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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार ने अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर पाबंदी लगाई, पत्रकारों ने जलाया आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने एक नया आदेश जारी कर सरकारी अस्पतालों में मीडिया की आवाजाही और कवरेज पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस आदेश को लेकर प्रदेशभर के पत्रकारों में गहरा आक्रोश है। रायपुर में पत्रकारों ने रायपुर प्रेस क्लब के बैनर तले बेडकर प्रतिमा के समीप जोरदार प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य विभाग के आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की।

पत्रकारों ने इस सरकारी फरमान को ‘मीडिया सेंसरशिप’ की संज्ञा देते हुए इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करार दिया है।

क्या है आदेश में?

  • 13 जून को चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा जारी इस आदेश के तहत निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
  • हर अस्पताल में पीआरओ (जनसंपर्क अधिकारी) की नियुक्ति अनिवार्य।
  • कोई भी डॉक्टर या स्टाफ सीधे मीडिया से बात नहीं करेगा।
  • मीडिया को मरीजों की फोटो, वीडियो या जानकारी लेने की अनुमति नहीं।
  • मरीजों के वार्ड में मीडिया के प्रवेश पर सख्त रोक।
  • दुर्घटनाओं या घटनाओं में रोगियों की पहचान उजागर न करने का निर्देश।
  • अस्पताल में कवरेज से पहले पीआरओ से अनुमति जरूरी।
  • फोटो-वीडियो केवल उन्हीं स्थानों पर लिया जा सकेगा जहां मरीज न हों।
  • लाइव कवरेज के लिए अलग से स्थान तय होगा।
  • मीडिया को प्रेस विज्ञप्ति या प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से ही सूचना मिलेगी।
  • आपात स्थिति में यह तय होगा कि मीडिया को कब, क्या और कैसे जानकारी दी जाएगी।
  • सोशल मीडिया पर अस्पताल की ओर से जानकारी साझा करने के लिए अलग नीति बनेगी।

आदेश के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पत्रकार अगर नियम तोड़ते हैं तो संबंधित मीडिया संस्थान के संपादक या प्रमुख को लिखित में शिकायत भेजी जाएगी। विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था अस्पताल में मरीजों की निजता बनाए रखने और व्यवस्था को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से की गई है।

हालांकि पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह आदेश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की भूमिका को दबाने वाला है। प्रेस क्लब ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की तैयारी कर रहे पत्रकार प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि अगर सरकार संवाद की पहल नहीं करती तो वे अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं। वहीं पत्रकार संगठनों ने पूरे राज्य में एकजुटता के साथ विरोध जारी रखने का ऐलान किया है।

आदेश देखें…

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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