आश्रम पहुंचे बच्चों की संख्या पूछी तो पता चला बिस्किट कम पड़ेगा तो दूर से और पैकेट लाने के लिए कैमरामैन के साथ गाड़ी भेज दिया। जब लौटे तो सारे बच्चों को बिस्किट दिए… बड़ी बात यह थी कि इसकी किसी ने रिकॉर्डिंग नहीं की ना ही तस्वीरें ली…

सुरेश महापात्रा-
Dr-Awadhesh Mishra से मेरी पहली मुलाक़ात दंतेवाड़ा में उनके एक रिसर्च इंटरव्यू के दौरान हुई थी। रायपुर से याद नहीं है कि किनके रिफ्रेंश से वे दंतेवाड़ा मुझ तक पहुंचे थे।
दो लोग पहुंचे थे अवधेश के साथ इन दिनों दैनिक भास्कर में सक्रिय देवव्रत भी थे। करीब दो घंटे तक दोनों ने बात की। उसके बाद मेरे साथ एक तस्वीर लेने का आग्रह किया… मेरी फ़ीलिंग सेलिब्रिटी जैसी हो गई।
काम के दौरान बहुत लोगों से मिलना हुआ। सबने बहुत सम्मान दिया। संभवतः हर किसी के लिए उपयोगी साबित भी हुआ।
बहुत से लोगों से अब तक संबंध हैं पर अवधेश उन सबसे बिल्कुल अलग… व्यवहार, व्यक्तित्व और आचरण के साथ काम के प्रति उनकी मर्मज्ञता को करीब से देखना महसूस करना हो सका…
मुझसे मिलने वालों में कुछ ने किताबें लिखी हैं कुछ के पुरस्कारों की फ़ेहरिस्त बहुत लंबी है। पर इस दौर में अपने दम पर काम के बूते संघर्ष के सहारे खड़े हो रहे अवधेश की बात ही अलग है।
पहली मुलाक़ात से लेकर अब तक कई तरह से मिलना होता रहा। मेरे रायपुर में रहने के बाद सबसे पहले मिलने के लिए आने वालों में भी यह एक नाम शामिल है।
नीचे दी गई तस्वीर अभी 5 अप्रैल को दंतेवाड़ा में केंद्रीय गृहमंत्री की सभा से लौटते हुए डिलमिली में लाइव डिबेट के कार्यक्रम की है।
हम दंतेवाड़ा से निकले तो यह साफ था कि कारली में गृहमंत्री की बैठक के चलते रास्ता जाम मिलेगा तो हम कटेकल्याण के रास्ते जगदलपुर के लिए रवाना हो गए।
आधी राह ही चले थे कि उन्हें हेड आफिस से निर्देश प्राप्त हुआ कि शाम पांच बजे गृहमंत्री की सभा पर लाइव डिबेट करना है। उसके बाद की पूरी टाइमिंग पैक है। राह चलते ही अवधेश ने पूरी तैयारी रायपुर से एक्सपर्ट और भाजपा-कांग्रेस के प्रवक्ताओं को लाइनअप किया।
इधर टाइमिंग को सेट करना था। हम 4.55 को डिलमिली में स्थित एक आश्रम शाला में रुक गए। वहाँ अधीक्षक से अनुमति लेकर लाइट-कैमरा रोल की तैयारी की गई। ठीक पांच बजे कार्यक्रम शुरू हो गया। डिबेट में मैं भी शामिल रहा।
कार्यक्रम खत्म होने के बाद आश्रम के बच्चों से मिलकर अवधेश बात करने लगे। बच्चों से पहाड़ा पूछा बच्चों के जवाब से अवाक् होते ही मोबाइल निकालकर रिकॉर्डिंग करने लग गए।
इसके बाद हमें निकलना था तो बच्चों से मिलने के बाद अवधेश को लगा कि कुछ देना है किराने की दुकान से पूरा बिस्किट का पैकेट खरीद लिया। और लौट कर आश्रम पहुंचे बच्चों की संख्या पूछी तो पता चला पैकेट कम पड़ेगा तो दूर से और बिस्किट पैकेट लाने के लिए कैमरामैन के साथ गाड़ी भेज दिया।
जब वे लौटे तो सारे बच्चों को बिस्किट के पैकेट दिए… बड़ी बात यह थी कि इसकी किसी ने रिकॉर्डिंग नहीं की ना ही तस्वीरें ली। यहां देखा तो और भी अच्छा लगा…
तो ऐसे अवधेश को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएँ… माता रानी की कृपा सदैव बनी रहेगी




