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महाराष्ट्र

अशोक खरात किसी भी वीडियो में महिला से जबरदस्ती नहीं कर रहा, सब कंसेंट से हो रहा है!

सौमित्र दुबे-

अशोक खरात के जो रोज़ नए-नए खुलासे हो रहे हैं उन्हें देख कर पढ़ कर स्तब्ध हूँ। उससे भी ज़्यादा हैरान मैं महिलाओं की नादानी पर हूँ, क्योंकि जितने भी वीडियो रील में घूम रहे हैं, उनमें से एक भी वीडियो में कोई फ़ोर्सफ़ुली काम नहीं किया गया है, सब कुछ महिलाओं के कंसेंट से हो रहा है।

बताया जाता है कि महिलाओं का शोषण करने से पहले खरात उन्हें कोई नशीला खारा तरल पदार्थ पीने को देता था, जिसे पीकर महिला को चक्कर आते थे। लेकिन वीडियो देख कर लगता है कि किसी भी महिला में चक्कर जैसे आने की संभावना नहीं दिख रही है क्योंकि उसके साथ जितना हो सकता है, उतना सहयोग करती नज़र आ रही है।

और जब ये महिलाओं को शुद्धिकरण के नाम पर केबिन के अंदर बुलाता था तो वो केबिन के झूमर की लाइट बंद कर देता था जिससे इसका बाहर बैठा स्टाफ समझ जाता था कि अब नो एंट्री का आदेश है। और स्टाफ को पता होता था कि लाइट बंद होने के दौरान खरात शुद्धिकरण के नाम पर महिला का शोषण कर रहा है।

कई महिलाओं का तो ये कई साल से लगातार यौन शोषण कर रहा था, उसी में से एक महिला ने इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और कहा कि तीन साल के दौरान खरात ने उसका कई बार रेप किया।

इसने सौ से भी ज्यादा महिलाओं का शोषण किया और अब सब शिकायत करने धीरे-धीरे आ रही हैं। लेकिन इतने साल से क्यों चुप थी?

कहा तो जाता है कि स्त्रियों की एक आँख सर के पीछे भी लगी होती है जो उनके पीछे भी कोई बुरी नज़र से देखता है तो उन्हें पता चल जाता है और इस मामले में सिक्स्थ सेंस स्त्रियों का काफ़ी एडवांस होता है। फिर यहाँ कैसे चूक हो गई?

एक्चुअली हम जो वीडियो देख रहे हैं वो कहानी का आख़िरी हिस्सा है, लेकिन कहानी की शुरुआत वहाँ से होती है जहाँ एक आदमी धीरे-धीरे भरोसा बनाता है, ऐसे लोग डायरेक्ट आपके साथ कुछ ग़लत नहीं करेंगे।

पहले वो आपके गुरु, मददगार, रक्षक बनते है, आपकी परेशानियाँ सुनते हैं, हल देते हैं, आपको यकीन दिलाते हैं कि मैं ही आपका सहारा हूँ। फिर धीरे-धीरे सामने वाले का दिमाग अपने कंट्रोल में ले लेते हैं।

ऊपर से अगर नशीला पदार्थ दे दिया जाए तो सिर्फ़ शरीर नहीं, दिमाग़ भी सुस्त हो जाता है। बार-बार ऐसा होने पर इंसान एक psychological dependency में फँस जाता है और धीरे-धीरे ना बोलने की क्षमता खो देता है। फिर जो दिखता है वो हमें कंसेंट लगता है। रही बात “sixth sense” की, वो तब तक काम करती है जब तक सामने वाला अजनबी होता है।

जिस दिन वही इंसान भरोसे का नक़ाब पहन कर आपके दिमाग़ और दिल के अंदर घुस जाता है, उसी दिन से यह सिक्स्थ sense काम करना बंद कर देता है। बस यही उन महिलाओं के साथ हुआ है, जिसे सब उनकी सहमति मान रहे हैं।

मूल खबर…

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