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उत्तर प्रदेश

न्यूज़ चैनल मालिक अखिलेश दुबे का ‘गैंगचार्ट’ तैयार, रावण वध के बाद सार्वजनिक होने के संकेत

कयास लगाए जा रहे हैं कि विजयदशमी के दिन रावण वध के बाद साकेत दरबार का गैंगचार्ट भी सार्वजनिक किया जाएगा। इसी के साथ गिरोह से जुड़े सभी शस्त्र लाइसेंस रद्द कराने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। संभावित सूची में आका के अलावा नौ ब्राह्मण और दो यादव शागिर्दों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। चार्ट की अंतिम पंक्ति में उस पत्रकार का जिक्र है, जिसे दरबार का “वसूली का ब्रह्मास्त्र” कहा जाता है…

कानपुर। साकेत इलाके में सक्रिय बताए जा रहे अपराधी गिरोह के संबंध में पुलिस ने व्यापक जांच कर ली है और उसके संभावित सदस्यों का एक गैंगचार्ट तैयार किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस सूची में कुल 12 लोगों के नाम हैं — जिनमें गिरोह का आका शामिल है; सूत्रों के अनुसार इन 12 में से 10 को ब्राह्मण और 2 को यादव बताया गया है। ये पहचानें फिलहाल पुलिस जांच और चार्टशीट के आधार पर की गई हैं।

पुलिस ने बताया कि साकेत दरबार के खिलाफ दर्ज शिकायतों और दो लंबित मामलों की पड़ताल के बाद शागिर्दों व सहयोगियों की क्रिमिनल प्रोफाइलें फाइलों में सुरक्षित कर ली गई हैं। अब जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर उन व्यक्तियों के असलहा लाइसेंस रद्द कराए जाने की औपचारिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके तहत पंजाब पुलिस को भी उनके वहां जारी लाइसेंसों के निरस्तीकरण के लिए पत्र भेजने की योजना है।

गिरोह संरचना पर पुलिस के दावे

पुलिस सूत्रों के मुताबिक तैयार गैंगचार्ट में आका को मास्टरमाइंड बताया गया है। चार्ट में दूसरे व तीसरे स्थान पर आका के सहयोगियों/भाईयों के नाम हैं। चौथा-पाँचवां स्थान बाप–बेटे की जोड़ी का है जिन्हें शिकार तलाशने और उनसे रिश्तेदारी के आधार पर काम करने का आरोप है। छठवें और सातवें नंबर पर सगे भाइयों के नाम दर्ज हैं जिन पर धमकाने व मारपीट के आरोप हैं। आठवें व नौवें का संबंध यादव वंश से बतलाया जा रहा है। एक नाम ऐसे व्यक्ति का भी सामने आया है जिस पर “विषकन्याओं” (सप्लाई) से जुड़े आरोप लगते हैं। सूची के अंत में कुछ ऐसे चेहरे हैं जिनके खिलाफ जमीन कब्जा और वक्फ जमीन से संबंधित मामले भी दर्ज हैं। खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि गिरोह में वसूली का काम करने वाले एक पत्रकार से जुड़ी चर्चाएँ हैं; इस तरह के दावों की भी पुलिस पड़ताल कर रही है।

हथियार लाइसेंसों की तहकीकात और इतिहास

पुलिस को प्रारंभिक छानबीन में दुबे परिवार के पास डेढ़ दर्जन से अधिक लाइसेंसी हथियारों के प्रमाण मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार अखिलेश द्वितीय व उनके भाइयों, परिवार की महिलाओं तथा कुछ बच्चों के नामों पर डबल-बैरल और रिवॉल्वर के लाइसेंस जारी रहे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 2 अगस्त 1984 को लुधियाना से रिवॉल्वर के लिए लाइसेंस संख्या 262 जारी हुआ था, जबकि उसी वर्ष 1 फरवरी को कानपुर से लाइसेंस संख्या 105 के जरिए डबल-बैरल बंदूक खरीदी गई थी।

सूत्रों का कहना है कि दुबे परिवार कभी पंजाब में स्थायी तौर पर नहीं रहा, फिर भी वहां दर्ज फर्जी पते व तत्कालीन अफसरों की मिलीभगत के चलते उस दौर में लाइसेंस जारी किए गए। पुलिस अब उसी लाइन पर वेरिफिकेशन कर रही है और पंजाब के संबंधित शहरों — लुधियाना व जालंधर — में जारी लाइसेंसों की तत्सम जानकारी मांगने की तैयारी है।

अगले कदम और प्रशासनिक कार्रवाई

पुलिस ने कहा है कि शिकायतों, चार्टशीट व मौजूदा मुकदमों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने हेतु जिला प्रशासन को पत्र भेजा जाएगा। इसके साथ ही पंजाब पुलिस को भी उनके पते व लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करने कहा जाएगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने व लोगों में भय पैदा करने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक बताई जा रही है।

पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि अभी तक सभी आरोप अनसुलझे हैं और जिन लोगों के नाम गैंगचार्ट में शामिल किए गए हैं, उनकी जिम्मेदारी तय करने के लिए शिनाख्त व सबूतों की आगे और जांच जारी रहेगी।

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