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छत्तीसगढ़

रेत माफियाओं ने टीवी रिपोर्टरों पर किया जानलेवा हमला, फायरिंग और मारपीट से पत्रकारों में उबाल

गरियाबंद (छत्तीसगढ़)- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अवैध रेत खनन की खबर कवर करने पहुंचे पत्रकारों पर रेत माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया। राजिम क्षेत्र के पितईबंद घाट (पैरी नदी) में सोमवार को कवरेज के दौरान माफिया के गुर्गों ने पत्रकारों से मारपीट की और दो बार फायरिंग भी की। सिर पर लोहे की रॉड से वार किए जाने से एक पत्रकार लहूलुहान हो गया। यह पूरी घटना पत्रकारों की ओर से बनाए गए वीडियो में भी कैद हुई है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

हमले का शिकार हुए पत्रकारों में इमरान मेमन, थानेश्वर साहू और जितेंद्र सिन्हा सहित तीन से चार स्थानीय चैनलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, जैसे ही पत्रकारों ने कैमरा ऑन कर रिकॉर्डिंग शुरू की, मौके पर मौजूद हथियारबंद गुर्गों ने पहले उनसे बहस की, फिर कैमरा और आईडी कार्ड छीनकर हमला कर दिया। इमरान मेमन के सिर पर लोहे की चीज से वार किया गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद पत्रकारों ने किसी तरह खेतों में भागकर अपनी जान बचाई। हमलावर करीब तीन किलोमीटर तक बाइक और स्कूटी से उनका पीछा करते रहे। भागते हुए पत्रकारों ने एक 14 सेकंड का वीडियो भी बनाया, जिसमें वे प्रशासन से मदद की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं।

प्रशासन को वीडियो भेजने पर हरकत में आया तंत्र

पत्रकारों ने यह वीडियो जिले के प्रशासनिक व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजा, जिसके बाद अधिकारियों ने हरकत में आकर मौके पर टीम भेजी। गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह यूके के निर्देश पर एसडीएम मौके पर पहुंचे। एडिशनल एसपी जितेंद्र चंद्राकर ने बताया कि घटना स्थल का निरीक्षण किया गया और पत्रकारों की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पत्रकारों में उबाल, धरना-प्रदर्शन शुरू

इस हमले को लेकर प्रदेश भर के पत्रकारों में गहरा आक्रोश है। राजिम में सुंदरलाल शर्मा चौक पर पत्रकारों ने धरना देते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और खनिज विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारी पत्रकारों का आरोप है कि रेत माफिया को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते वे खुलेआम हमले कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने केवल FIR दर्ज करने को नाकाफी बताया और अविलंब गिरफ्तारियां सुनिश्चित करने, दोषियों पर कठोर धाराएं लगाने तथा जिला खनिज अधिकारी को पद से हटाने की मांग की है।

अवैध खनन का बड़ा नेटवर्क, प्रशासन मौन

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, गरियाबंद जिले में केवल 4 वैध रेत खदान हैं जबकि 12 से ज्यादा अवैध खदानें संचालित हो रही हैं। आरोप है कि राजिम क्षेत्र में 17 से 18 घाटों पर भाजपा नेताओं के संरक्षण में अवैध उत्खनन जारी है। पितईबंद घाट, जहां पत्रकारों पर हमला हुआ, वहां कोई खनन लाइसेंस नहीं है।

रेत माफिया नदी का बहाव रोकने, पेड़-पौधे काटने और वन क्षेत्र में डंपिंग करने जैसे अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर हमला करना आम बात हो गई है, फिर भी इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती।

प्रशासन का दावा: गठित की गई स्पेशल टीम

राजिम पुलिस का कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। एक विशेष टीम गठित कर संदिग्धों की तलाश की जा रही है। पुलिस अधीक्षक ने बयान दिया कि पत्रकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और रेत माफिया के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

बड़ा सवाल: क्या छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता करना ‘जोखिम भरा पेशा’ बन चुका है?

यह घटना छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हाल ही में मेकाहारा अस्पताल रायपुर में कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी धमकाया गया था। मुकेश चंद्रकार की हत्या की यादें अभी धुंधली नहीं हुई थीं कि एक और हमला सामने आ गया।

इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों को उजागर करना पत्रकारों के लिए जान का जोखिम बनता जा रहा है। बार-बार हमले और प्रशासनिक निष्क्रियता से यह सवाल उठता है—क्या छत्तीसगढ़ में माफियाओं का राज चल रहा है?

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