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झारखंड

मुन्ना के बाद अमन सिंह को जेल भीतर सुलटाने में माल कितना लगा? बताने का रूल बना दो माई बाप!

नबाद जेल के भीतर कल पिस्तौल से मर्डर हो गया. जिसका मर्डर हुआ वो कुख्यात माफिया अमन सिंह है. यूपी के अंबेडकर नगर के रहने वाले इस माफिया पर धनबाद के डिप्टी मेयर की हत्या कराने का भी आरोप था. खास बात ये है कि अमन सिंह बागपत जेल के अंदर मारे गये मुन्ना बजरंगी का खास था. जेल इतिहास की बात करें तो अब तक तमाम हत्याएं हुई हैं. लेकिन हत्या में पिस्तौल का इस्तेमाल वो भी जेल के अंदर बागपत के बाद अब धनबाद की जेल में हुआ है.

जेलों की सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, हम उठाएंगे उसमें कुछ नया नहीं है. नया ये है कि जेल में बीती 25 नवंबर को जिले के उपायुक्त ने तलाशी ली थी जिसके सात दिन बाद ही ये मर्डर हो गया. सूत्रों से मिली इस जानकारी को संदेह की नजर से देखते हुए जांच के घेरे में लिया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमन सिंह को सात गोलियां मारी गई हैं. जाहिर सी बात है हथियार पिस्टल से नीचे नहीं होगा. मैग्जीन भी हो सकती है. हालांकि अभी तक वीपन बरामद नहीं हुआ है.

मारा गया कुख्यात अमन सिंह का झारखंड के साथ-साथ यूपी व अन्य आस-पास के राज्यों में दबदबा था. बताते हैं कि जिस व्यापारी के पास रंगदारी के लिए उसका फोन जाता वो पैंट में मूत मारता था, ऐसा जलवादार था. इसलिए सवाल यही कि क्या उसकी दहशत उसके नेटवर्क को मिट्टी में मिलाने के लिए रास्ते से हटवाया गया? सुलटाने की एवज में माल कितना गला? अरे भाई नीचे से उपर तक ने मुँह बंद करने के लिए रूपया भी तो लिया होगा. क्योंकि आज के समय कोई ऐसा नहीं बचा जो खा म खा देश पर अहसान करे. बिना कीमत लिए दिये. इसका खुलासा बजरंगी कांड के बाद भी नहीं हुआ था, इस बार भी मुश्किल है. लेकिन ये गलत है. सरकार को एक रूल बनाना चाहिए कि ऐसे कांड करें-कराएं भले लेकिन इन पर हुए आय-व्यय का जिक्र भी जनता से करना चाहिए. आखिर सबके पेट है माई बाप. आप की तरह.!

खैर, जेल के भीतर ये बड़ी वारदात है जो खुद में चिंता पैदा करती है. अब भारत और राज्य सरकारों समेत जेल प्रशासन को भी जेलों से फर्जी पाबंदी हटा लेनी चाहिए. उस सुरक्षा और उसके दिखावे का क्या फायदा जो रूपयों से बिक जाए? इसके साथ ही देश में रंडीखाने बढ़ा देने चाहिए. कम से कम लोगों को मेहनत करके खाने की नजीर तो प्राप्त होगी. जेलों की सुरक्षा और उसके व्यय का आडंबर अब बंद होना चाहिए. सुरक्षा के नाम पर गरीब मजलूमों के परिवारों- मुलाकातियों को अर्दब में लेने वाले इस कांड के बाद चुल्लू में पानी लेकर शर्म कर सकते हैं. वो शर्म जो देश की अदालतों जेलों को 9 जुलाई 2018 को बागपत में मुन्ना बजरंगी शूटआउट के बाद आनी थी.

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