फर्रुखाबाद (यूपी)। जिले के कमालगंज क्षेत्र में एलपीजी सिलेंडर को लेकर कथित अफरा-तफरी का वीडियो साझा करने पर एक पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। नोएडा स्थित हिंदी खबर चैनल के रिपोर्टर Anubhav Mishra पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(1)(b) के तहत एफआईआर दर्ज की है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 मार्च को मिश्रा को कमालगंज की गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों के वीडियो एक स्थानीय स्ट्रिंगर से मिले, जिन्हें उन्होंने चैनल के व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किया। ये वीडियो मूल रूप से 11 मार्च को शूट किए गए थे। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर चैनल ने सोशल मीडिया पर गैस संकट को लेकर एक पोस्ट भी किया, जिसे बाद में हटा लिया गया।
पुलिस का कहना है कि वीडियो पुराने थे और 13 मार्च की स्थिति को गलत तरीके से पेश कर रहे थे। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और न ही किसी तरह का संकट है।
चैनल ने मानी ‘गलती’
हिंदी खबर के एडिटर-इन-चीफ Atul Agrawal ने इस पूरे मामले को “रिपोर्टर की चूक” बताया। उनके मुताबिक, वीडियो पुराना था और एक प्रशिक्षु द्वारा बिना पूरी जांच के ट्वीट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि बाद में आंतरिक जांच में पता चला कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम में दिक्कत के कारण लोग घबराकर एजेंसियों पर पहुंच रहे थे।
पत्रकार का पक्ष
वहीं रिपोर्टर अनुभव मिश्रा ने आरोपों से असहमति जताई है। उनका कहना है कि जिले की कई गैस एजेंसियों में लोगों को ओटीपी न मिलने, सर्वर फेल होने और केवाईसी जैसी समस्याओं के चलते परेशानी हो रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई तथ्यात्मक गलती थी तो नोटिस दिया जा सकता था, सीधे एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है।
प्रशासन का रुख
पुलिस और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौके पर कोई लंबी लाइन या संकट जैसी स्थिति नहीं मिली। उनके मुताबिक, कुछ लोग बिना पूरी प्रक्रिया के एजेंसी पहुंच गए थे, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।
उसी दिन हुई एक बुजुर्ग की मौत
इसी बीच 13 मार्च को 70 वर्षीय मुख्तियार अहमद की गैस एजेंसी के बाहर तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि उन्हें करीब दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा, जबकि प्रशासन इस दावे से इनकार कर रहा है।
जिला आपूर्ति अधिकारी का कहना है कि अधिक बुकिंग के कारण सर्वर प्रभावित हुआ था, लेकिन गैस की कोई कमी नहीं थी और होम डिलीवरी की व्यवस्था जारी थी।
बहस के केंद्र में ‘जमीनी हकीकत’
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह महज “अफवाह” थी या जमीनी स्तर पर मौजूद अव्यवस्थाओं को सामने लाने की कोशिश। एक ओर प्रशासन इसे भ्रामक सूचना बता रहा है, वहीं दूसरी ओर वीडियो और स्थानीय दावों के आधार पर सिस्टम में खामियों की बात भी उठ रही है।



