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उत्तराखंड

सीएम धामी पर पूर्व सीएम हरीश रावत का धाँय-धूँय!

हरीश रावत-

पब्लिक सर्विस कमीशन हो या अधिनस्थ सेवा चयन आयोग हो या भर्ती बोर्ड हो, इनको भारतीय जनता पार्टी की सरकार एक अनावश्यक बोझ के रूप में मानकर चलती है, जो वर्तमान सेवा ढ़ांचा है चाहे केंद्र का हो या उत्तराखंड राज्य का हो, इसे भारतीय जनता पार्टी और उनके संरक्षक कांग्रेस की मानसिक उपज का परिणाम बताते हैं।

आप पता कर लीजिए जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां-वहां भारी संख्या में विभिन्न विभागों में पद रिक्त हैं। यहां तक कि केंद्र सरकार के रेलवे, संचार, सेना आदि विभागों में लगभग 30 लाख से ऊपर पड़ खाली पड़े हुए हैं। उत्तराखंड छोटा राज्य है, यहां जन दबाव ज्यादा है, इसलिए भर्ती का नाटक किया जाता है और फिर किसी न किसी बहाने नियुक्तियों को लटकाया जाता है।

आप 2018 से भर्तियों का पूरा क्रम देख लीजिए और उसके बाद कभी पेपर लीक, कभी नकल के नाम पर भर्तियां रद्द होती रही हैं और जहां ऐसा नहीं हो पाया है, भर्तियां हुई हैं तो नियुक्तियां नहीं हुई हैं या कोर्ट में खराब पैरवी के चलते और या किसी और बहाने नियुक्तियां लटकी हुई हैं। आज भी आपको ऐसे सैंकड़ों चयनित अभ्यर्थी मिल जाएंगे जो चयनित हैं, मगर जिनकी नियुक्ति नहीं हो रही है।

कल का यह पूरा प्रपंच भी भाजपा का ही है। हाकम सिंह पर कभी भी सरकार द्वारा वास्तविक अर्थों में शक्ति नहीं की गई। मैं बताते चलूं, उत्तरकाशी में जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा को जिताने और एक बड़ा दल-बदल करवाने में हाकम सिंह की अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका रही। आज भी हाकम सिंह और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी का नाटक मात्र हुआ है। यदि सरकार सख्त हो तो ऐसा कुकृत्य नहीं हो सकता है।

कल खबर आई कि उत्तराखंड के भाजपा नेता और नकल मिशन के प्रणेता हाकम सिंह और उनके एक सहयोगी गिरफ्तार हो गये हैं। आज खबर आई है कि पेपर लीक हो गया। फिर कहा जा रहा है कि आंशिक रूप से लीक नहीं हुआ है। अरे लीक तो लीक है तो यह एक गंभीर मामला है, बहुत बड़ी विफ़लता है और नकल विरोधी कानून तो ऐसा लगता है कि केवल मजाक बन करके रह गया है!

भाजपा के नेताओं ने अपनी इतनी पीठ ठोक ली थी कि दूसरों के लिए कुछ सोचने, विचारने के लिए कुछ छोड़ ही नहीं था। अब भाजपा को जनता को जवाब देना चाहिए कि आखिर तुम्हारी धाकड़ सरकार के धाकड़ मुख्यमंत्री का धाकड़ नकल विरोधी कानून का क्या हुआ? क्या असर पड़ा? पहले ही इम्तिहान में फेल हो गया।

अब गिरफ्तारियों को नाटक रच कर और नया उलझाव पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। अपनी विफ़लता को स्वीकार करना चाहिए‌। विरोध को पूरा हक है कि वह आपसे सवाल करें? उसका समाधान गिरफ्तारियां नहीं है, किसी की भी गिरफ्तारी हो मैं उसकी निंदा करता हूं।

नकल और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा लेकर सरकार ने अपनी स्थिति हास्यास्पद बना दी है। परीक्षा की पहली रात्रि को भाजपा के नेता हाकम सिंह को पकड़ा जाता है और यह आभास दिया जाता है कि नकल करवाने की संभावना को हमने समाप्त करने के लिए हाकम सिंह और उनके सहयोगियों को पकड़ा है और दूसरे दिन परीक्षा शुरू ही होती है कि पेपर लीक हो जाता है और तब स्थिति और हास्यास्पद हो जाती है, जब दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पेपर लीक किसको कहा जाय उसकी परिभाषा बताते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जो अब आयोग के अध्यक्ष हैं, वह कहते है कि पेपर लीक नहीं हुआ, सिर्फ तीन पन्ने लीक हुये हैं। माननीय अध्यक्ष जी, एक प्रश्न भी लीक होता है तो वह भी पेपर लीक ही है। यहां तो तीन पन्ने लीक हो गए हैं।

मेरे समझ में नहीं आया कि आयोग के अध्यक्ष जी किसको बचाने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरे पुलिस अधिकारी जो #SSP हैं, वह कहते हैं कि पेपर लीक तब है, जब परीक्षा से एक घंटे पहले हो जाए मतलब परीक्षा शुरू होने और उसके बाद जो पेपर लीक है वह नकल विरोधी कानून के अंतर्गत नहीं आता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय यही क्या आभास देना चाहते हैं? क्या परीक्षा शुरू होने के बाद हुआ पेपर लीक नकल विरोधी कानून के अंतर्गत नहीं आता है? जबकि सत्यता यह है कि यदि प्रश्न पत्र का एक शब्द भी लीक होता है तो वह भी नकल विरोधी कानून के अंतर्गत आना चाहिए और उस शब्द को लीक करने वाले को दंडित किया जाना चाहिए। इन दोनों अधिकारियों ने सरकार को बचाने के चक्कर में अपने साथ सरकार को भी हास्यास्पद स्थिति में ला दिया है।

मैं इस तथ्य को फिर दोहराना चाहता हूं कि उत्तराखंड के अंदर दो व्यक्ति ऐसे हैं जिनके ऊपर भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और राज्य सरकार कभी भी हाथ डालने की हिम्मत नहीं कर सकती है। इन दो लोगों के पेट में 2016 के स्टिंग का पूरा इतिहास और क्रम, इस प्रकरण के प्रेरकों के नाम, उससे जुड़े हुए विभिन्न किरदारों के नाम और किसको कितना धन गया उसका रहस्य मौजूद है।
मैं समय के व्यवहार से थोड़ा दुःखी था।

कई बार मन में भाव आया, जब इतने लोग नहीं चाहते हैं कि मैं राजनीति में रहूं तो सम्मान पूर्वक हट जाना ही अच्छा है। 2016 का प्रकरण एक ऐसा प्रसंग है जिसके संपूर्ण तथ्यों के उजागर हुए बिना राजनीति से हटने का अर्थ है कि आप पर भाजपा द्वारा जो झूठा प्रचार थोपा गया है उसको हमेशा-हमेशा के लिए अपने गले में लटका कर इस दुनिया से जाना।

इस बात का ध्यान आते ही मैं रूग्णता आदि के बावजूद भी संघर्ष के रास्ते पर निकल पड़ता हूं, कोई चाहे या न चाहे मेरा 58-60 साल का राजनीतिक जीवन मुझसे यह अपेक्षा करता है कि मैं भारतीय जनता पार्टी के झूठ व दुष्प्रचार का पूरी शक्ति लगाकर पर्दाफाश करूं।

मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन भगवत प्रेरणा से इन दो लोगों के पेट से 2016 का दल-बदल, सरकार को भंग करना आदि रहस्य और केंद्र सरकार व भाजपा के पापों की हकीकत सामने आएगी।

मन में एक आशा यह भी है, यदि 2027 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार आती है तो हम नये सिरे से मामले को और इससे जुड़े हुए पात्रों की अपराधिक स्थिति की जांच कर सत्य को जनता-जनार्दन के सम्मुख ला सकते हैं। एक तथाकथित स्टिंग को लेकर भाजपा द्वारा जो ताने मुझ पर कसे जाते हैं, वह मात्र ताने नहीं है लगभग 58-60 वर्ष के मेरे सामाजिक, राजनीतिक जीवन की सूचिता पर सवाल हैं!

मेरी मां जगदंबा से प्रार्थना है कि माते मैं इस धरती से विदा होऊं उससे पहले 2016 के भाजपा के पापाचार का भंडाफोड़ जनता के सम्मुख हो जाए। इस राज्य के अंदर लाखों लोग होंगे जिनकी तरफ मैंने आगे बढ़कर सेवा का हाथ बढ़ाया है। एक जनसेवक के रूप में मेरी छवि पर भाजपा के प्रपंच ने जो दाग लगाया है, मैं उसके साथ संसार से नहीं जाना चाहता हूं। यदि मेरी पोस्ट को पढ़ने वालों के मन में मेरे प्रति कुछ भी अपनत्व का भाव पैदा हो रहा है तो मेरे इस अंतिम संघर्ष में मेरे साथ खड़े हों।

मेरा निवेदन उन लोगों से भी है जो किसी न किसी कारणवश भाजपा के षड्यंत्र का हिस्सा बन गए हैं और उन्हें लगता है कि झूठ, लूट-फूट की यह व्यवस्था बदलनी चाहिए तो उन्हें भी मेरे साथ जुड़कर इस संघर्ष का नेतृत्व करना चाहिए।


प्यारे भट्ट जी,

जी हां महेंद्र भट्ट जी, आपने बहुत अच्छा कहा, मुझे डरने की क्या जरूरत है? क्योंकि मुझे जो नुकसान होना था, आपकी पार्टी का प्रपंच वह नुकसान मुझे पहुंचा चुका है। अब तो नुकसान उठाने की आपकी बारी है। जब भी तथाकथित स्टिंग प्रकरण का पूर्ण सत्य सामने आएगा, भाजपा के मुंह पर ऐसी कालिख पुतेगी कि आपकी पार्टी उसे धो नहीं पाएगी।

मैंने अपनी न्याय यात्रा के दौरान आपके दो मक्कारी भरे महा झूठों का पर्दाफाश किया। मैं आपकी पार्टी के इस तीसरे महापाप का भी भंडाफोड़ करूंगा। अभी तक आपकी पार्टी व सरकार न तो शुक्रवार अर्थात जुम्मे की छुट्टी का सरकारी गजट नोटिफिकेशन दिखा पाई है और न मेरा अखबार में छपा या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिया गया बयान दिखा पाई है, जिसमें मैंने कहा हो कि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाएगी! मैंने इनाम घोषित किया, फिर आपके व्यंगों से कुपित होकर आपको और आपकी सरकार को मैंने ललकारा, अपने स्वभाव के विपरीत ललकारा कि बाप के बेटे हो तो प्रमाण दो। अभी तक आपकी पार्टी कोई प्रमाण नहीं दिखा पाई है।

2016 का तथाकथित स्टिंग व स्टिंगबाज, आपकी पार्टी का तारणहार है। आज भी आप अपने ईष्ट देवता से ज्यादा 2016 के स्टिंग को याद करते हैं और स्टिंगबाज आपकी पार्टी व आपकी सरकार को कितना प्यारा है, कितना दुलारा है और कितना कमाऊ है, इस विषय में आप ज्ञानवर्धन के लिए अपने ही एक भूतपूर्व मुख्यमंत्री तथा एक भूतपूर्व विधायक जिनकी मूछें दल-बदल से पहले आसमान छेदती हुई दिखाई देती थी उनसे ज्ञानवर्धन ले सकते हैं, यदि टेलीफोन नंबर नहीं है तो मैं दे सकता हूं। भट्ट जी मैं आपको बताते चलूं कि इस तथाकथित स्टिंग में स्टिंगबाज आपकी पार्टी के एक और भूतपूर्व मुख्यमंत्री जिनके आप नम्रता वश पांव छूते हैं, उन्हें पापी कहता है और उनके पुत्र को सेटर अर्थात दलाल बताते हुए कहता है कि उसने “मुख्यमंत्री आवास को #दलाली का अड्डा बना दिया था”। बताइये क्या स्टिंगबाज के इस कथन पर आप विश्वास करते हैं?

आपने मेरा टॉप-अप तो सुना, लेकिन यह नहीं सुना कि मैं सरकार बचाने का भरोसा दिला रहे व्यक्ति द्वारा बिकने वाले विधायकों का प्रस्तावित मूल्य अदा करने में असमर्थता व्यक्त कर रहा हूं और कह रहा हूं कि मेरे पास कुछ भी नहीं है। यह तो आपकी पार्टी के भेजे सौदागर की दरियादिली थी कि वह बिना मांगे और बिना किसी पैसे के मेरे नाम पर लालकिला और चांदनी चौक करने में आमदा था। आपकी पार्टी का स्टिंगबाज बिना कुछ रुपये लिये जो मुझे लालकिला व चांदनी चौक बेच रहा था, मैंने भी सहज भाव से कह दिया कि जब मुझे लाल किला और चांदनी चौक की डिलीवरी कर दोगे तो ब्याज सहित मैं मूल्य अदा कर दूंगा।

यूं मैं आपके ज्ञानार्थ बता दूं कि कांग्रेस विधान मंडल दल, दल-बदलू विधायकों (उज्याडू बल्द) की सदस्यता रद्द करने हेतु दल-बदल कानून के तहत माननीय स्पीकर के पास आवेदन कर चुकी थी। माननीय स्पीकर महोदय ने कांग्रेस विधान मण्डल दल के आवेदन पर सभी दल-बदलुओं को नोटिस जारी कर दिए थे, की सदस्यता रद्द करने संबंधी मामले में आवश्यक विधिक प्रकिया प्रारंभ कर दी थी। इस प्रकिया के प्रारंभ होने के बाद आवेदन की मूल प्रकृति में कोई संशोधन नहीं किया जा सकता है अर्थात कांग्रेस पार्टी किसी भी दल-बदलू को वापस लेकर अपने पांव पर स्वयं कुल्हाड़ी मारती।

हमें पूरा विश्वास था कि सभी दल-बदलू विधायकों की सदस्यता रद्द होने जा रही है। क्योंकि उन्होंने एक महान न्याय विद (सेवा निवृत्त) जज महोदय के नेतृत्व में एक ऐसे संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे, जो पत्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं भाजपा विधानमंडल दल के नेता का लेटर हेड था। यह संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र माननीय राज्यपाल व स्पीकर महोदय को सौंपा गया था, यह पत्र अपने आप में दल-बदल का अकाट्य व स्वयं सिद्ध प्रमाण था। हम जानते थे इस पत्र के आधार पर सभी दल-बदलुओं की सदस्यता रद्द होगी ही होगी और बाद के घटनाक्रम में ऐसा ही हुआ। भट्ट जी जिन विधायकों की सदस्यता रद्द होने का मुझे विश्वास था तो मैं ऐसे सढ़े आलूओं को खरीदने की मूर्खता क्यों करता? स्टिंग स्वतंत्र पत्रकारिता की हाथ में एक अमोक अस्त्र है। मगर प्रायोजित स्टिंग कानूनी अपराध है। यह तथाकथित स्टिंग चीख-चीख करके कह रहा है कि मैं भाजपा प्रायोजित हूं, मैं भाजपा प्रायोजित हूं।

माननीय भट्ट जी आपने अपने बयान में एक शिकायतकर्ता का जिक्र किया है।सावधान रहना, ज्यादा छेड़छाड़ न करना। अभी तो उनके पेट से 2 ही गोले निकले हैं, जिन गोलों की आवाज ने आपकी पार्टी के नेताओं को अचेत कर दिया है। कहीं 2016 प्रकरण के सभी गोले बाहर निकल पड़े तो आपकी पार्टी का चेहरा और आपके कई नेताओं के चेहरे इतने बदरंग हो जाएंगे कि वह स्वयं भी अपने को नहीं पहचान पायेंगे। वैसे दिल्ली होशियार है। इसलिए सीबीआई और ईडी, दोनों इस व्यक्ति की परिक्रमा कर अस्तांचल गामी हो गये हैं।

मैं, CBI के नोटिस से परेशान नहीं हूं। मैंने तो उनके आते ही कहा कि बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते! मैं देख रहा हूं कि पिछले कुछ समय से चुनाव से एकाध वर्ष पहले सीबीआई को मेरी याद आती ही है, इस बार भी आई है। मैं चाहता हूं, सीबीआई गहराई से जांच करे। आपकी पार्टी और आपकी सरकार में यदि हिम्मत है तो सीबीआई की इस जांच को माननीय हाईकोर्ट के माननीय सीटिंग न्यायाधीश के देख-रेख में करवाने की हिम्मत करिए और जांच के दायरे में इस दल-बदल प्रकरण के सभी केंद्रीय पात्रों…… सहित श्री विजय वर्गीय एण्ड कंपनी को भी लाइए। फिर देखिए कैसा 20-20 क्रिकेट मैच जैसा रोमांच आता है। ठीक है न भट्ट जी, मुझसे सहमत हैं?

मेरी भगवान बद्रीश से प्रार्थना है कि 2016 के इस स्टिंग प्रकरण के प्रायोजकों, पात्रों, सहयोगियों, लाभार्थियों का खुलासा होने तक मेरे पांव और वाणी में शक्ति बनाये रखना।

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