आनंद सिंह-
एबीपी न्यूज की वाइस प्रेसीडेंट चित्रा त्रिपाठी ने 12 जुलाई को पटना में जनसुराज के संयोजक प्रशांत किशोर से बात की. चित्रा गोरखपुर की रहने वाली हैं और डॉ. हर्ष कुमार सिन्हा को अपना गुरु मानती हैं. उन्होंने प्रशांत किशोर से जो सवालात किये, जिनका उन्हें प्रशांत ने जवाब भी दिया, उस पर चर्चा फिर कभी.
इस इंटरव्यू की चर्चा इसलिए कि लगभग 17 मिनट के इंटरव्यू में 6 से 7 मिनट दोनों आम के पेड़ के नीचे बैठ कर, भीगते हुए सवाल-जवाब कर रहे थे. चित्रा ने टोका भी कि अब रुकते हैं लेकिन प्रशांत किशोर ने कहा कि चलने दीजिए. पानी ही तो है. यही तो मजा है. इस पर चित्रा ने कहा कि आपके लिए तो मजा है लेकिन हमारा कैमरा खराब हो जाएगा. वह दो बार कैमरामैन से पूछती हैं कि कैमरा तो खराब नहीं होगा. जब कैमरामैन ने इशारा किया कि नहीं तो फिर इंटरव्यू चालू रहा. प्रशांत किशोर यहां पूरी रौ में थे.
प्रशांत और चित्रा का यह लगभग 17 मिनट का इंटरव्यू संपादित है अथवा नहीं, इसका दावा नहीं कर सकता लेकिन कुछ फ्रेम में दोनों की तल्खियां सामने आईं. खास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रसंग पर.
चित्रा आज भी यह स्वीकार करती हैं कि चुनाव कोई भी हो, कहीं का भी हो, लोग भाजपा को नरेंद्र मोदी के नाम पर ही वोट देते हैं. हां, उन्हें प्रशांत किशोर के यह कहने पर उज्र था, आपत्ति थी कि मीडिय़ा का एक वर्ग जिसमें वह भी आती हैं, भाजपा की सिम्पेथाइजर पत्रकार मानी जाती हैं कि भाई लोग मोदी जी के भक्त लोग हैं. इस पर चित्रा आपत्ति दर्ज करती हैं और प्रतिप्रश्न करती हैं कि क्या आप नहीं थे मोदी जी के भक्त?
प्रशांत किशोर इसका जवाब ना में देते हैं और कहते हैं कि बिहार में, एमपी में, यूपी में पूरे देश में लोग एमपी के नाम पर वोट नहीं देते, मोदी के नाम पर देते हैं, ऐसा आप मीडियावाले कहते हैं.
इस पर चित्रा उन्हें जवाब देती हैं कि ज्यादातर मामलों में यह बात सही है.
वह प्रतिप्रश्न करती हैः मोदी जी को छोड़ कर आखिर किसको वोट मिला?
प्रशांत कहते हैं-अभी बताते हैं. लोग लालू जी को वोट दे रहे हैं. 18 प्रतिशत मुसलमान वोट सीधे लालू जी को दे रहे है. लेकिन मुसलमान की जाति और लालू जी की जाति तो एक नहीं है. वो वोट क्यों दे रहा है लालू जी को?
तड़क-भड़क से भरा यह इंटरव्यू एक उदाहरण है, जिसमें चित्रा तीखे सवाल पूछती नजर आईं. तेजप्रताप वाले इंटरव्यू में वह हंसती-मुस्कुराती नजर आई थीं. पीके के साथ बातचीत में उनकी तनी भृकुटि का राज समझ में नहीं आया. प्रशांत किशोर ने उन्हें उनके मुंह पर मोदी भक्त का तमगा दे ही दिया. कहीं इसीलिए यह इंटरव्यू मात्र 17 मिनट का तो नहीं?



