कानपुर। उम्मीद थी कि, पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के तबादले के बाद खौफ का साम्राज्य फिर कायम होगा, लेकिन पीड़ितों की साझा बैठक ने अरमानों पर पानी फेर दिया। नतीजे में साकेत दरबार का आका बौखलाया हुआ है।
बैठक के अगले दिन पेशी पर अदालत आए अखिलेश की झल्लाहट नजर भी आई, जब मीडिया ने उसे तस्वीरों में कैद करना चाहा तो मीडिया को धमकाते हुए कहा कि, “एक-एक को आईडेंटीफाई कर रहा हूं।”
इस बीच, कोतवाली में अधिवक्ता संदीप शुक्ला द्वारा दर्ज एफआईआर में सेशन कोर्ट से जमानत मिलने के बाद विवेचक ने दो धाराएं बढ़ाने का हवाला देते हुए न्यायिक हिरासत मांगी थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
दरअसल, शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने संदीप शुक्ला की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में दो धाराएं बढ़ाने की बात कहते हुए अखिलेश और सह-आरोपी महिला की न्यायिक हिरासत मांगी थी। इसी मामले में अखिलेश को सीजेएम कोर्ट में तलब किया गया था। पेशी पर आते ही डीएम ऑफिस के बाहर वैन रुकी और मीडिया के कैमरे चमकने लगे तो अखिलेश ने मीडिया की मौजूदगी में बाहर निकलने से इंकार कर दिया। अखिलेश झल्लाते हुए पुलिस से बोला कि, पहले इन्हें हटाओ तब वैन से उतरूंगा।
मीडियाकर्मी कुछ पीछे हुए तो अखिलेश दुबे वैन से उतरा और हाथ उठाकर मीडियाकर्मियों की ओर इशारा करते हुए बोला कि एक-एक को आईडेंटीफाई कर रहा हूं।
अखिलेश के इस अंदाज को धमकी मानते हुए पुलिस कमिश्नर को अवगत कराया गया है। इसके बाद सीजेएम कोर्ट में अभियोजन अधिकारी आराध्य मिश्रा ने बढ़ी धाराओं में दोनों की न्यायिक हिरासत मंजूर करने के लिए तर्क प्रस्तुत किये। सुनवाई के बाद कोर्ट ने बढ़ी हुई दोनों धाराओं में अखिलेश और सह-आरोपी महिला की न्यायिक हिरासत को 24 सितंबर तक के लिए मंजूर कर लिया।


कानपुर। साकेत नगर में पेंट कारोबारी की पत्नी ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उनके सहयोगियों पर पति और बेटे को झूठे मुकदमों में फंसाने का आरोप लगाते हुए 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने की शिकायत की है। महिला ने एसपीई कार्यालय में अपनी आपबीती सुनाई और देर रात तक होटल में तेज आवाज़ में डीजे बजाने को लेकर भी दुबे पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।
महिला ने कहा कि दुबे और उनके सहयोगी आए दिन धमकाते हैं और कहते हैं कि “यह मेरे आदमी हैं, दुकान इनके नाम कर दो।” शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी लगातार परिवार पर समझौते का दबाव बना रहे हैं।
पीड़िता की दलील:
- 2020 से विवाद जारी है, जिसमें कारोबारी परिवार को निशाना बनाया गया।
- पति व बेटे को जेल भेजने के बाद दुबे व सहयोगियों ने रंगदारी मांगने की कोशिश की।
- महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार झूठे मुकदमों में उलझाने की धमकी दी गई।
पुलिस की भूमिका:
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कुछ मामलों में मदद की, लेकिन अन्य विभागों ने लापरवाही दिखाई। पीड़ित परिवार का कहना है कि दुबे और उनके सहयोगियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही।
जमानत के बाद नए आरोप:
अखिलेश दुबे और सह-आरोपी महिला को जेल से जमानत मिलने के बाद उन पर और धाराएं बढ़ाई गई हैं। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
दु:शासन की सोच वाले रावण के खिलाफ शंखनाद
कानपुर। साकेत दरबार के मुख्य अभियुक्तों और पीड़ितों के बीच चल रहे विवाद को लेकर पीड़ितों ने साझा मंच बनाकर न्याय की लड़ाई को नई दिशा देने का ऐलान किया। गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में पीड़ितों ने एकजुट होकर कहा कि अब अन्याय और अत्याचार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष होगा।

पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ षड्यंत्र करके झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए और उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि रावण की तरह सोच रखने वालों के खिलाफ अब शंखनाद हो चुका है।
साझा मंच में शामिल वक्ताओं ने भावुक होकर अपने अनुभव साझा किए। इनमें नारी अस्मिता पर चोट करने की घटनाएं, झूठे मामलों में फंसाने की कहानियां और आर्थिक दोहन के आरोप प्रमुख रहे।
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