कन्हैया शुक्ला-
आने वाले दिनों में हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं. इस चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तीनों की नज़र है. पंजाब और दिल्ली में आप पार्टी की सरकार है और दोनों राज्यों के बीच हरियाणा में बीजेपी की सरकार है. जब किसान आंदोलन हुआ तो केंद्र में बीजेपी सरकार का जम के विरोध पंजाब-हरियाणा में देखने को मिला था. लेकिन हरियाणा की बीजेपी सरकार ने इसकी आंच को बहुत हद तक कमज़ोर कर दिया था. हरियाणा की खट्टर सरकार ने इस आंदोलन की आंच केंद्र की बीजेपी सरकार तक नहीं पहुंचने दी जबकि दिल्ली और पंजाब की राज्य सरकारें इस आंदोलन के समर्थन में खड़ी थी.
राजनीतिक समीकरण बदलते गए. बीजेपी को पता है कि हरियाणा में विरोध है इसलिए खट्टर साहब की ही बलि चढ़ा दी गई और इमेज़ कंट्रोल के चक्कर में सारा ठीकरा खट्टर के ऊपर डालते हुए सीएम बदल दिया गया. पर क्या सीएम बदलने से बीजेपी हरियाणा को जीत पाएगी?
सवाल बड़ा है, जिसका जवाब शायद मीडिया के बड़े व्यापारी ZEE संस्थान के मालिक सुभाष चंद्रा की इस पोस्ट में छुपा है. पोस्ट से ये साफ संकेत है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी साफ़ हो रही है. और ये बात बीजेपी के नेता और संगठन के लोग भी जानते हैं. बीजेपी को अहसास है कि हरियाणा का चुनाव जीत पाना बहुत मुश्किल है.
सुभाष चंद्रा एक सफ़ल मीडिया कारोबारी हैं. सरकारों-नेताओं से उनका पुराना नाता है. हरियाणा के हिसार से ताल्लुक रखते हैं. वैसे तो महोदय बहुत से नेताओं से बात करते होंगे पर पर्सनल लेवल पर हुई बातचीत को सोशल मीडिया पर नहीं लिखते होंगे. लेकिन हरियाणा चुनाव के पहले वो हिसार के नेता कमल गुप्ता (BJP प्रत्याशी) से हुई अपनी बातचीत को लिखने से रोक नहीं पाए.

सोशल मीडिया पर पोस्ट करके वो जता रहे हैं कि हिसार में जनता उनसे बहुत नाराज़ है इसलिए ये उनको आशीर्वाद नहीं देंगे. इस पोस्ट से लगता है कि ये ही कमल गुप्ता और बीजेपी का भविष्य हरियाणा में निर्धारित करते हैं. ये भी हो सकता है कि सुभाष चंद्रा को अहसास है कि हरियाणा में बीजेपी की सरकार नहीं बन रही है और इस खेल में दूसरे पक्ष के खिलाड़ियों से सम्बंध सुधारने का वक्त आ गया है.
ख़ैर, सुभाष चंद्रा राजनीति में उड़ती चिड़िया के पर गिनने में लग गए हैं की जिस तरफ़ ऊंट करवट लेगा ये भी उधर ही बैठ जाएंगे.
चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बीजेपी के प्रत्याशी कमल गुप्ता को “कगु” के नाम से संबोधित किया है. शॉर्ट-फॉर्म के हिसाब से तो उन्हें खुद का नाम “सुचं” रखना चाहिए था पर मैथ-मैटिक्स में तेज़ चंद्रा Zee ने जनता के बीच एक मैसेज देने का प्रयास किया है की जो वो लिखते हैं उसको सच से जोड़ा जाए इसलिए अपना नाम “सच” लिखा है!
बहरहाल, ये तो तय बात है कि बीजेपी की हालत हरियाणा में ठीक नहीं है और ये बात सुभाष चंद्रा समझ गए हैं और पहले से ही गोटी सेट करने में लग गए हैं.



