पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। चार दिन पहले अमरिंदर सिंह ने एक इंटरव्यू में इशारों-इशारों में कहा था कि भाजपा में उनसे कोई सलाह नहीं ली जाती और पंजाब जैसे राज्य में भाजपा की स्थिति कमजोर है, जिससे यह कयास लगाए जाने लगे कि वह एक बार फिर कांग्रेस की ओर रुख कर सकते हैं।
इसके ठीक दो दिन बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमरिंदर सिंह को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक मामले में समन जारी कर दिया। नोटिस मिलने के अगले ही दिन अमरिंदर सिंह की पत्नी और सांसद परनीत कौर मीडिया के सामने आईं और हांफती हुई हालत में बयान दिया कि कैप्टन न तो कांग्रेस में जा रहे हैं और न ही भाजपा छोड़ रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि अमरिंदर सिंह भाजपा में थे, भाजपा में हैं और भाजपा में ही रहेंगे।
इसी बयान के बाद एक और घटनाक्रम सामने आया जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी। सूत्रों के मुताबिक, जिस ED अधिकारी ने अमरिंदर सिंह को नोटिस भेजा था, उसका ट्रांसफर दिल्ली से करीब 2700 किलोमीटर दूर चेन्नई कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव और संदेश देने के लिए किया जा रहा है। पहले कांग्रेस में वापसी के संकेत, फिर ED का नोटिस, और उसके बाद भाजपा में बने रहने का ऐलान होते ही अधिकारी का ट्रांसफर — इन तीन घटनाओं की टाइमिंग ने देश की राजनीति और संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जसवी नेहरुवियन-


4 दिन पहले पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने कुछ इशारा किया कि वो भाजपा से वापस कांग्रेस में जा सकते हैं क्योंकि भाजपा में उनसे सलाह नहीं ली जाती। फिर परसो कैप्टेन अमरिंदर सिंह को एक ED का नोटिस चला गया।
अगले दिन कैप्टन अमरिंदर की पत्नी मीडिया में आई और हांफते हुए एक बयान दी कि वो कहीं नहीं जा रहे। वो BJP में थे, BJP में हैं और BJP में ही रहेंगे।
इस बयान के बाद ED के जिस अधिकारी ने नोटिस भेजा था उसका ट्रांसफर दिल्ली से 2700 किलोमीटर दूर चेन्नई कर दिया गया। सोचिए देश कैसे चल रहा है?


