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सुख-दुख

विश्वास नहीं होता फ्रैंक हुजूर नहीं रहे!

सत्येंद्र पीएस-

विश्वास नहीं होता कि Frank Huzur नहीं रहे। बनारस में एक प्रोग्राम में मुलाकात हुई। उसके बाद गाहे बगाहे मिलते ही रहते थे। लखनऊ में उनके आवास पर भी मिला। उनकी पत्नी, बच्चा! बिल्लियां!

एक प्यारे इंसान के बारे में इस तरह की बातें लोग फेसबुक पर लिख रहे हैं और बहुत देर से सोच रहा हूँ कि यह एक अफवाह हो।ये कल शाम का ही का तो उनका व्हाट्सऐप अपडेट है!


प्रशांत टंडन-

दोस्तों की वॉल से पता लगा कि समाजवादी विचारक, लेखक, पत्रकार और एक अच्छे दोस्त frank huzur का दिल का दौरा पड़ने से कल रात निधन हो गया. फ्रैंक साहब से अक्सर फोन पर बात होती थी.

इमरान खान, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव पर जीवनियों के अलावा उन्होंने कई किताबें लिखी. सोशलिस्ट फैक्टर मैगजीन भी निकालते थे.

सेक्युलरिज्म और सामाजिक न्याय की विचारधारा से उनका गहरा रिश्ता था और बिना रुके इन पर काम करते थे.

फ्रैंक कम उम्र में बहुत काम कर गये लेकिन ऐसे ऊर्जावान व्यक्ति को अभी बहुत काम करना था. इन दिनों वो राहुल गांधी के संविधान सम्मान मिशन में काफी सक्रिय थे.

आखिरी बार जब मुलाकात हुई तो इसी हैरिस ट्वीड ब्लेज़र की मैंने तारीफ करते हुए कहा था आप पर फबता है.

बहुत मिस करेंगे आपको फ्रैंक. विनम्र श्रद्धांजलि.


संदीप कुमार-

Frank Huzoor passed away due to a heart attack. Frank and I connected on social media around 2010 and quickly formed a good friendship, sharing similar views on many issues. However, after nearly a decade, our disagreements grew, and following some debates, we ceased interactions on social media as well.

Frank was a dedicated and hardworking individual committed to socialist ideology, with immense energy. His passing was untimely, but unfortunately, this has become the new normal


सुरेंद्र सिंह चौधरी-

NO No You can’t go like this dear friend

ये अविश्वसनीय है लेकिन सच होते हुए भी नाकाबिले बर्दाश्त है। आप की तो बहुत जरुरत थी अभी देश और समाज को। अत्यंत शालीन, विनम्र और अंग्रेजी साहित्य के विद्वान लेखक एवं पत्रकार के रुप में ख्याति अर्जित कर चुके आपकी जीवन यात्रा इतनी छोटी क्यों? मैं और साथी Badr E Alam तो बहुत बार लखनऊ आपके आवास पर घंटों आपके साथ बैठते रहे, देश, काल, राजनीति और दर्शन पर चर्चाएं अब सब खत्म?

आपके लाइफ स्टाइल का में बहुत प्रशंसक रहा। मैनरिज्म आपके चाल ढाल में रचा बसा था। सलीके से उठना, बैठना, चलना और मेहमाननवाजी का लखनवी अंदाज अब सिर्फ यादें रह जायेंगी ? वर्षों बाद इतने घातक दुःख का सामना कैसे कर सकता हूं?

वर्षों पहले गुजरात के IPS अधिकारी संजीव भट्ट की गिरफ्तारी के विरोध में मैं २अक्टूबर को लखनऊ (हजरतगंज) में गांधी प्रतिमा पर अपने एक पोते और एक पोती के हाथों में Free Sanjeev Bhatt का पोस्टर लेकर जैसे ही पहुंचा तो सबसे पहले आपने ही डरे हुए बच्चों को हौसला दिया और खुद बच्चों के साथ खड़े हो गए।

अब क्या कहूं!


एसके यादव-

इतनी कम उम्र और बीमारी की भी कोई खबर नहीं थी Frank Huzur भाई, आखिर ऐसा भी क्या हो गया, एक बेहद अच्छा इंसान, सोशियलिज्म का हमखयाल और समर्थक हमारे बीच से अचानक विदा लेकर हम सबको हतप्रभ कर गया, यकायक तो भरोसा नहीं हुआ लेकिन वक्त के क्रूर हाथों ने एक बच्चे को पिताविहीन और Mukta Singh मैम को पतिविहीन कर दिया, एक भरा पूरा खुशहाल परिवार अचानक गमजदा हो उठा,

हम स्तब्ध और बेहद दुःखी हैं, इस कठिन वक्त पर हमारी तमाम हार्दिक संवेदना भाई फ्रैंक की मिसेज़ बेटे मार्को और माता पिता सहित सभी परिवारीजनों – मित्रों के साथ हैं, वक्त उन सबको ये असह्य दर्द बर्दाश्त करने की शक्ति दे,

अंतिम जोहार हो आपको फ्रैंक भाई


राघवेंद्र दुबे-

वेद जी के और मेरे ‘हुजूर’ नहीं रहे

मनोज कुमार (यादव), मनोज खान और बाद में फ्रैंक हुजूर को विनम्र श्रद्धांजलि

सोशलिस्ट थिंकर , लेखक, नाटककार, पत्रकार और इन सबसे ऊपर एक नेक दिल इंसान Frank Huzur (फ्रेंक हुजूर) साहब का न होना सुनकर स्तब्ध हूं । मुझे सूचना मिली अपने छोटे भाई वरिष्ठ पत्रकार चौधरी वेद प्रकाश सिंह यादव (वेद प्रकाश यादव) से।

कल ही फ्रेंक हुजूर की मुलाक़ात दिन में राहुल गांधी जी से हुई थी। बताया जाता है कि दिल का दौरा पड़ने से कल रात ही उनका निधन हो गया। फ्रैंक हुजूर साहब से मेरा भी अपनापा हो चुका था और उनसे पहली आत्मीय मुलाकात वेद जी के जरिये ही हुई थी, जब मैं राहुल गांधी जी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर ‘डिस्कवरी ऑफ डेमोक्रेसी’ लिख रहा था। फ्रैंक साहब ने मेरी खासी हौसला आफजाई की थी।

यह किताब वेद जी से जाने जाते ‘संवेदना प्रकाशन’ से छपी और फ्रैंक हुजूर जी की किताब अखिलेश यादव जी की बायोग्राफी भी इसी प्रकाशन से ही छप रही है। फ्रैंक हुजूर ने इमरान खान, मुलायम सिंह यादव जी पर जीवनियों के अलावा कई और किताबें लिखी। वह ‘सोशलिस्ट फैक्टर’ मैगजीन भी निकालते थे।

फ्रैंक हुजुर की लिखी नेताजी मुलायम सिंह यादव की जीवनी की प्रस्तावना बड़ी अंग्रेजी मीडिया कंपनी सीएनएन के वरिष्ठ पत्रकार जिम सदरलैंड ने लिखी। ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में रहने वाले विवेक ग्लेनडेनिंग उमराव मानते हैं कि– ‘जनता और मीडिया द्वारा जिस तरह रूस में लेनिन का मान-सम्मान किया जाता है, ठीक उसी तरह मुलायम सिंह को भी भारत में जनता और मीडिया द्वारा मान-सम्मान दिया जाना चाहिए था।’

बिहार के बक्सर में जन्मे फ्रैंक हुजूर मूलतः अंग्रेजी के लेखक और जर्नलिस्ट थे। राँची के सेंट जेवियर्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर फ्रैंक अपनी इंगलिश पोएट्री और ड्रामा (हिटलर इन लव विथ मैडोना) से चर्चित हुए। इसके बाद इन्होंने नाटक ‘ब्लड इज बर्निंग’ और‘ स्टाइल है लालू की जिंदगी’ लिखा। मात्र बीस वर्ष की उम्र में अंग्रेजी मैगजीन ‘यूटोपिया’ के संपादक बनने वाले फ्रैंक ने प्रख्यात क्रिकेटर और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की राजनीतिक जीवनी ‘इमरान वर्सेस इमरान: दी अनटोल्ड स्टोरी’ भी लिखी है।


उर्मिलेश-

कुछ देर पहले फेसबुक पर प्रिय फ्रैंक हुजूर Frank Huzur के बारे में स्तब्ध करने वाली सूचना देखी तो भरोसा नहीं हुआ. उनके दो-दो नजदीकी लोगों को फोन किया. सोशल मीडिया के जरिए मिली उस दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद सूचना से मन व्यथित है.

एक लेखक और एक्टिविस्ट के रूप में फ्रैंक हुजूर को जानने वाले पूरे देश में हैं. कुछ साल पहले मेरी उनसे मुलाकात हुई थी. उन्होंने अपनी किताबें और एक मैग्जीन के कुछ अंक मुझे दिये. उन्होंने इमरान खां और मुलायम सिंह यादव जी की जीवनी भी लिखी. इमरान साहब और मुलायम जी के अलावा अखिलेश यादव पर भी उन्होंने काफी लिखा. मुलायम सिंह यादव पर लिखी उनकी जीवनी की मैने समीक्षा भी की थी. उसे पढ़कर वह खुश थे और मुझे फोन किया.

फ्रैंक को जब भी देखा, वह हमेशा जोश, गतिशीलता और जिंदादिली से लबरेज दिखे. स्वास्थ्य भी बहुत अच्छा दिखता था. तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद वह हमेशा आशा और विश्वास से भरे दिखते थे.

पिछले काफी समय से वह कांग्रेस नेता Rahul Gandhi से जुड़ गये थे. संविधान और लोकतंत्र की बचाने की लड़ाई का हिस्सा बनकर वह समाज के लिए बहुत जोशो-खरोश से काम कर रहे थे. कुछ सप्ताह पहले ही मेरी उनसे फोन पर बातचीत हुई थी.

उनके निकटस्थ मित्रों के मुताबिक बीती रात दिल्ली में ह्रदयाघात से उनका निधन हुआ..उनके इस तरह असमय जाने से मन व्यथित है. दिवंगत फ्रैंक हुजूर को हार्दिक श्रद्धांजलि. उनकी पत्नी और पूरे परिवार के प्रति हमारी शोक संवेदना.

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