम (JV) बनाया। नई कंपनी Parsa Kente Collieries Ltd (PKCL) में आदाणी की 74% हिस्सेदारी थी और RRVUNL की 26%। इस व्यवस्था के तहत खनन और कोयला परिवहन का कार्य निजी कंपनी को शुल्क लेकर देना था।

कहाँ से शुरू हुआ विवाद?

मार्च 2013 में खनन शुरू हुआ, लेकिन उस समय खदान से नज़दीकी रेलवे लाइन तक कोई रेलवे साइडिंग नहीं थी, जिसे बनाना JV की ज़िम्मेदारी थी। इसलिए दोनों पक्षों ने अस्थायी रूप से कोयले को सड़क मार्ग से नज़दीकी स्टेशनों तक पहुँचाने का फैसला किया—यह अनुबंध में शामिल नहीं था।

अदालत के अनुसार:

रेलवे साइडिंग बनाने की ज़िम्मेदारी JV की थी, लेकिन वह इससे चूक गया। इसके बावजूद सड़क परिवहन का पूरा खर्च राज्य सरकार ने वहन किया—जो कुल मिलाकर 1,400 करोड़ रुपये से अधिक बैठा।

JV ने यह राशि ली और ऊपर से 65 करोड़ रुपये के ब्याज की भी मांग कर डाली, यह कहते हुए कि राज्य की देरी से भुगतान के कारण उसे बैंक से ऋण लेना पड़ा। RRVUNL ने 2018 में ब्याज देने से इनकार कर दिया। मामला 2020 में अदालत पहुँचा।

अदालत की कड़ी टिप्पणियाँ

अदाणी-नियंत्रित JV ने न तो मुख्य कोल माइनिंग एंड डिलीवरी एग्रीमेंट अदालत में जमा किया न बोर्ड मीटिंग के मिनट्स न वित्तीय रिकॉर्ड जिस पर कोर्ट ने इसे “half told story” और तथ्यों का चयनात्मक प्रस्तुतिकरण बताया।

अदालत ने कहा:

  • JV ने रेलवे साइडिंग न बनाकर अनुबंध का उल्लंघन किया
  • फिर भी उसने सड़क परिवहन का पूरा खर्च वसूला
  • और ऊपर से ब्याज भी माँग रहा था
  • “कोई भी अपने ही दोष से लाभ नहीं उठा सकता।”

आगे क्या?

अदालत ने कंपनी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और CAG ऑडिट का निर्देश दिया। लेकिन 18 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक (स्टे) लगा दी।

Scroll ने इस संबंध में आदाणी एंटरप्राइजेज और RRVUNL से जवाब मांगा है; जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।

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