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मजीठिया लागू कराने को लेकर भास्कर के तीन कर्मचारियों ने उठाया झंडा

भास्कर के सीओओ ने कहा घोषणा पत्र साइन कीजिए वरना ट्रांसफर, संस्पेंशन, डिस्मिसल कुछ भी हो सकता है

अजमेर। मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने को लेकर अजमेर दैनिक भास्कर में बवंडर मचा हुआ है। पिछले महीने, जून की शुरूआत में भास्कर प्रबंधन ने मजीठिया की सिफारिशें लागू नहीं करने को लेकर अपने कर्मचारियों से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करवाने का अभियान शुरू किया था। ज्यादातर, बल्कि सही अर्थों में लगभग सभी ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए। लेकिन संपादकीय विभाग के तीन कर्मचारियों रजनीश रोहिल्ला, नागौर के डिप्टी मैनेजर मार्केटिंग संदीप शर्मा और मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव जितेंद्र सिंह राठौड़ ऐसे रहे जिन्होंने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस किया।

भास्कर के सीओओ ने कहा घोषणा पत्र साइन कीजिए वरना ट्रांसफर, संस्पेंशन, डिस्मिसल कुछ भी हो सकता है

अजमेर। मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने को लेकर अजमेर दैनिक भास्कर में बवंडर मचा हुआ है। पिछले महीने, जून की शुरूआत में भास्कर प्रबंधन ने मजीठिया की सिफारिशें लागू नहीं करने को लेकर अपने कर्मचारियों से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करवाने का अभियान शुरू किया था। ज्यादातर, बल्कि सही अर्थों में लगभग सभी ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए। लेकिन संपादकीय विभाग के तीन कर्मचारियों रजनीश रोहिल्ला, नागौर के डिप्टी मैनेजर मार्केटिंग संदीप शर्मा और मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव जितेंद्र सिंह राठौड़ ऐसे रहे जिन्होंने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस किया।

सनद रहे कि जितेंद्र सिंह राठौड़ उन कर्मचारियों में से है जो 1997 में जब भास्कर अजमेर से शुरू हुआ तब से उसके साथ हैं। राठौड़ करीब दस साल अजमेर मे संपादक और प्रबंधक के निजी सहायक रहे। उनका कैडर बदलकर मार्केटिंग कर दिया गया इसका पता उन्हें तब लगा जब उन्हें अजमेर से नागौर ट्रांसफर कर दिया गया। चलिए मुद्दे पर आते हैं तो मजीठिया के चक्कर मे तीनों की बदली कर दी गई। रोहिल्ला को भेजा गया महाराष्ट्र। संदीप को भेजा गया है नागौर से रायपुर और जितेंद्र को जमशेदपुर। रोहिल्ला के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करने पर भास्कर के सीओओ संजय शर्मा ने रोहिल्ला को 10 जून को जोधपुर अपने कार्यालय मे बुलाया। प्यार से समझाया भईया आपके सब साथियों ने घोषणा पत्र पर साइन कर दिए हैं, आप इतने समझदार होकर भी क्यूं नहीं करते। कर दो यार! यही तो है कि आपको मजीठिया की सुविधाएं पहले से ही मिल रही है। और हां उस पर तारीख मत डालना। दस्तखत करोगे तो कंपनी आपको प्रमोशन, इंक्रीमेंट में ध्यान रखेगी। नहीं करोगे तो सोच लो, आपका ट्रांसफर, संस्पेंशन, डिस्मिसल कुछ भी हो सकता है। आप दस्तखत कर रहे हो या नहीं मुझे यह सूचना अपने बॉस लोगो को भेजनी है।

रोहिल्ला ने एक कान से सुनी दूसरे से निकाल दी और अदालत में मुकदमा कर दिया। कनिष्ठ सिविल जज ने स्टे दे दिया। भास्कर उसके खिलाफ अपील में जिला कोर्ट में गया। जिला कोर्ट ने यह कहते हुए कि सिविल जज ही मामला तय करे, अपील खारिज कर दी। सिविल जज अब दावे में क्या करते हैं और भास्कर जिला कोर्ट के खिलाफ क्या करता है? यह देखना बाकी है।

 

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

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2 Comments

2 Comments

  1. Sumit Rohilla

    July 12, 2014 at 9:00 am

    ये लोग बाकी साथियों को नेतृत्व क्यों नहीं देते। मजीठिया तो सभी को चाहिए। चंदा जुटाओ सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना का केस करो। परमानंद जी तो मजदूरों का केस लड़ ही रहे हैं। किसी का नाम भी सामने नहीं आएगा पर आपस में तो तालमेल बनाना होगा वरना मजीठिया नहीं चाहिए अभी तो बस लिखकर दिया है, सचमुच में नहीं मिलेगा।

  2. kk kulshrestha

    July 22, 2014 at 1:13 pm

    journalists should raise attention of respected judges of SC. only SC’s strict order can prevent such victimisation. I Appeal SC thru social media to please treat such info as an appeal and send notices to the concerned.
    I request journalist to spread this appeal in social media to make it loud voice for SC.

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