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इंटरव्यू

वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार का साक्षात्कार : रामनाथ गोयनका ने भेजा तो प्रभाष जोशी बोले- तीन माह तक मिलने के लिए टाइम नहीं!

“आज पत्रकारिता बहुत बदल गई है। पहले हम लोग अपने नाम अपनी बाइलाइन से जाने जाते थे, आज पत्रकार चेहरों से पहचाने जाते हैं।” इस जैसी तमाम रोचक बातें जाने माने पत्रकार अंबरीश कुमार जी ने भड़ास एडिटर यशवंत से हुई बातचीत में कहीं।

1987-88 की पत्रकारिता का दौर याद कर वरिष्ठ पत्रकार ने कहा- “वह छात्र आंदोलन का समय था, उस समय जेपी के सहयोगी थे शोभाकांत दास ने प्रस्ताव दिया चेन्नई (मद्रास) से एक मैगजीन निकालने का। उन्होंने मुझे भेजा रामनाथ गोयनका जी के पास।”

“रामनाथ गोयनका से सुंदरनगर गेस्ट हाउस दिल्ली में मिला मैं। उन्होंने प्रभाष जोशी के यहाँ भेजा मिलने के लिए। साथ ही कहा टेस्ट देना पड़ेगा। तो मैं गया प्रभाष जी अंदर अपने केबिन में बैठे थे। उन्होंने जवाब दिया कि “तीन महीने तक टाइम नहीं है मिलने का!”

इसके डेढ़ माह बाद प्रभाष जी का मेरे पास पत्र आया टेस्ट के लिए। उस समय हम सभी का टेस्ट हुआ, एक दो लोगों का नहीं भी हुआ, जिसमें हेमंत शर्मा का नाम भी शामिल था। टेस्ट दिया और करीब 87-88 का समय होगा जब मैंने जनसत्ता ज्वाइन किया। उसी दिन मेरा नवभारत में नक्सलियों को लेकर संपादकीय छपा….

वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार जी ने अपने रामगढ़ (नैनीताल) स्थित “राइटर्स कॉटेज” आवास पर बतकही के दौरान यशवंत से पत्रकारिता तब और अब क्या बदलाव हुआ, बिंदास तरह से एक संक्षिप्त पोस्टमार्टम किया है- बातचीत में उन्होंने रामनाथ गोयनका अवॉर्ड को लेकर भी कटाक्ष कर दिया है। आप भी यह पूरा वीडियो देखिए, सुनिए…

देखें अंबरीश जी का पूरा इंटरव्यू….

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