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हत्या के 3 दिन बाद ठेकेदार की गिरफ्तारी हजम नहीं होती, SIT को बीजापुर पुलिस के कॉल रिकॉर्ड जांचने चाहिए!

सुरेश महापात्रा-

रा सोचिए… करोड़ो का मालिक सुरेश चंद्रकार के बारे में पुलिस को तीन दिन पहले से पता था कि वह हैदराबाद में है।

फिर भी वह 6 तारीख़ को बीजापुर में पुलिस द्वारा गिरफ्तार बताया जाता है।

वह जब गया था तब खाली हाथ तो गया नहीं होगा। गाड़ी में कम से कम कितना नगद ले गया होगा? उसे इतने समय तक मुक्त रखने की कितनी कीमत ली गई होगी।

उसे अपने लिए क़ानूनी इंतज़ामों को पूरा करने का मौक़ा पुलिस ने ही दिया होगा?

यह भी विचारणीय ही है कि तीन दिन बाद तक वह कहीं भागने की कोशिश नहीं करता है और बगैर भागदौड़ की खबर पुलिस गोद में उठाकर पेश कर देती है?

हमारे इस संदेह को बल तो पुलिस के पहले बयान से मिला है जब उसने यह बताया कि “रितेश ने हमले के बाद दिनेश को घटना की जानकारी दी जो सुरेश चंद्रकार के साथ जगदलपुर में था।”

देखिए देश भर के दबाव से पुलिस जिस तरह का नाटक प्रदर्शन कर रही है उसके झांसे में आए बगैर मुकेश चंद्राकर के हत्यारों को सजा दिलाने तक चौकन्ना रहना होगा…

31 दिसंबर से लेकर 3 जनवरी तक बीजापुर पुलिस के तमाम कॉल रिकॉर्ड की जांच SIT को करनी चाहिए…

यह बेहद ख़तरनाक षड्यंत्र है भ्रष्टाचार के मामले में अपने आप को बचाने का…

आप सुरेश चंद्रकार की तस्वीर और विडियो को देखें तो पता चलेगा कि उसे पुष्पक विमान में सुरक्षित तरीक़े से लाकर मीडिया को परोसने के लिए फ़ोटो सेशन करवाया गया लग रहा है…

पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट के बाद तो पुलिस का भी खून खोना चाहिए था जैसा कमजोर लोगों के मामले में पुलिस दिखाती है वैसा क्यों नहीं दिख रहा है? मेरा सवाल गलत है तो क्षमा..

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