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राष्ट्रीय सहारा के कुमाऊँ ब्यूरो चीफ गणेश पाठक हुए सम्मानित

सलीम मलिक-

हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा द्वारा भारतीय प्रेस दिवस पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में राज्य के वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रीय सहारा के कुमाऊँ ब्यूरो प्रमुख गणेश पाठक को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेन्द्र क्वीरा ने किया।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दिलीप चौबे ने भारतीय प्रिंट मीडिया के इतिहास और वर्तमान स्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मीडिया का स्वरूप तेजी से बदला है। उन्होंने कहा कि 16वीं सदी से प्रिंट मीडिया का इतिहास शुरू होता है और भारत में पत्रकारिता की शुरुआत आज़ादी के आंदोलन के साथ हुई।

डॉ. चौबे ने बताया कि तकनीक के आगमन ने मीडिया के पारंपरिक ढांचे को हिला दिया है—पहले टेलीविज़न, फिर सैकड़ों चैनल और अब सोशल मीडिया तथा वेब पोर्टल्स ने सूचना प्रवाह की दुनिया ही बदल दी है। उन्होंने कहा, “आज मीडिया के सामने सबसे बड़ा खतरा है—भ्रम पैदा करने वाली और भड़काऊ खबरें। अखबार अब कॉरपोरेट कर्म में बदल गए हैं, जिससे जनहित और विज्ञापनदाताओं के हितों में असंतुलन पैदा हो गया है।”

डॉ. चौबे के मुताबिक, प्रिंट पत्रकारिता आज भी सबसे ईमानदार और विवेकपूर्ण माध्यम है, लेकिन चुनौतियाँ बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सत्ता से सवाल करने की अपनी मूल भूमिका को और मजबूती से निभाना होगा।

“अभिव्यक्ति कौशल और जनसरोकार दोनों बचाए रखना जरूरी” — कुलपति

संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि तकनीक ने पत्रकारिता की दिशा और गति दोनों बदल दी हैं। सोशल मीडिया और ग्लोबल दुनिया के कारण समाचारों की दूरी और तात्कालिकता कम हुई है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह ज़रूरी है कि वे नए कौशलों के साथ-साथ पत्रकारिता के मानकों और जनसरोकारों को भी बनाए रखें। उन्हें पत्रकारिता के चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।

“प्रिंट मीडिया दस्तावेज की तरह” — विजय यादव

‘प्रिंट मीडिया का इतिहास और वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर बोलते हुए दैनिक जागरण के संपादक विजय यादव ने कहा कि प्रिंट मीडिया एक दस्तावेज की तरह है जहाँ सब कुछ सुरक्षित रहता है। उन्होंने कहा कि तात्कालिक खबरों के दौर में अखबारों के सामने चुनौती है कि वे अगले दिन पाठक को वह खबर किस नए रूप में दें।

विजय यादव ने कहा, “हम खबरें देने में देर कर सकते हैं, पर बिना सोचे-समझे खबर नहीं दे सकते। यही प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता का आधार है।” उन्होंने कहा कि अखबारों का जनसरोकारों से जुड़ना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही पत्रकारों को भाषा की शुद्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

“हर तीसरा व्यक्ति पत्रकार बन गया है” — गणेश पाठक

सम्मानित किए गए वरिष्ठ पत्रकार गणेश पाठक ने कहा कि डिजिटल दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि जनसरोकारों की पत्रकारिता लगभग समाप्त हो रही है और स्तुतिगान की पत्रकारिता बढ़ती जा रही है।

पाठक ने कहा कि पत्रकारिता वही है जो मनुष्य, समाज और राष्ट्र के हित की बात करे; उसके विपरीत जाने वाली प्रवृत्तियों का विरोध करना ही सच्ची पत्रकारिता है।

कार्यक्रम में शहर के कई वरिष्ठ पत्रकार व बुद्धिजीवी उपस्थित रहे, जिनमें ओपी नेगी, जगमोहन रौतेला, दया पांडे, चन्द्रशेखर भट्ट, विपिन चन्द्रा, नवीन चन्द्र पाठक, नीमा पाठक, गणेश जोशी, भूपेन्द्र सिंह, प्रो. पी.डी. पंत, प्रो. गिरिजा पांडे, जितेन्द्र पांडे, एम.एम. जोशी, कल्पना लखेड़ा, शैलेन्द्र टम्टा, पूर्णिमा, सुनील श्रीवास्तव, डॉ. शशांक शुक्ला आदि शामिल रहे।

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1 Comment

1 Comment

  1. Charan Singh

    November 18, 2025 at 12:36 pm

    चलो बंद होने पर ही सही पुरस्कार मिला है। बहुत बहुत बधाई। गणेश पाठक जी जरा यह भी तो बता दें कि राष्ट्रीय सहारा में मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई और बकाया भुगतान की लड़ाई में वह कितने सक्रिय रहे।

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