मीडिया संस्थानों के चाटुकारों को सबसे पहले पहचान लीजिए!

Sumit Srivatava-

पत्रकारिता पर भारी चाटुकारिता…चैनलों में काम करने वाले कर्मचारी (आउटपुट-इनपुट) मेहनत से कार्य करते हैं। समय से ऑफिस आना और अपनी सीट पर बैठकर काम शुरू कर देना। जब आप चैनल को ज्वाईन करते हैं तब अपना 100 फीसदी चैनल के लिये देने का प्रयास करते हैं क्योंकि आपको विश्वास है कि यह काम मैं अच्छी तरह से कर सकता हूं और कभी कभी तो आप काम में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि आपको ब्रेक तक लेने का समय नहीं मिलता।

लेकिन संस्थान में कुछ कर्मचारी चाटुकार टाइप के होते हैं। उनकी आदत आपके काम में अड़ंगा लगाने की होती है या कहीं ना कहीं वो आपके काम में कमी भी निकालेंगे। अगर आप उन चाटुकार की हां में हां करते रहे तो ठीक अन्यथा वो आपका शोषण करना शुरू कर देते हैं। आपकी हर एक बात बॉस तक पहुंचाते हैं। आखिर में आपको संस्थान छोड़ने को मजबूर कर देते हैं।

कुछ चाटुकार सीसीटीवी कैमरे का भी काम करते हैं। ऑफिस के कर्मचारियो की हर एक पल की खब़र अपने बॉस तक पहुंचाते हैं। कौन क्या कर रहा है, सभी चीजों की जानकारी अपने बॉस तक पहुंचाते हैं। आपके साथ मिलकर बैठेंगे और आपके मुंह से संस्थान के खिलाफ निकली कोई बात को तुंरत बॉस तक पहुंचाने का काम करते हैं। वो चाटुकार लोग आपको नीचा दिखाने के लिये कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। आखिर में परेशान होकर आप संस्थान को छोड़ देते हैं या फिर नई नौकरी की तलाश करने लगते हैं।

चाटुकार व्यक्ति को चैनल में काम करने की बजाय दूसरों की शिकायतों को अपने बॉस तक पहुंचाने में बड़ा मजा आता है। किसी गलती को लेकर जब आपको केबिन में बुलाया जाता है तो चाटुकार बड़े खुश दिखाई देते हैं।

संस्थान में जब भी हेड स्तर पर व्यक्ति संस्थान ज्वाइन करता है तो उसके साथ कुछ चाटुकार भी चौड़े होकर चलते हैं। फिर दूसरे कर्मचारियों की कमी निकालकर उनके कामों में अड़ंगा डालना शुरू कर देते हैं। तलवे चाटने वाले चाटुकार काम तो जानते नहीं हैं तो वो शोर मचाकर दूसरे के कामों को दबाने का काम करते हैं।

ऐसे चाटुकार कर्मचारियों से सतर्क रहने की जरूरत है जो बॉस की नजरों में अच्छा बनने के लिये आपके करियर पर ही ग्रहण लगा देते हैं।

सुमित कुमार श्रीवास्तव
मो0… 8400008322

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