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सियासत

CDS अनिल चौहान ने राजनीति और मीडिया के तमाम हुल्लड़बाजों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है!

गिरिजेश वशिष्ठ-

मतलब साफ है कि दोनों तरफ की सेना की समझदारी ने बचा लिया, नेताओं ने और मीडिया ने बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. दिवाली पर बॉम्ब टाइमर लगाकर फोड़ने वाले और कान कसकर बंद कर लेने वाले पापा पीओके चाहिेए की रट लगाए थे.

बेटा जब वो वाला बम फटता है तो सीधे बम फट जाती है. अपने बाप को बोलो एक कंटाप लगाए. फिर सोचो कि जिनकी जान बम से जाती है वो भी इनसान होते हैं. फौजी मरने नहीं आया है रक्षा करने आया है.

मैं आभारी हूं सेना का जिसने समझदारी दिखाई. उन स्वार्थी अफसरों को छोड़कर जो रिटायरमेंट के बाद की सोच सारी परंपरा को रौंद रहे हैं।


अमिताभ श्रीवास्तव-

सीडीएस जनरल अनिल चौहान का यह कहना कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फ़ौज की वर्दी वाले लोग सबसे ज्यादा समझदार (rational= बुद्धिमान, अक़्लमंद, तर्कसंगत, विवेकशील) थे क्योंकि उन्हें अंजाम का अंदाज़ा था, बहुत महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति या समूह की तरफ इशारा किये बिना उन्होंने राजनीति और मीडिया के तमाम हुल्लड़बाज़ों पर ‘स्ट्राइक’ कर दी है।

दिलचस्प है कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक उन्होंने इस सिलसिले में अपने इंटरव्यू में पाकिस्तान की सेना की तरफ से भी विवेक का परिचय दिये जाने का संकेत दिया है जो कि हमारे देश की राजनीति और मीडिया के उन्मादी व्यवहार और विवरणों से अलग दिखता है।

जनरल चौहान का यह कथन भी महत्वपूर्ण है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फेक न्यूज से निपटने में भी सेना का वक़्त बर्बाद हुआ। ये हमारे उस वाहियात मीडिया पर इशारों-इशारों में बहुत संयत टिप्पणी है जो ख़बरों के नाम पर झूठ, सरकारपरस्ती और अफ़वाहों के अड्डों में बदल चुका है और बडी निर्लज्जता से खुद को देशभक्त कहता है।

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