विशाल ज्योतिदेव अग्रवाल-
नशीला कफ सिरप सिंडीकेट का असली आका कौन!
अमित सिंह टाटा से STF को एक फॉर्चूनर गाड़ी बरामद हुई है जिसका नंबर 9777 है, जानने वाले जानते हैं कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह की सभी गाड़ियों का नंबर 9777 ही होता है! इसका अर्थ है कि अमित सिंह टाटा धनंजय सिंह का बहुत ही करीबी है! पूर्व सांसद धनंजय सिंह इसी अमित सिंह टाटा को अपना छोटा भाई बताते हैं!



वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला जी लिखते हैं-
“मासूम बच्चों को मौत की नींद सुलाने वाले ज़हरीले कफ़ सिरप निर्माता गैंग के सदस्य अमित सिंह टाटा को एसटीएफ़ ने गिरफ़्तार किया है। इस अंतर्राष्ट्रीय तस्कर को एक बाहुबली का वरदहस्त प्राप्त था। गैंग का किंगपिन शुभम् जायसवाल फ़रार है, उसका साथ कई सफेदपोश देते थे। जिनकी मदद से उसके दुबई भाग जाने की आशंका है। चर्चा है कि वाराणसी के कुछ पत्रकार भी उससे उपकृत थे, इन्होंने अपने चैनल-संस्थान को तब तक खबर भेजने से परहेज किया जबतक पानी सिर से ऊपर नहीं चला गया। यहाँ तक कि कई कई शुरुआती ख़बरों में शुभम का नाम तक गुल कर दिया गया। जब तक मौत के इन सौदागरों के सरपरस्त दबोचे नहीं जाएंगे तब तक इस ख़तरनाक नेटवर्क का खुलासा हो पाना असंभव है।”


वरिष्ठ पत्रकार रोहिणी सिंह की पोस्ट-
छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया, क्या पार लगेगी इस बार उनकी नैया? शुभम जयसवाल हो या अमित टाटा, सबके बड़े भाई एक ही हैं। दिल्ली इस मामले को देश भर के कफ़ सिरप माफियाओं के लिए उदाहरण बनाना चाहती है। देखते हैं बड़े बड़े नेताओं को देख लेने की बात करने वाले माफिया को कौन बचाता है?
इस प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने लिखा है-
केंद्र के दबाव के चलते यूपी में कोडीन कफ़ सिरप मामले में हरकत शुरू हुई। यूपी एसटीएफ ने अमित सिंह टाटा को लखनऊ से गिरफ्तार किया। अब क्रोनोलॉजी देखिए। STF की अपनी प्रेस रिलीज़ कहती है कि 12 फ़रवरी 2024 को फेन्सिडिल कफ सिरप व कोडीन के अवैध कारोबार के मद्देनज़र, संयुक्त जाँच समिति का गठन किया गया था। इसमें STF के साथ ही खाद्य सुरक्षा व औषधि विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। मगर तब से अब तक मासूम बच्चों की सिलसिलेवार मौतों के अलावा हुआ क्या? इस बीच कोडीन कफ़ सिरप से मासूम बच्चों की मौत के मुख्य किरदार शुभम जायसवाल व अमित सिंह टाटा कहां-कहां दिखते रहे, और किसके संरक्षण में बचते रहे, किसी से छिपा नहीं है!!

शान-
जय हो माफिया जी की… अब तो यही कहा जा सकता है कि बड़े भाई के संरक्षण में उनके छोटे भाई लोग प्रतिबंधित/नकली कफ़ सीरप का काला कारोबार कर रहे थे। ईश्वर से डरिए माफिया जी, परिवार में आपके भी बच्चे होंगे या फिर शायद आपको ईश्वर से डर नहीं लगता??
खैर माफिया जी के कथित छोटे भाई अमित सिंह टाटा को यूपी STF ने गिरफ़्तार कर लिया है, पूछताछ जारी है, माफिया जी के अन्य कथित छोटे भाईयों की सर्च/ठिकानों पर रेड जारी है। लेकिन माफिया जी आपसे ये उम्मीद नहीं थी कि आप ऐसे लोगों के संरक्षक हैं।
एसटीएफ का बर्खास्त सिपाही और आका के साथ उसके रिश्ते!
ख़बरें कानाफूसी के अंदाज़ में पब्लिश हो रही हैं लेकिन लोग सच्चाई जानने समझने लगे हैं। अपराधी जब नेता बनता है और सिपाही जब अपराधी बनता है तो बड़ा घातक कॉकटेल जन्मता है। इनका गठजोड़ महाघातक और तेजाबी बन जाता है।
लोकतंत्र अब बूचड़खाने में तब्दील हो चुका है। आम नागरिक और उसके परिजन भाँति भाँति तरीके से क़त्ल किये जा रहे हैं। ये हत्यारा राजनीतिज्ञ कौन है, मेरे देश की संसद मौन है!
#coughsyrupscam #CoughSyrupCase #CoughSyrupDeaths


धनंजय सिंह का पक्ष पढ़िए-
नमस्ते प्रिय साथियों।
मुझे पता है कि कफ़ सिरफ़ के मुद्दे पर मेरे कुछ राजनैतिक विरोधियों ने पत्रकार बंधुओं को गुमराह कर के मेरे बारे में भ्रामक्ता फैलाने का कृत्य किया है।
इस सम्बन्ध में मैं आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि प्रकरण काशी/वाराणसी से जुड़ा होने के कारण कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं के द्वारा झूठे आरोप लगाकर माननीय प्रधानमंत्री जी के छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस प्रकरण की जाँच राज्य सरकार द्वारा गहनता से विभिन्न एजेंसियों के द्वारा कराई जा रही है जिससे प्रकरण की सत्यता सबके सामने आ जायेगी।
चूँकि यह मामला अंतर्राजीय है अतः माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि इस मामले की व्यापक जाँच सीबीआई से कराई जाये जिससे दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्यवाही सुनिश्चित हो और अनर्गल आरोपों और झूठी ख़बरों पर विराम लग सके।
आप सभी को मैं यह भी बताना चाहता हूँ कि इस सम्बन्ध में मैं मा.प्रधानमंत्री जी और मा. मुख्यमंत्री जी को पत्र लिख रहा हूँ जिससे भ्रामक खबर चलवाने तथा राज्य सरकार की छवि धूमिल करने वालों का चेहरा उजागर हो सके।
सादर।
धनंजय सिंह
पूर्व सांसद
जौनपुर



