केंद्र सरकार को सीबीआई लखनऊ कार्यालय के गठन की कोई जानकारी नहीं

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने केंद्रीय सूचना आयोग के सामने दावा किया है कि उनके पास सीबीआई के लखनऊ कार्यालय के गठन से संबंधित कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं है. एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने सीबीआई के लखनऊ कार्यालय का कब गठन हुआ तथा उसे सीआरपीसी 1973 की धारा 2 (एस) में पुलिस थाने की कब मान्यता दी गयी सहित अन्य संबंधित सूचना मांगी थी.

डीओपीटी के अनुसचिव एस पी आर त्रिपाठी ने आयोग को बताया कि दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन एक्ट 1946 में सीबीआई की शाखा खोलने का अधिकार सीबीआई निदेशक को है, जिसके लिए डीओपीटी की अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है. अतः डीओपीटी के पास इस संबंध में कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं.

गृह मंत्रालय के अनु सचिव एस के झा ने कहा कि 1985 में मंत्रालय के पुनर्गठन के बाद सीबीआई डीओपीटी के अधीन हो गयी तथा उससे जुड़े सारे अभिलेख डीओपीटी को हस्तगत करा दिए गए. इस पर सूचना आयुक्त दिव्य प्रकाश सिन्हा ने यह कहते हुए प्रकरण को समाप्त कर दिया कि आवेदिका नूतन ठाकुर ने सीबीआई लखनऊ कार्यालय के अस्तित्व की वैधानिकता पर आश्चर्य व्यक्त किया है.

Central Govt has no info on formation of CBI, Lucknow office

Department of Personnel and Training (DOPT) and Ministry of Home Affairs (MHA), Government of India have claimed before the Central Information Commission that they have no information available about constitution of the Lucknow office of Central Bureau of Investigation (CBI).

Activist Dr Nutan Thakur had sought information about when the Lucknow office of CBI was established and notified as a Police station under section 2(s) of the CrPC, 1973, along with related documents.

SPR Tripathi, Under Secretary, DOPT told the Commission that the CBI Director is empowered by the Delhi Special Police Establishment Act, 1946 to order constitution of branch offices and does not require any approval from DoPT in this regard. Hence, there is no record available with DoPT on this matter.

S K Jha, Under Secretary, Ministry of Home Affairs (MHA) told that after reorganization of MHA in 1985, CBI was placed under DoPT and all records of CBI were transferred to DoPT.

Based on these responses, Information Commissioner Divya Prakash Sinha disposed of the matter, saying that the appellant Nutan Thakur has expressed her perplexity regarding the legality of the existence of the Lucknow office of CBI.

दो पत्रकार भरी सड़क पर खुलेआम सांड़ बन गए हैं 🙂 एक दूसरे को बता रहे हैं दलाल…

दो पत्रकार भरी सड़क पर खुलेआम सांड़ बन गए हैं 🙂 एक दूसरे को बता रहे हैं दलाल… एक एनडीटीवी का है और दूसरा सहारा समय का…

Bhadas4media ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 15, 2019
कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *