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बिहार

चुनाव से पहले बिहार में चली गोली, कारोबारी गोपाल खेमका का मर्डर, देखें CCTV फुटेज

स्वाति तिवारी-

मगध अस्पताल के मालिक और बिहार के कारोबारी गोपाल खेमका की ऐसी हत्या बिहार के चुनावी रक्तरंजित की आहट तो नहीं है? उनके बेटे गुंजन खेमका की हत्या 2018 में हुई थी और अपराधी जेल भी गया था..मगर आरोपी के जेल से बाहर निकलते उसकी भी हत्या हो गई थी.


ज्ञानेश्वर वात्सायन-

बड़े बिजनेसमैन गोपाल खेमका मर्डर के बाद पटना में कानून-व्यवस्था की बात मजाक है. यह एक्सीडेंटल क्राइम नहीं, ऑर्गेनाइज्ड क्राइम है. और, यह बहुत ही सीरियस बात है. ऊपर से पुलिस का रिस्पांस सिस्टम, तमाशा ही है. यह कहने से काम नहीं चलेगा, 6 साल पहले इनके बेटे गुंजन खेमका का भी मर्डर हुआ था. तो इसका मतलब क्या ये हुआ कि बेटे को मारने वाले पिता को भी मार देंगे. मतलब, कोई कंट्रोल नहीं है न ! बताने वाले को यह भी बता दें कि जंगल राज के दिनों में इनके बड़े भाई विजय खेमका पर भी दिनदहाड़े गोलियों की बरसात हुई थी. तब वे, PMCH के सामने दवा की अपनी दुकान औषधि में बैठे थे. हालत बहुत खराब थी, वह तो PMCH में डॉ. यू पी सिंह जैसे सर्जन थे, जिन्होंने रिस्क लेकर आपरेशन कर विजय खेमका की जान बचा ली थी.

गोपाल खेमका पर रात को 11 से 11.30 बजे के बीच गोली चलती है. यह उनकी नियमित दिनचर्या में शामिल था, शाम को बिजनेस से फुर्सत पाकर बांकीपुर क्लब जाना और फिर रात को लौटना. इसकी जानकारी निश्चित तौर पर अपराधी को रही होगी, तभी वह उनके लौटने का इंतजार कर रहा था.

गोपाल खेमका का अपार्टमेंट कटारुका निवास कहाँ है, यह भी समझिए. पनाश होटल के बिलकुल पास. रात के 12 बजे तक तो यहां Barista भी शायद खुला रहता है. खैर, Barista को भूलिए, गांधी मैदान थाना तो बहुत ही करीब है. इतना करीब कि बाइक के साइलेंसर की तेज आवाज भी सुनाई पड़े. डिस्ट्रिक्ट जज भी यहीं रहते हैं. रिज़र्व बैंक है, तो वहां भी फ़ोर्स की तैनाती है.

पर, किसी को खबर नहीं लगती. रात 1 बजे के करीब जब वारदात के बारे में हम पहली सूचना पोस्ट करते हैं, तब तक सभी बेखबर हैं. मैं पटना पुलिस के व्हाट्सएप्प ग्रुप में भी सूचना साझा करता हूं, यहां भी कोई हलचल नहीं होती. अखबारों के अधिकांश क्राइम रिपोर्टर को भी जानकारी नहीं. कई लोग मुझसे ही क्राइम स्पॉट की खबर लेते हैं.

सबसे हैरानी वाली बात ये कि अब तक घटना-स्थल पर कोई पुलिस नहीं पहुंची है. यह, तमाशा नहीं तो और क्या है ? अब पुलिस प्रशासन के लोग चाहे जो कहें. पटना पुलिस के व्हाट्सएप्प ग्रुप में मेरी जानकारी के बाद ANI के स्टेट हेड मुकेश सिंह भी अपडेट जानना चाहते हैं, पर कोई जवाब नहीं मिलता.

उधर, वारदात के बाद सभी लोग गोपाल खेमका को लेकर मेडिवर्सल हॉस्पिटल पहुंचते हैं. सिर में गोली मारी गई थी, डॉक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया. हॉस्पिटल वालों ने पुलिस को नियमानुसार जानकारी दी. बस, कुछ सिपाही आते हैं, संभव है एकाध जमादार-दरोगा भी हो. सिस्टम कैसे ध्वस्त है, इससे समझिए कंकड़बाग थाना और गांधी मैदान थाना तक में समन्वय नहीं है. सूचना का आदान-प्रदान नहीं होता. यदि होता, तो क्राइम स्पॉट पर पुलिस जरुर पहुंच जाती.

हॉस्पिटल में पटना के बिजनेस क्लास के लोग जमा हो गए हैं. सभी बहुत गुस्से में. वे भयभीत हैं, सब कुछ खत्म हो गया दिख रहा है. कोई सीनियर पुलिस ऑफिसर अब तक नहीं पहुंचा है. नियम से डेड बॉडी को पुलिस को यहीं से पोस्टमॉर्टम के लिए नियंत्रण में लेना था. लेकिन, कोई जिम्मेवार पुलिस वाला वहां रहे तो. परिजन रात 2 बजे के करीब शव लेकर फिर से घर आ जाते हैं. रास्ते में भी पुलिस नहीं. मैं, अब तक 2-4 पोस्ट कर चुका हूं. अब जाकर सिटी एसपी पहुंची हैं. पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी आ गए हैं. सुबह पोस्टमार्टम के लिए फिर से शव को PMCH ले जाया जाता है. अब इस व्यवस्था के बारे में और क्या कहें? ॐ शांति.

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