कानपुर | शहर में संगठित अपराध पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वकीलों की गैंग को भी आधिकारिक तौर पर रजिस्टर्ड कर लिया है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 28,000 वर्गमीटर की करोड़ों की जमीन कब्जाने के मामले में हाल ही में जेल से जमानत पर छूटे पत्रकार अवनीश दीक्षित के गिरोह के बाद अब अधिवक्ता धीरज उपाध्याय उर्फ दीनू उपाध्याय के सिंडिकेट को भी गैंग घोषित किया गया है।
पुलिस ने दीनू उपाध्याय को आईआर-09 इंटररेंज गैंग का लीडर घोषित किया है। इस गैंग में कुख्यात भूमाफिया रामखिलावन समेत 21 सदस्य शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, रंगदारी वसूली, जमीनों पर कब्जा और फर्जी दस्तावेजों से अरबों की संपत्ति हथियाना इनके मुख्य अपराध हैं। रंगदारी न मिलने पर गैंग डकैती और लूट जैसी वारदातों से भी परहेज नहीं करता।
अधिवक्ताओं की लंबी फेहरिस्त
खुद को अधिवक्ता बताने वाला दीनू उपाध्याय सोनभद्र जेल में बंद है। उसकी वकालत की डिग्री पर सवाल हैं, लेकिन इसी आड़ में उसने अपराध जगत में पैठ बनाई। उसके गैंग में 13 वकील बतौर सदस्य शामिल हैं। इनमें अजय शर्मा उर्फ जडेजा, उपेंद्र भदौरिया, अनूप शुक्ला, अरिदमन सिंह, धर्मेंद्र यादव धर्मू, गोपाल सिंह, नारायण भदौरिया, नीरज दुबे, मनु उपाध्याय, संजय उपाध्याय, श्रोत गुप्ता और विकास सिंह उर्फ विक्की ठाकुर शामिल हैं।
जेल, जमानत और फरारी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दीनू उपाध्याय समेत उसके 10 से ज्यादा गुर्गे फिलहाल जेल में बंद हैं। आठ सदस्य जमानत पर बाहर घूम रहे हैं, जबकि धीरज दुबे उर्फ टिवंकल और नीरज दुबे उर्फ सोनू पंडित फरार हैं। जमानत पर बाहर रहने वालों में विमला देवी, उसका बेटा शुभम निषाद, अजय जडेजा, उपेंद्र भदौरिया, उदय शर्मा, आलोक मिश्रा, धर्मेंद्र यादव उर्फ धर्मू और श्रोत्र गुप्ता शामिल हैं।
पत्रकारों के बाद अधिवक्ताओं की बारी
कानपुर रेंज में यह पहला मौका है जब पुलिस ने वकीलों की गैंग को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया है। इससे पहले पत्रकार अवनीश दीक्षित के गिरोह को आईआर-01 इंटररेंज गैंग और पत्रकार कमलेश फाइटर के गैंग को रजिस्टर्ड किया जा चुका है। अब दीनू उपाध्याय का गिरोह तीसरा संगठित इंटररेंज गैंग बन गया है।
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