लखनऊ के पत्रकार आशुतोष बाजपेयी का निधन

नवेद शिकोह-

मौत से मुलाकात की दास्तान सुना कर चले गये आशुतोष बाजपेई

खाटी पत्रकार आशुतोष वाजपेई नहीं रहे। तीस बरस तक निरंतर पत्रकारिता की यात्रा में डेक्स वर्क के महारथी आशुतोष जी सूनी हो चुकी पुरानी पीढ़ी को और भी तनहा कर गये। दैनिक जागरण और लम्बे समय तक स्वतंत्र भारत में सेवाएं देने वाले इस खाटी पत्रकार ने तमाम सेकेंड लाइन के पत्र-पत्रिकाओं में भी सेवाएं दी थीं।

स्वास्थ्य ठीक ना रहने के कारण वो करीब तीन-चार बरस से घर से कम निकल पा रहे थे। इस बीच वो अपनी पत्रकारिता के संस्मरण और अपनी वर्तमान दिनचर्या पर आधारित फेसबुक पर एक नियमित सिरीज लिख रहे थे। “सत्य कहहुं” शीर्षक से लिखे जाने वाली सिरीज़ की आखिरी कड़ी उन्होंने 29 दिसंबर 2020 को लिखी थी। जिसमें उन्होंने साफ लिखा था कि काली आकृतियों(मौत)ने उनसे गुफ्तगू की थी। आशुतोष जी ने मौत से कहा मुझे ले चलो! मौत ने उनसें कहा था कि आपके पास अभी थोड़ा और वक्त बचा है। और ये सच हुआ। 29 दिसंबर 2020 के बाद चालीस दिन ही वो जीवित रहे। 8 फरवरी 2021 उनकी जिन्दगी का आखिरी दिन रहा।
आशुतोष वाजपेयी जी हमारे अग्रज, सीनियर,आदरणीय गुरु थे। कुछ महीने पहले कई बार उन्होंने फेसबुक मैसेंजर पर मुझे मैसेज किया। अपना नंबर दिया और लिखा कि मुझे फोन करो!
मेरी नालायकी कि मैंने फोन नहीं किया। क्षमा पार्थी हूं गुरु जी।
जिसे चालीस दिन पूर्व ही संसार छोड़ने की खबर देने के लिए स्वयं यमराज पधारे हों ऐसी आत्मा को नमन
श्रृद्धांजलि

  • नवेद शिकोह
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