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आज के अखबार : अनुच्छेद 370 बहाली के प्रस्ताव को ‘पाकिस्तान का एजंडा’ कहना और मामले को छिपाना

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों में ट्रम्प की जीत की ही खबर है। यह चाहे जितनी बड़ी या महत्वपूर्ण हो भारत में, भारत के लिए भारत की खबर से महत्वपूर्ण नहीं हो सकती। फिर भी आज कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली का प्रस्ताव पास किये जाने की खबर मेरे आठ में से चार अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। इनमें इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द टेलीग्राफ और अमर उजाला शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर भरपूर विज्ञापन है लेकिन ट्रम्प की जीत पहले पन्ने पर है। प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई दी और इसपर एक्सप्रेस एक्सप्लेन्ड भी, पहले पन्ने पर है। मुख्य खबर के अलावा दोनों खबरों में से किसी को भी अंदर के पन्ने पर लेकर कश्मीर की खबर पहले पन्ने पर ली जा सकती थी पर नहीं ली गई है मतलब यह संपादकीय निर्णय या विवेक का मामला है और जगह की कमी का मामला नहीं है। बेशक, इसमें कुछ अनुचित नहीं है पर यह रेखांकित करने वाला मामला तो है ही। टाइम्स ऑफ इंडिया का जो एडिशन मेरे पास है उसमें पहले पन्ने पर कोई भी विज्ञापन नहीं है फिर भी कश्मीर विधानसभा में 370 की बहाली के लिए पास प्रस्ताव की खबर नहीं है। सिंगल कॉलम में अंदर होने की सूचना भी नहीं। जो खबरें हैं उनमें हाईकोर्ट ने यमुना में छठ करने की इजाजत नहीं दी, अतिक्रमण हटाने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का आदेश, शिक्षा के लिए कर्ज आदि जैसी खबरें हैं। अमर उजाला में भी यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। यहां जो बड़ी खबरें हैं उनमें राहुल गांधी की नागरिकता मामले में सीबीआई की जांच शुरू और विद्यार्थियों को 10 लाख तक का सस्ता कर्ज मिलेगा, प्रमुख है। द टेलीग्राफ में भी तीन खबरें हैं। इनमें मोदी की बधाई और जीत का विश्लेशण शामिल है। पर कश्मीर को विशेष दर्जा देने का प्रस्ताव विधानसभा में पास किये जाने की खबर पहले पन्ने पर नहीं है।     

नवोदय टाइम्स ने इसे पांच कॉलम में बॉटम बनाया है। मुख्य शीर्षक है, अनुच्छेद 370 बहाली का प्रस्ताव विधानसभा में पास। फ्लैग शीर्षक है, भाजपा विधायकों ने हंगामा किया, कहा – पाकिस्तान का एजंडा लागू नहीं होने देंगे। इसके साथ दो कॉलम का शीर्षक है, “क्या कहा गया है प्रस्ताव में”। आगे कहा गया है, यह विधानसभा विशेष दर्जे और संवैधानिक गारंटी के महत्व की पुष्टि करती है, जिसने जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा की और इनके एकतरफा हटाने पर चिंता व्यक्त करती है। यह विधानसभा भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर के लोगों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ विशेष दर्जे, संवैधानिक गारंटी की बहाली और इन प्रावधानों को बहाल करने के लिए संवैधानिक तंत्र बनाने तैयार करने के लिए बातचीत शुरू करने का आह्वान करती है।” प्रस्ताव के अंत में कहा गया है, “यह विधानसभा इस बात पर जोर देती है कि बहाली की किसी भी प्रक्रिया में राष्ट्रीय एकता और जम्मू कश्मीर के लोगों की वैध आकांक्षाओं की रक्षा होनी चाहिये।” खबर के अनुसार इसपर भाजपा सांसदों ने हंगामा किया औऱ कहा कि पाकिस्तान का एजेंडा लागू नहीं होने देंगें। यह अखबार का फ्लैग शीर्षक भी है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है। यहां शीर्षक में या हाईलाइट करके यह नहीं बताया गया है कि भाजपा ने क्या कहा। फोटो कैप्शन से जरूर पता चलता है कि इस दौरान विधानसभा में हंगामा हुआ। खबर में बताया गया है कि भाजपा के विधायकों ने दस्तावेज की कॉपी फाड़ दी।

द हिन्दू में यह खबर अमेरिका की खबर के नीचे चार कॉलम में छपी है। दो लाइन का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, जम्मू कश्मीर विधानसभा ने विशेष दर्जा बहाल करने, केंद्र से वार्ता शुरू करने के लिए प्रस्ताव पास किया। खबर के साथ विधानसभा की तस्वीर है जिसका कैप्शन है, जम्मू और कश्मीर विधानसभा, श्रीनगर में भाजपा के विधायक विशेष दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। दि एशियन एज में यह विज्ञापन और खबर के बीच तीन कॉलम का बॉटम है। शीर्षक है, “जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने विशेष दर्जे का प्रस्ताव पास किया; ‘पाकिस्तान का एजंडा’:भाजपा।” मुझे नहीं लगता कि विधानसभा में इस तरह का प्रस्ताव पास होना कुछ गलत है जबकि इससे यह तो पता चलता ही है कि जनभावना इसकी बहाली के पक्ष में भी है। इसके लिए बातचीत शुरू करने की अपील और तंत्र विकसित करने की जरूरत भी मांग को सामान्य तरीके से निपटाने की ओर बढ़ना है। कश्मीर में लगने वाले लोगों को विशेष दर्जा जरूरी लगता है तो यह वही तय करेंगे और अगर आप सहमत नहीं हैं तो बातचीत कीजिये, उन्हें संतुष्ट कर दीजिये या मना कर दीजिये। पाकिस्तान का एजेंडा कैसे हो गया? 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है। द टेलीग्राफ की खबर का तो शीर्षक ही है, विशेष दर्जा वाले प्रस्ताव में जम्मू व कश्मीर विधानसभा ने 370 का उल्लेख नहीं किया है। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर सरकार व राजनीति की खबरों के पन्ने पर है। इसका शीर्षक है, जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने विशेष दर्जा बहाल करने के लिए प्रस्ताव पास किया, वार्ता के पक्ष में। अमर उजाला में यह खबर देश-विदेश के पन्ने पर टॉप की खबर है। छह कॉलम की इस खबर का शीर्षक है, जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जे की बहाली का प्रस्ताव विधानसङा में पास, भाजपा का हंगामा। मूल खबर के सात दो कॉलम की खबर है, सदन में गूंजा जय श्रीराम का नाम… सदन स्थगित होने के बाद भी भाजपा सदस्य वेल में डटे रहे और उनके द्वारा 5 अगस्त जिन्दाबाद, जयश्रीराम, वंदे मातरम, देश विरोधी एजंडा नहीं चलेगा, जम्मू विरोधी एंजडा नहीं चलेगा और स्पीकर हाय-हाय जैसे नारे लगाते रहे। एक खबर भाजपा (विधानसभा) अध्यक्ष को घेरा शीर्षक से भी है। सबसे दिलचस्प खबर है, प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं है केंद्र। मुझे लगता है कि इसके बाद पाकिस्तान का एजेंडा और विरोध जैसी बातों का कोई मतलब नहीं है।

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