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मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिंदी अनुवाद पढ़ें (पार्ट वन)

अखबार प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमजीवी पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मियों को मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतनमान न दिए जाने और माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मानने पर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई 83 अवमानना याचिकाओं और तीन रिट पेटिशनों का निपटारा करते हुए 19 जून, 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है, उसे कुछ कर्मचारी साथी मालिकों के पक्ष में बताकर निराशा का माहौल पैदा करने में जुटे हुए हैं। हालांकि इस निर्णय में मालिकों के पक्ष में सिर्फ एक ही बात गई है, वो यह है कि कोर्ट ने इनके खिलाफ अवमानना को स्वीकार नहीं किया है और जिन अखबार मालिकों ने मजीठिया वेजबोर्ड अधूरा लागू किया है और जिनने नहीं लागू किया है उन्हें एक और मौका दिया गया है।

5. अधिनियम की धारा 17बी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षकों की नियुक्ति की व्यवस्था करती है।

6. धारा 9 और 13सी के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने 24.05.2007 को डा. न्यायमूर्ति नारायण कुरुप(उच्च न्यायालय मद्रास के सेवानिवृत्त कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश) की अध्यक्षता में श्रमजीवी पत्रकारों और गैरपत्रकार कर्मियों को देय वेतन/मजदूरी का निर्धारण करने के लिए दो वेतनबोर्डों का गठन किया था। न्यायमूर्ति कुरुप के 31.7.2008 को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए जाने पर न्यायमूति जी.आर. मजीठिया (मुंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) को 04.03.2009 को दो वेतनबोर्डों का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। न्यायमूति मजीठिया(इसके बाद मजीठिया वेतनबोर्ड के रूप में संदर्भित)की अध्यक्षता वाले वेतनबोर्ड ने अपनी सिफारिशें 31.12.2010 को केंद्र सरकार को प्रस्तुत कीं। इसे केंद्र सरकार द्वारा 25.10.2011 को स्वीकार कर लिया गया और अधिनियम की धारा 12 के तहत इस संबंध में एक अधिसूचना 11.11.2011 को प्रकाशित की गई।

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