Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

छत्तीसगढ़

पूर्व डीजीपी विश्वरंजन घटिया आदमी थे या बढ़िया, देखें ये दो विश्लेषण!

हिमांशु कुमार-

आज विश्वरंजन मर गये। वे छत्तीसगढ़ के डीजीपी थे। मेरी उनसे कुछ कामकाजी मुलाकातें हुईं थीं। एक बार माटवाड़ा नामक गाँव में स्थित सलवा जुडूम कैम्प में तीन आदिवासी मारे गये। अखबार में खबर छपी कि इन आदिवासियों को नक्सलवादी मार कर चले गये।

लेकिन उनकी विधवाओं ने हमें बताया कि उनके पतियों को पूरी बस्ती के सामने थाने के सामने हाथ पीछे बाँध कर थानेदार और सिपाहियों ने पीट पीट कर मारा था। पीटने के बाद पुलिस ने चाकू से आदिवासियों की ऑंखें निकाल ली थीं और अंत में माथे पर चाकू खड़ा करके पत्थर से ठोक कर मार डाला था। पत्नियों ने जब अपने पतियों को छुड़ाने की कोशिश की तो उन्हें भी पीटा गया था। मेरे पास उन घायल महिलाओं के फोटो आज भी रखे हैं।

हमने राजधानी रायपुर में प्रेस कांफ्रेंस की और बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। विश्वरंजन ने मुझे फोन कर कहा कि उन महिलाओं को लेकर मेरे आफिस आइये। महिलाओं ने विश्वरंजन को सब सच बता दिया। मेधा पाटेकर को मैंने पूरी घटना बताई उन्होंने विश्वरंजन को चिट्ठी लिखी। विश्वरंजन ने उत्तर में लिखा कि इन महिलाओं को नक्सलवादियों ने अपने कब्जे में रखा हुआ है इसलिए वे नक्सलवादियों के कहने से पुलिस पर झूठा आरोप लगा रही हैं।

मेधा पाटेकर ने मुझे यह बताया तो मैंने हंसते हुए कहा महिलायें घायल हैं आश्रम में इलाज के लिए रुकी हुई हैं मुझे ही विश्वरंजन नक्सली बोल रहे हैं और हमारे गांधीवादी आश्रम को नक्सलियों का अड्डा।

बाद में इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस के खिलाफ रिपोर्ट दी थानेदार और दो सिपाही जेल गये थे।

पुलिस ने एक बार मेरा विडिओ कैमरा छीन लिया था क्योंकि महिला पत्रकार प्रियंका उससे पुलिस का विडिओ बना रही थी और पुलिस पीड़ित आदिवासियों का अपहरण करके बिना नम्बर प्लेट की गाड़ियों में लेकर भाग रही थी। विश्वरंजन ने मीडिया को बताया कि हमें नक्सलवादियों का कैमरा बरामद हुआ है जिसमें तीस जीबी का नक्सली डाटा मिला है। बाद में मेरी छोटी बेटियों की बचपन की अनमोल यादों के सभी विडिओ डिलीट करके विश्वरंजन ने कैमरा वापिस कर दिया।

वे एक झूठे और अनैतिक अधिकारी थे। भारत के शहरी गैर आदिवासी मिडिल क्लास हिन्दू साहित्यकार इस झूठे व्यक्ति के बड़े फैन हैं।


सुनील कुमार-

एक दोस्त, बहुत बड़ी शख्सियत का गुजर जाना, ढेर यादें छोड़कर..

विश्वरंजन का गुजर जाना बहुत से लोगों की जिंदगी से एक बड़ी अहमियत वाली हस्ती का गुजर जाना है। वे अविभाजित मध्यप्रदेश के आईपीएस रहे, बहुत लंबे वक्त तक भारत की प्रमुख खुफिया एजेंसी, आईबी के एक सबसे बड़े ओहदे पर रहे, और छत्तीसगढ़ का पुलिस प्रमुख बनकर उन्हें अनमने ढंग से लौटना पड़ा, क्योंकि उस वक्त के डीजीपी के अचानक गुजर जाने से दफ्तर खाली हो गया था, और छत्तीसगढ़ में उनसे अधिक माकूल कोई दूसरा अफसर मिल नहीं सकता था। इसलिए वे दशकों बाद छत्तीसगढ़ पुलिस में लौटे।

विश्वरंजन पुलिस के एक बड़े काबिल, और असाधारण व्यक्तित्व के धनी अफसर थे। साहित्य में उनकी गहरी दिलचस्पी और सक्रिय दखल, उन्हें पुलिस और सरकार से परे के एक अलग दायरे से जोडक़र रखते थे। वे पेंटिंग भी करते थे, कविता भी लिखते थे, और उनके साथ बरसों की दोस्ती में मैं उनकी इन दोनों खूबियों की भाषाओं से अनजान सुखी बना रहा। किसी कवि-दोस्त की कविता पढऩे का बोझ मुझ पर नहीं रहता, और मजदूर या क्रांतिकारी गीतों से अधिक कुछ समझ नहीं पड़ता, इसलिए मैं अपने कविता-निरक्षर होने की नुमाइश करने में नहीं हिचकता।

विश्वरंजन के साथ शायद सैकड़ों बार घंटों-घंटों बैठने पर भी मैं उनकी कविताओं से बेदाग बचा रहा। दूसरी तरफ पेंटिंग के बारे में मेरी नासमझी पर उन्हें तरस भी आती थी, और वे कहते थे कि चित्रकला को पढ़ने की एक अलग भाषा होती है, जो कि किस्सा-कहानी की भाषा से अलग रहती है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन